देश में हर साल लू और गर्मी से हजारों लोग मरते हैं. यदि इस आपदा से बचाव का अहमदाबाद मॉडल पूरे देश में लागू किया जाए तो इन लोगों की जान बचाई जा सकती है.
हर साल मई का महीना आते ही तेज गर्मी और लू के चलते लोगों के मरने खबरें आने लगती हैं. जैसे इसी समय विभिन्न मीडिया स्रोतों की सुर्खियां बताती हैं कि देश में अब तक गर्मी व लू के चलते तकरीबन 800 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है. मरने वालों की सबसे ज्यादा संख्या तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में है. हर साल नियम से आने वाली इस आपदा में हजारों लोगों मारे जाते हैं और सिलसिला सालों से चल रहा है. लेकिन ताज्जुब की बात है कि इस तरह की घटनाएं रोके जाने की कोई पहल मीडिया में वैसी सुर्खियां नहीं बटोर पाती. पिछले महीने के दूसरे हफ्ते में एक ऐसी ही खबर आई थी. उस समय अहमदाबाद में तीसरे साल ‘हीट एक्शन प्लान’ जारी किया गया. दरअसल यह वो कवायद है जिसने शहर में लू और गर्मी से होने वाली मौतों की संख्या काफी कम कर दी है.
जॉर्जिया इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी ने अहमदाबाद में मौसम के उतार-चढ़ाव का मॉडल तैयार किया है. इससे हफ्तेभर के तापमान का सटीक पूर्वानुमान हासिल किया जा सकता है
आज से दो साल पहले अहमदाबाद भी उन जगहों में शामिल था जहां मई का महीना शुरू होते ही लू से लोगों के मरने की खबरें आने लगती थीं. अब यह सिलसिला काफी हद तक थम गया है. ऐसा नहीं है कि इस शहर में अब जानलेवा गर्मी नहीं पड़ती. गर्मी हर साल वैसी ही पड़ रही है लेकिन इस दौरान कम से कम मौतें हों इसके लिए शहरी प्रशासन ने एक तंत्र विकसित कर लिया है और यही हीट एक्शन प्लान है. सबसे बड़ी बात है कि अहमदाबाद ऐसा करने वाला दक्षिण एशिया का यह पहला शहर है. इस परियोजना की सफलता इस तथ्य से ही समझी जा सकती है कि फिलहाल अहमदाबाद का अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाने के बावजूद अब तक यहां से सिर्फ तीन लोगों की मौत की खबर आई है.
गुजरात भारत के उन राज्यों में शामिल है जहां भौगोलिक परिस्थितियों की वजह से गर्मी का प्रकोप कुछ ज्यादा ही होता है. यहां भी अहमदाबाद सबसे गर्म शहर माना जाता है. 2010 में यहां ऐसी भीषण गर्मी पड़ी थी कि पूरे सीजन में इससे 1000 से ज्यादा लोग मारे गए. यह अनपेक्षित आंकड़ा था, लेकिन इसी ने अहमदाबाद में अपनी तरह की एक नई पहल की बुनियाद रखी-गर्मी और लू से लड़ने की पहल.
यह 2013 की बात है जब अहमदाबाद में पहली बार ‘हीट एक्शन प्लान’ लागू हुआ. यह अहमदाबाद नगर निगम (एएमसी) की देखरेख में शुरू हुई परियोजना है. तेज गर्मी और लू को रोका नहीं जा सकता, लेकिन जागरूकता फैलाकर इससे होने वाली मौतों की संख्या बहुत हद तक कम की जा सकती है. हीट एक्शन प्लान इसी सीख पर आधारित है. अहमदाबाद में इसके तहत लोगों को लू लगने के खतरे से जागरूक किया जाता है और उन्हें मोबाइल मैसेज के जरिए सात दिन आगे तक के मौसम और अनुमानित तापमान की जानकारी दे दी जाती है. इसी के साथ स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को भी तेज गर्मी की वजह से बीमार हुए लोगों के तुरत-फुरत इलाज के लिए तैयार रखा जाता है.
