अलग-अलग साज बजाने से लेकर सेल्फियों की झड़ी लगाने तक नरेंद्र मोदी ने बीते एक साल के दौरान कई ऐसे काम किए हैं जो सिर्फ वही कर सकते थे.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में कहा जाता है कि नई-नई चीजों के लिए उनमें बहुत उत्साह रहता है. यही वजह है कि एक साल पहले जब वे सत्ता में आए तो कइयों ने कहा कि बहुत से मामलों में मोदी अब तक हुए प्रधानमंत्रियों से अलग साबित होंगे. एक साल बाद कहा जा सकता है कि वे सही थे. अलग-अलग साज बजाने से लेकर सेल्फियों की झड़ी लगाने तक मोदी ने कई ऐसे काम किए हैं जो सिर्फ वही कर सकते थे.
सेल्फी की झड़ी
बीते साल 30 अप्रैल की बात है. लोकसभा चुनाव चल रहा था. इसी दौरान अहमदाबाद में वोट डालकर बाहर निकलते नरेंद्र मोदी अपनी उंगली के निशान और भाजपा के चुनाव चिह्न कमल के साथ सेल्फी लेते दिखे. टीवी पर उनकी यह तस्वीरें दिखते ही विवाद खड़ा हो गया. चुनाव आयोग ने पुलिस को मोदी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया. आयोग का कहना था कि मोदी ने जब सेल्फी खींची तो मतदान जारी था और यह मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश थी. यह शायद पहला मौका था जब मोदी ने सेल्फी से सुर्खियां बटोरी थीं.
चीन के प्रधानमंत्री का इस तरह सेल्फी में नजर आना इतनी अनोखी बात थी कि फेसबुक के मुखिया मार्क जुकरबर्ग भी खुद को इस सेल्फी को लाइक करने से रोक नहीं पाए.
तब से यह सिलसिला जारी है. नियमित अंतराल पर राष्ट्राध्यक्षों से लेकर प्रशंसकों तक के साथ मोदी की सेल्फियां सुर्खियां बनती रहती हैं. हालिया चीन दौरे पर मोदी की वहां के प्रधानमंत्री ली क्विंग के साथ ली गई सेल्फी को पश्चिमी मीडिया ने सबसे प्रभावशाली सेल्फी करार दिया. द वॉल स्ट्रीट जनरल ने लिखा कि भारत और चीन में दुनिया की एक तिहाई आबादी रहती है और ऐसे में किसी आधिकारिक फोटोग्राफर के बिना प्रीमियर ली और पीएम मोदी का अपने आप एक फ्रेम में दिखना बड़ी बात है. मोदी की इस सेल्फी की खासियत सिर्फ यही नहीं थी. चीन एक ऐसा देश है जहां राजनेता औपचारिकता की एक कठोर चादर ओढ़े दिखते हैं. ऐसे में चीन के एक शीर्ष नेता का इस तरह सेल्फी में नजर आना इतनी अनोखी बात थी कि फेसबुक के मुखिया मार्क जुकरबर्ग भी खुद को इस सेल्फी को लाइक करने से रोक नहीं पाए.
मंगोलिया का पारंपरिक साज योचिन बजाते मोदी
मंगोलिया का पारंपरिक साज योचिन बजाते मोदी
मोदी की इस सेल्फी का एक और खास पहलू उनका इस फोटो को टि्वटर पर पोस्ट करना भी था. टि्वटर, गूगल और फेसबुक चीन में प्रतिबंधित है. चीन में इसे ग्रेट फायरवाल नाम की एक सरकारी सेंसरशिप मशीनरी के जरिए ब्लॉक किया गया है. जानकारों के मुताबिक ऐसे में चीनी प्रशासन ने मोदी के लिए खासतौर पर अपनी सेंसरशिप को हटाया होगा.
इससे पहले आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री टोनी एबॉट सहित कई दूसरे राष्ट्राध्यक्षों के साथ भी मोदी की सेल्फी डिप्लोमेसी चर्चा में रही है. हालांकि भारतीय प्रधानमंत्री के इस शौक पर निशाना भी साधा गया है. वॉशिंगटन पोस्ट ने तो अपनी एक हालिया रिपोर्ट में मोदी को सेल्फी ऑब्सेस्ड यानी सेल्फी आसक्त कह दिया था.
मोनोग्राम वाला सूट
इस साल जनवरी में जब बराक ओबामा भारत आए तो कई यह मानकर चल रहे थे इस दौरा में उनकी पत्नी मिशेल की वेशभूषा सुर्खियों में रहेगी. मिशेल को अमेरिका में स्टाइल ऑइकन माना जाता है. लेकिन हुआ उल्टा. खबरों में नरेंद्र मोदी का सूट आ गया. ओबामा से हुई एक मुलाकात के दौरान मोदी ने नेवीब्लू रंग का एक कोट पहना हुआ था. प्रेस फोटोग्राफरों ने बंद गले के इस कोट पर दिख रही धारियों पर गौर किया तो पाया कि ये दरअसल उनके पूरे नाम नरेंद्र दामोदर दास मोदी की लिखावट से बनी हुई हैं. इसके बाद तो खबरों से लेकर सोशल मीडिया तक यह सूट छा गया. यहां तक कि अमेरिका के एक अखबार ने भी सूट पर इस शीर्षक के साथ खबर छापी - दुनिया का नया फैशन आइकन कौन? मिशेल ओबामा किनारे हो जाइए. दुनिया को नया स्टाइल आइकन मिल गया है.
