‘हम शादी नहीं करना चाहते’ पहले ही दृश्य में इस संवाद के साथ शुरू हुआ ट्रेलर बिना कमिटमेंट वाले इश्क की कहानी की झलक दिखाता है. इश्क में बेचैनी लाजिमी है और बिना कमिटमेंट के प्यार में अलग ही रोमांचभरी बेचैनी होती है. ऐसे प्यार में गहराई तो होती है लेकिन यह गहराई कई बार घुटन भी पैदा करती है. शायद इसलिए कि जहां कमिटमेंट नहीं है, वहां शिकायत की जगह भी नहीं होती. यह घुटन मोल लेना इस पीढ़ी की मज़बूरी भी है और जरूरत भी. 'ओके जानू' का ट्रेलर ऐसी ही कुछ बात कहता नजर आता है.

ट्रेलर से कहानी का जो अंदाजा लगता है, वह यह है कि प्यार में पड़ा एक जोड़ा प्यार की शिद्दत को तब महसूस कर पाता है जब उन्हें अलग होना पड़ता है. दोनों की समझदारी कहती है कि अलग होना उनके भविष्य के लिए जरूरी है और वे इसके लिए तैयार भी नजर आते हैं. यह सारा मसला तनाव भरा हो जाता है जब उन्हें इस बात का एहसास भी होता है कि वे न एक दूसरे के साथ रह सकते हैं और न एक दूसरे के बिना. यह संघर्ष आजकल हर दूसरे जोड़े में देखने को मिलता है और इसे परदे पर देखना मजेदार साबित हो सकता है.

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ट्रेलर के दो दृश्यों को देखकर फिल्म में कुछ अच्छे दृश्यों की उम्मीद जगती है. ट्रेलर का पहला और आखिरी दृश्य जैसे पीढ़ियों के बीच संघर्ष दिखाता है. इन दोनों दृश्यों में नसीरुद्दीन शाह एक युवा जोड़े से सवाल करते और उन्हें समझाते नजर आते हैं. ट्रेलर से नसीरुद्दीन शाह की भूमिका बहुत साफ नहीं होती. संभव है वे मुख्य पात्रों में से किसी एक के अभिभावक की भूमिका अदा कर रहे हों.

यहां मुख्य भूमिकाओं में आदित्य रॉय कपूर और श्रद्धा कपूर हैं. इस फिल्म में दोनों ही अपनी पिछली फिल्मों से एकदम अलग नजर आ सकते हैं. श्रद्धा कपूर ने पिछली फिल्म 'रॉकऑन-2' में बेहतर अभिनय करके लोगों का भरोसा जीता है. इस फिल्म में भी वे अपनी बबली छवि से अलग प्यार-सेक्स और करिअर को लेकर मुखर लड़की की भूमिका में कमाल कर सकती हैं. सिद्धार्थ रॉय कपूर अब तक उदास प्रेमी या कशमकश में पड़े कलाकार की भूमिका में नजर आते रहे हैं. इस बार उन्हें हंसता-मुस्कुराता देखना कुछ नया लग सकता है.

ट्रेलर के अलग-अलग दृश्यों में मुंबई, पेरिस और न्यूयॉर्क नजर आता है. निर्देशक शाद अली इस फिल्म में खूबसूरत विदेशी नजारे दिखाने की उम्मीद भी जगाते हैं. शाद अली की पिछली फिल्म ‘किल दिल’ बॉक्स ऑफिस पर कुछ ख़ास कमाल नहीं कर पाई थी लेकिन ‘ओके जानू’ में उनकी ही एक और फिल्म ‘बंटी और बबली’ जैसे एक नए लेकिन सफल प्रयोग की संभावना नजर आती है.

अली की फिल्मों का संगीत हमेशा हिट होता है. इस बार भी यह हिट है, इस बात का इशारा भी ट्रेलर दे देता है. बैकग्राउंड से आ रही एआर रहमान की आवाज बरबस ही आपका ध्यान खींचती है. ‘माथे पे रखके शाम के सूरज की टिकली’ और ‘ये आयु, ये वायु, ये मंगल, ये दंगल’ जैसे उपमानों के साथ लिखे गुलजार के प्रेमगीत साल को एक बेहतरीन और संगीतमय शुरुआत दे सकते हैं. बिना कमिटमेंट की यह लव स्टोरी एंटरटेनमेंट का फुल कमिटमेंट करती नजर आ रही है.

अगले साल 13 जनवरी को रिलीज़ हो रही इस फिल्म का शीर्षक अजीब होने के साथ-साथ रोचक भी है. पहली नजर में ऐसा नहीं लगता कि प्रेमियों के बीच लोकप्रिय यह संबोधन किसी फिल्म का शीर्षक होने की हैसियत भी रखता है. संभव है नाम का चयन करने वालों ने इससे पहले प्रेमियों के बीच हो सकने वाले इस संवाद की कल्पना की होगी - सवाल : ‘फिल्म देखने चलें क्या?’ जवाब : ‘ओके जानू!’