हीट एक्शन प्लान के अंतर्गत एएमसी अब हर साल मजदूरों के काम करने के समय में बदलाव के लिए श्रम विभाग को एक एडवाइजरी जारी करता है
एएमसी ने यह परियोजना स्वास्थ्य व मौसम से जुड़े कुछ अंतर्राष्ट्रीय और देसी संस्थानों की मदद से शुरू की है. इससे इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ, गांधीनगर (आईआईपीएच-जी) से लेकर अमेरिका का जॉर्जिया इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी तक जुड़े हैं. इस अमेरिकी संस्थान ने ऐतिहासिक आंकड़ों के आधार पर अहमदाबाद के मौसम में उतार-चढ़ाव से जुड़ा एक मॉडल तैयार किया है. इससे एक हफ्ते तक के मौसम व तापमान का सटीक पूर्वानुमान हासिल किया जा सकता है.
लू लगने और तेज गर्मी से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए एएमसी हर साल पर्चे और पोस्टरों से साथ-साथ बिलबोर्ड भी लगवाता है. स्थानीय एफएम चैनलों पर भी इसके लिए संदेश प्रसारित किए जाते हैं. अब मोबाइल पर वॉट्सएप मैसेज भी भेजे जाने लगे हैं. इन संदेशों के जरिए लोगों के लू से बचने के उपाय तो बताए जाते हैं, साथ ही यदि किसी को लू लग जाए तो उसके लक्षण क्या हैं और वह कैसे इसका इलाज करवा सकता है, यह जानकारी भी दी जाती है.
उधर, स्वास्थ्य सेवाओं के मोर्चे पर डॉक्टरों व स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं लू से पीड़ित लोगों के इलाज के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया गया है. मई-जून के दौरान अहमदाबाद के सरकारी अस्पतालों में कुछ विशेष वार्ड बना दिए जाते हैं जहां लू लगने से हुए बीमार लोगों को भर्ती किया जाता है.
अहमदाबाद की यह परियोजना अब दूसरे शहरों के लिए भी मॉडल बन रही है. अब नागपुर और बैंगलोर का स्थानीय प्रशासन भी अपने यहां हीट एक्शन प्लान बनाने की तैयारी कर रहे हैं
स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ इस परियोजना में एएमसी दूसरे विभागों को भी शामिल करता है. 2011-12 में अमेरिका की एक संस्था नेचुरल रिसोर्स डिफेंस काउंसिल (एनआरडीसी) और (आईआईपीएच-जी) ने एक सर्वे किया था. इसके नतीजे बताते हैं लू लगने के सबसे ज्यादा मामले मजदूरों और झुग्गी झोपड़ियों में रहने वालों में देखे गए. जाहिर है कि ये लोग ज्यादातर समय घर से बाहर बिताते हैं और गर्मी से इनके बीमार होने की संभावना ही सबसे ज्यादा होगी. इस बात को ध्यान में रखकर एएमसी अब हर साल मजदूरों के काम करने के समय में बदलाव के लिए श्रम  विभाग को एडवाइजरी जारी करता है.
अहमदाबाद की यह परियोजना अब दूसरे शहरों के लिए भी मॉडल बन रही है. कुछ दिन पहले ही खबरें आई हैं कि नागपुर और बेंगलुरु का स्थानीय प्रशासन अपने यहां भी हीट एक्शन प्लान बनाने की तैयारी कर रहा है. आईआईपीएच-जी के निदेशक डॉ दिलीप मावलंकर एक अखबार से बात करते हुए इसकी जरूरत पर बल देते हैं, ‘ हम धीरे-धीरे ग्लोबल वॉर्मिंग की तरफ बढ़ रहे हैं. इसलिए जरूरी है कि दूसरे राज्यों में भी इस तरह की परियोजनाएं शुरू की जाएं.’ एएमसी का हीट एक्शन प्लान मावलंकर का ही विचार माना जाता है.
दुनिया में जलवायु परिवर्तन पर होने वाले तमाम शोध बताते हैं कि भविष्य में धरती का तापमान बढ़ेगा. पिछले महीने ही प्रकाशित हुए एक शोधपत्र के मुताबिक गर्मी में तापमान बढ़ने के साथ-साथ इस मौसम की समयावधि भी बढ़ती जाएगी. यानी खतरा आने वाले समय में और बढ़ेगा. ऐसे अहमदाबाद में चल रही परियोजना देश के और दूसरे हिस्सों में लागू की जाए तो आनेवाले समय में तापमान का बढ़ना बेशक सुर्खियों में बना रहेगा लेकिन इससे होने वाले मौतों की संख्या अतीत के मुकाबले बहुत कम की जा सकती है.