अमेरिका के एक अखबार ने भी सूट पर इस शीर्षक के साथ खबर छापी - दुनिया का नया फैशन आइकन कौन? मिशेल ओबामा किनारे हो जाइए. दुनिया को नया स्टाइल आइकन मिल गया है.
वैसे इस सूट को लेकर हुई चर्चा में ज्यादातर नकारात्मकता का ही रंग था. ट्विटर पर वरिष्ठ स्तंभकार ब्रहमा चेलानी सहित कइयों ने मोदी को 'आत्ममुग्ध' कहा. एक वर्ग का कहना था कि मोदी हमेशा कहते रहते हैं कि वे एक साधारण सेवक हैं लेकिन, वे तो बहुत शाही दिख रहे हैं. हालांकि कुछ ऐसे भी थे जिन्होंने इस सूट को 'कूल' और मोदी को भारत का सबसे 'स्टाइलिस्ट' राजनेता कहा. बाद में सूरत में इस सूट की बोली लगी और यह 4.31 करोड़ रुपये में नीलाम हुआ. बताया गया कि इस पैसे को गंगा की सफाई में लगाया जाएगा.
विदेशों में पिछली सरकारों की बुराई
कहते हैं कि एक विदेश यात्रा के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से कांग्रेस के बारे में सवाल किया गया था. इस पर वाजपेयी ने कहा कि इस बारे में वे सिर्फ भारत में ही बोलेंगे. इसके उलट कुछ समय पहले कनाडा में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए यूपीए पर सीधा निशाना साधते हुए नरेंद्र मोदी ने कहा कि जिनको गंदगी करनी थी वे करके चले गए, लेकिन हम सफाई करेंगे. चीन दौरे पर मोदी एक कदम और आगे निकल गए. शंघाई में अप्रवासी भारतीयों के एक सम्मेलन में वे बोले कि पहले लोग भारतीय होने पर शर्म महसूस करते थे, लेकिन अब इसकी जगह गर्व ने ले ली है.
इन बयानों के बाद तमाम नेताओं ने नरेंद्र मोदी को विदेश यात्राओं के दौरान यह ध्यान रखने की नसीहत दी कि वे भाजपा के नहीं बल्कि देश के प्रधानमंत्री हैं.
हैरानी की बात नहीं कि इसके बाद संसद से लेकर सोशल मीडिया तक पर मोदी घिर गए. तमाम नेताओं ने मोदी को विदेश यात्राओं के दौरान यह ध्यान रखने की नसीहत दी कि वे भाजपा के नहीं बल्कि देश के प्रधानमंत्री हैं. ट्विटर पर मोदीइंसल्ट्सइंडिया नाम से हैशटैग चल पड़ा. विदेश में यूपीए सरकार पर मोदी के निशानों से कांग्रेस तो इतना भड़की कि उसने ऐलान कर डाला कि अब से नरेंद्र मोदी के हर विदेश दौरे में पार्टी अपना प्रवक्ता भी भेजेगी जो कांग्रेस की आलोचना का तुरंत उसी देश की धरती पर जवाब देगा.
हर साज बजाने का हुनर
कहते हैं कि मोदी के प्रेरणास्रोत और गुरू रहे संघ के वरिष्ठ कार्यकर्ता लक्ष्मणराव इनामदार ने कभी एक बार उनसे कहा था, ‘अगर तुम बजा सकते हो तो यह बांसुरी है वरना सिर्फ लकड़ी है.’ संयोग देखिए कि इस एक साल के दौरान मोदी जो अलग-अलग साज बजाते नजर आए हैं उनमें से एक बांसुरी भी है. यह बीते सितंबर में मोदी ने तब बजाई थी जब वे जापान में एक स्कूल के दौरे पर थे. इसी दौरे पर वे ड्रम बजाते भी दिखे. हाल के मंगोलिया दौरे में मोदी ने वहां का पारंपरिक साज मोरिन खुर बजाया. इसी दौरान उन्होंने संतूर जैसे एक दूसरे वाद्ययंत्र योचिन पर भी हाथ आजमाया था. साज पर उनका यह अंदाज लोगों को काफी भाया.
सोशल मीडिया का इस्तेमाल
हालांकि सोशल मीडिया ही अपने आप में कोई बहुत पुरानी चीज नहीं है फिर भी कई मानते हैं कि होती भी तो कोई दूसरा प्रधानमंत्री इस माध्यम को नरेंद्र मोदी से बेहतर तरीके से नहीं दुह पाता. दरअसल संवाद के लिए नरेंद्र मोदी पारंपरिक से ज्यादा सोशल मीडिया को तरजीह देते रहे हैं. माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर उनके करीब सवा करोड़ फॉलोअर्स हैं. 2009 में ट्विटर पर आने वाले मोदी खबर लिखे जाने तक 7958 ट्वीट कर चुके थे. यानी वे हर दिन औसतन तीन से ज्यादा ट्वीट करते हैं. फरवरी में क्रिकेट विश्व कप शुरू होने से पहले उन्होंने ट्विटर पर हर खिलाड़ी को अलग अंदाज में शुभकामनाएं देते हुए ट्वीट किए थे. उनकी देखा-देखी कैबिनेट के दूसरे मंत्री और मंत्रालय भी सोशल मीडिया की राह चल पड़े हैं.