मशहूर गीतकार आनंद बख्शी करीब तीन दशक पहले ‘रोते-रोते हंसना सीखो, हंसते-हंसते रोना’ सीखने का संदेश देता गीत लिख चुके हैं. लेकिन ऐसा करना किसी को सीखना नहीं पड़ता. कभी-कभी ऐसा हो जाता है कि हंसते-हंसते ही हंसने वाले की आंखों से आंसू छलक जाते हैं.

हंसना या रोना दोनों ही क्रियाएं भावनाओं की अभिव्यक्ति हैं. हंसते-हंसते रोने, यहां रोने का मतलब आंसू बहाने के पीछे पहला कारण यह बताया जाता है कि खुलकर हंसते हुए हमारे चेहरे की कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से काम करती हैं. ऐसा होने पर हमारी आंखों से यानी अश्रु ग्रंथियों से भी दिमाग का नियंत्रण हट जाता है इसलिए आंसू निकल पड़ते हैं. इससे मिलती-जुलती ही एक वजह यह भी मानी जाती है कि बहुत ज्यादा हंसने की स्थिति में व्यक्ति भाव-विभोर ही हो चुका होता है. बहुत ज्यादा भावुक होने के कारण चेहरे की कोशिकाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और यह दबाव भी आपके आंसू निकाल देता है. ऐसा करते हुए शरीर आंसुओं के जरिये तनाव को संतुलित करने की प्रक्रिया में होता है.

यह पूरी प्रक्रिया किसी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के लिए अलग-अलग हो सकती है. यह इस पर निर्भर करता है कि संबंधित व्यक्ति कितना भावुक है. यानी कम या ज्यादा रोने वालों के साथ यह क्रिया अलग-अलग तरह से होती है. इसके साथ ही उसके महिला या पुरुष होने से भी फर्क आ जाता है. ऐसा माना जाता है कि महिलाएं पुरुषों की तुलना में अधिक भावुक होती हैं इसलिए महिलाओं के साथ हंसते-हंसते आंसू निकलने की ज्यादा संभावना होती है.

कम या ज्यादा भावुक हो जाना भी यूं ही नहीं होता. इसके पीछे मुख्य भूमिका हार्मोन्स की होती है. बाल्टीमोर की मेरीलैंड यूनिवर्सिटी के मनोवैज्ञानिक रॉबर्ट प्रोवाइन बताते हैं कि हंसने में दिमाग का जो हिस्सा सक्रिय होता है, रोने में भी वही सक्रिय होता है. लगातार हंसने या रोने (इसे बहुत अधिक खुश या दुखी होना भी माना जा सकता है) की स्थिति में दिमागी कोशिकाओं पर तनाव बढ़ जाता है. ऐसी स्थिति में शरीर में कॉर्टिसोल और एड्रिनालाइन नामक हॉर्मोन्स का स्त्राव होता है. यही हॉर्मोन्स हंसने या रोने के दौरान शरीर में होने वाली विपरीत प्रतिक्रिया के लिए जिम्मेदार होते हैं.

इस स्थिति में व्यक्ति के रक्त में ग्लूकोज की सांद्रता कम हो जाती होती है तब कॉर्टिसोल हॉर्मोन रिलीज होता है. इसे स्ट्रेस हॉर्मोन कहते हैं. एड्रिनालाइन भी ऐसा ही एक स्ट्रेस हॉर्मोन है जो एड्रेनल ग्लैंड से निकलता है. यह हॉर्मोन दिल की धड़कनों को तेज कर देता है. ये सारे लक्षण घबराहट या दुखी होने के हैं. ज्यादा हंसाने पर कोशिकाएं तनाव में आ जाती हैं और दिमाग तक खुश होने के बजाय दुखी होने का संदेश जाता है और शरीर में ऐसे लक्षण देखने को मिलते हैं. इसी वजह से आंखों में आंसू भी आते हैं. कई बार कोई बुरी खबर मिलने पर भी इसी तरह की तनाव की स्थिति बनती है और इसके ठीक उलट व्यवहार देखने को मिलता है. यह कुछ और नहीं बस शरीर में जैविक संतुलन बनाए रखने की एक प्रक्रिया है.