दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कुछ समय पहले कहा था, ‘नजीब जंग कुछ भी कर लें, मोदी एक मुस्लिम को उपराष्ट्रपति कभी नहीं बनाएंगे.’ इस बयान पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?

केजरीवाल की सोच बहुत छोटी है, मेरे अरमान उपराष्ट्रपति नहीं, राष्ट्रपति बनने के हैं. केजरीवाल मोदी जी के प्रति इतनी ज्यादा कड़वाहट से भरे हुए हैं कि वे यह सच्चाई तक नहीं समझ पा रहे कि मोदी जी एक मुस्लिम के माध्यम से ही एक हिंदू की नकेल कसे हुए हैं!

दिलराज कौर से पहले आपने वैट कमिश्नर अलका दीवान को महिला आयोग का सेक्रेटरी बनाया था. भला एक वैट कमिश्नर को महिला आयोग का सदस्य बनाने का क्या तुक है?

हमारे देश में वन एवं पर्यावरण मंत्री रातों-रात मानव संसाधन विकास मंत्री बन सकता है और वहीं मानव संसाधन विकास मंत्री, कपड़ा मंत्री, तो आपको नहीं लगता कि आपकी तुक वाली बात कितनी बेतुकी है!

शुंगलू समिति केजरीवाल सरकार के फैसलों से जुड़ी 400 फाइलों की जांच कर रही थी. इस जांच में क्या पता चला है?

अभी कुछ भी कहना मुनासिब नहीं है. जांच में और वक्त लगेगा. साहब ने अब हर एक फैसले की जांच के आदेश दे दिए हैं सो फाइलों की संख्या हजारों में पहुंच गई है.

आम आदमी पार्टी (आप) के प्रवक्ता आशुतोष ने कहा है कि आप अपनी असंवैधानिक और अवैध गतिविधियों पर परदा डालने के लिए मोदी सरकार के पीछे छिप रहे हैं. आखिर वे किन गतिविधियों की बात कर रहे हैं?

ये सवाल उन्हीं से पूछिए, कहीं ऐसा न हो जाए कि मैं कुछ दूसरी गतिविधियों का जिक्र कर दूं जो अभी तक उन्हें पता भी न हों! तब एक और एक नया बवाल खड़ा जाएगा.

दिल्ली जिला क्रिकेट एसोसिएशन (डीडीसीए) घोटाले की जांच के लिए बनी समिति को आपने गैरकानूनी क्यों कहा है?

ऐसी बातें कहने वाला मैं कौन होता हूं... कहने वाले तो सिर्फ दो लोग हैं. एक केजरीवाल, दूसरे साहब... मैं तो बस दोनों के बीच पंचिंग बैग बना हुआ हूं.

अरविंद केजरीवाल का कहना है कि जांच समिति उपराज्यपाल के क्षेत्राधिकार से बाहर है, आप उसमें दखल नहीं दे सकते.

क्षेत्राधिकार से बाहर की चीज़ों में टांग अड़ाना मैंने केजरीवाल से ही सीखा है. क्या हौसला है उनका, इतनी कम उम्र में प्रधानमंत्री से टक्कर लिए रहते हैं और इधर मैं तो ऐसा करने का सोच भी नहीं सकता.

नोटबंदी के बारे में आपके क्या विचार हैं?

यह बहुत जरूरी फैसला था. केजरीवाल जैसे लोगों के नोटबंदी के इस कदर विरोध से साफ पता चलता है कि वे कितने ईमानदार हैं. उनकी हालत इसलिए खराब है क्योंकि पंजाब और गोवा के चुनाव सिर पर हैं और उन्होंने सारा कैश जो चुनाव प्रचार के लिए जमा किया था, अब मिट्टी हो गया है.

कुमार विश्वास ने कहा है कि आप लोकतंत्र के लिए खतरा हैं. इसके जवाब में क्या कहेंगे?

वे खुद राजनीति और उनकी कविताएं साहित्य के लिए खतरा हैं.

