भारतीय नौसेना ने भारत में बने पहले हल्‍के लड़ाकू विमान तेजस को अपने विमानवाहक पोतों पर तैनात करने से इनकार कर दिया है. आल इंडिया रेडियो ने नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा के हवाले से कहा है कि सिंगल इंजन वाला यह विमान ईंधन भरने और हथियार लादने के बाद काफी वजनी हो जाता है जिससे इसके उड़ान भरने और उतरने में दिक्कत आती है. उनके मुताबिक इसी वजह से तेजस को विमानवाहक पोतों पर तैनात नहीं किया जाएगा, बल्कि इसकी जगह दूसरे लड़ाकू विमान खरीदने पर विचार किया जा रहा है.

सुनील लांबा ने आगे बताया कि नौसेना अब रूस से खरीदे गए मिग-29-के विमानों को ही स्‍वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत पर तैनात करेगी. आईएनएस विक्रमादित्‍य पर ये विमान पहले से तैनात हैं. इससे पहले नौसेना ने मिग-29-के और तेजस दोनों विमानों को ही आईएनएस विक्रमादित्‍य और विक्रांत पर तैनात करने की बात कही थी. हालांकि, खबरों के मुताबिक नौसेना की ओर से भविष्य में तेजस के इस्तेमाल की उम्मीद जताई गई है.

स्वदेशी तकनीक वाले पहले हल्के लड़ाकू विमान तेजस को भारतीय नौसेना में इसी साल शामिल किया गया था. यह 2205 किमी/घंटे की गति के साथ 3000 किमी तक मार करने में सक्षम है.

पिछले हफ्ते ही भारत के पहले स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत की क्षमताओं पर भी सवाल खड़े किए गए थे. अमेरिकी इंजीनियरों ने इसमें तमाम कमियाँ गिनाते हुए कहा था कि इसे पूरी तरह से इस्तेमाल करने में कम से कम एक दशक लग जाएगा.