ट्रेनों में बर्थ खाली होने पर अब वह डिस्काउंट पर यात्रियों को उपलब्ध कराई जा सकती हैं. वह भी आखिरी मौके पर. इसके अलावा सप्ताहांत के लिए विशेष किराया योजना भी लाई जा सकती है. रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने हाल ही में इस तरह के कुछ सुझाव रेलवे बोर्ड को भेजे हैं. इन पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, रेलवे की आमदनी बढ़ाने के मकसद से प्रभु की ओर से दिए गए इन सुझावों में से एक यह भी है कि रेल यात्रियों को यात्री टिकटों पर दी जा रही सब्सिडी छोड़नेे के लिए कहा जाए. ठीक उसी तरह, जैसे कि घरेलू गैस की सब्सिडी छोड़ने के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया गया और जिसके नतीजे भी धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं. हालांकि सूत्रों की मानें तो यात्री टिकटों पर सब्सिडी छोड़ने के लिए कहना तो आसान होगा लेकिन इस प्रक्रिया को अमल में लाना खासा मुश्किल हो सकता है.

इसकी वजह बताते हुए रेल मंत्रालय के एक अधिकारी कहते हैं, ‘एलपीजी उपभोक्ताअों में से करीब-करीब सभी के बैंक खातों को उनके गैस कनेक्शनों से जोड़ा जा चुका है. लेकिन यह तरीका ट्रेन टिकटों के मामले में लागू नहीं किया जा सकता. उसके लिए कोई और तरीका ढूंढना होगा और उसकी तैयारी भी की जा रही है. मंत्रालय इसके लिए जिस मॉडल पर विचार कर रहा है, उसके तहत पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू में सिर्फ ई-टिकट बुक कराने वाले यात्रियों से सब्सिडी छोड़ने के लिए कहा जा सकता है.

वैसे, रेल यात्रियों को इसका अहसास कराने का प्रयास रेल मंत्रालय लगातार कर रहा है कि उन्हें ट्रेन का टिकट बेहद कम दरों पर मिलता है. इसके लिए टिकटों पर यह जानकारी छापना शुरू की गई है कि यात्रा लागत का सिर्फ 57 फीसदी पैसा ही टिकट के जरिए यात्रियों से लिया जा रहा है. बाकी 43 फीसदी लागत सरकार उठा रही है. हालांकि रेलवे की अकाउंटिंग व्यवस्था अभी यह बताने में सक्षम नहीं है कि किसी रेल यात्री की यात्रा पर कुल लागत आखिर आती कितनी है. रेलवे इस खामी को भी दुरुस्त करने में लगा है.