कुमार विश्वास ने यहां तक कहा है कि आपको केजरीवाल के प्रति अपनी नफरत कम करने के लिए मेडिटेशन करना चाहिए

मेडिटेशन से कुछ नहीं होने वाला. जब तक केंद्र में भाजपा और दिल्ली में ‘आप’ है, तब तक दुनिया का बड़े से बड़ा साधु, महात्मा या मेडिटेशन सिखाने वाला भी मेरे मन में सुकून पैदा नहीं कर सकता.

‘यथा नाम तथा काम’ का सबसे अच्छा उदाहरण कौन है?

आपने मेरा नाम ठीक से पढ़ा-सुना नहीं क्या, नजीब ‘जंग’!

आपने एक बार कहा था कि दिल्ली में सरकार चलाने के लिए आप अकेले काफी हैं और विधानसभा की कोई जरूरत नहीं है. क्या आप सच में ऐसा मानते हैं?

(हैरान होते हुए) अच्छा मैंने ये भी कहा है!! पता नहीं मुझ से और क्या-क्या कहलवा दिया जाएगा.

कहलवा दिया जाएगा से आपका क्या मतलब है. आपसे कौन यह सब कहलवाता है?

अब्ब्ब्ब... मेरा मतलब है कि मैं अकेले इतना काम कर रहा हूं जितना भारत के सारे राज्यों के राज्यपाल मिलकर भी नहीं करते, तो कई बार थकान के चलते ऐसे कई स्टेटमेंट दे देता हूं, जो मुझे ही बाद में याद नहीं रहते.

आपने क्या सोचकर दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की थी?

मैं रोज़-रोज़ की इस जंग से तंग आ गया हूं... इधर से मुख्यमंत्री उधर से साहब... तब मैं सोच रहा था कि राष्ट्रपति शासन के बाद ही शायद मुझे इस किच-किच से राहत मिल पाएगी.

दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने के बारे में आपके क्या विचार हैं?

हैं!!!... इस बारे में साहब के विचार अभी मुझे पूरी तरह से याद नहीं आ रहे हैं.

ये बार-बार किन ‘साहब’ का जिक्र करते हैं!

अब्ब्ब!!... वो तो मैं अपनी अंतरात्मा को साहब कहता हूं!

जस्टिस मार्कंडेय काटजू का कहना है कि आपने एक जर्मन लोककथा के नायक फॉस्ट की तरह अपनी अंतरात्मा शैतान को बेच दी है. क्या सच में ऐसा है?

हां, यह तो जगजाहिर है.... मतलब यह कि आत्मा के खरीददार तो शैतान ही होते हैं, भगवान नहीं.

दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने पर अपनी निजी राय बता दीजिए?

अब्ब्ब्ब मेरा तो साफ मानना है कि पूर्ण राज्य का दर्जा दे दिया जाना चाहिए. आधे से ज्यादा फसाद तो इसी को बुनियाद बनाकर होते हैं कि दिल्ली केन्द्रशासित प्रदेश है. वैसे दूसरी बात यह भी है कि बाकी राज्यों की तरह दिल्ली के उपराज्यपाल को भी चैन से जीने का हक है.

आपको सच में लगता है कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने पर आप चैन से रह सकेंगे!

वैसे सच कहूं तो उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश के उदाहरण देखने के बाद पक्के तौर पर यह नहीं कहा जा सकता... राज्यपाल बनकर चैन से रहना तो सिर्फ भाजपा शासित राज्यों में हो सकता है.

दिल्ली के इतिहास की सबसे खास जंग किसे मानते हैं?

‘आप’ वर्सेज एलजी (उपराज्यपाल)!

क्यों?

यह पहली जंग है जो लगभग दो साल से लगातार चल रही है और किसी के भी हताहत होने की खबर नहीं है. इस जंग में शामिल सब लोग सिर्फ आहत हैं, हताहत नहीं.