प्रधानमंत्री मोदी और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के बीच जुबानी जंग को कई अखबारों ने आज मुख्य पृष्ठ पर जगह दी है. खबर के मुताबिक अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, 'राहुल ने अभी-अभी बोलना सीखा है. अच्छा हुआ जो उन्होंने बोल दिया नहीं तो भूकंप आ जाता.' दूसरी ओर, राहुल ने कहा, 'मोदी जी जितना चाहे मेरा मजाक उड़ा लें लेकिन, उन्हें अपने ऊपर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों का जवाब देना ही होगा.' इसके अलावा दिल्ली के उप राज्यपाल नजीब जंग के अपने पद से इस्तीफा देने और आर अश्विन को साल 2016 का सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर घोषित किए जाने की खबर भी अखबारों ने प्रमुखता से छापी है.

जम्मू-कश्मीर : पश्चिमी पाकिस्तान से आए शरणार्थियों को निवास प्रमाणपत्र देने के विरोध में प्रदर्शन

जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी संगठनों के नेताओं ने शुक्रवार को पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है. हिन्दुस्तान टाइम्स में प्रकाशित खबर के मुताबिक राज्य सरकार ने पश्चिमी पाकिस्तान के शरणार्थियों को निवास प्रमाणपत्र जारी करने का फैसला लिया है. अलगाववादी संगठन इस फैसले का विरोध कर रहे हैं.

राज्य के अलगाववादी नेताओं ने सत्ताधारी पार्टी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) पर राज्य में ‘जनसांख्यिकी’ यानी आबादी का ढांचा बदलने का आरोप लगाया है. इनका मानना है कि पीडीपी ने यह कदम अपनी साझेदार भाजपा के हिंदुत्व के एजेंडे को पूरा करने के लिए उठाया है. अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी, मीरवाइज उमर फारुक और यासीन मलिक ने अपने साझा बयान में सरकार के इस फैसले को राज्य की संप्रभुता के लिए चुनौती बताया है. उनके मुताबिक यह कश्मीरियों के लिए जीवन और मौत का सवाल है.

मणिपुर की इबोबी सरकार अपने संवैधानिक दायित्वों को निभाने में विफल रही : गृहमंत्री

केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने मणिपुर के ताजा हालात को लेकर राज्य के मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह को निशाने पर लिया है. दैनिक जागरण में प्रकाशित एक खबर के मुताबिक उन्होंने कहा है कि इबोबी सरकार अपने संवैधानिक दायित्वों को निभाने में विफल रही है. उन्होंने कहा कि केंद्र के बार-बार अनुरोध करने के बावजूद राज्यमार्ग पर आर्थिक नाकेबंदी को राज्य सरकार नहीं खुलवा पाई.

खबर के मुताबिक गुरुवार को राज्य की स्थिति में सुधार देखने को मिला है. सरकार ने इंफाल के दोनों जिलों में कर्फ्यू में ढील दी है. इसके अलावा राज्यसभा सांसद और मुक्केबाज एमसी मैरीकॉम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आर्थिक नाकेबंदी को दूर करने के लिए हस्तक्षेप की मांग की है.

भारत बिगड़ैल बच्चे की तरह बर्ताव कर रहा है : चीन

चीन ने भारत को ‘बिगड़ैल बच्चे’ की तरह बर्ताव बंद करने की सलाह दी है. जनसत्ता में प्रकाशित एक खबर के मुताबिक सत्ताधारी पार्टी का मुखपत्र माने जाने वाले ग्लोबल टाइम्स ने कहा है कि भारत को इस बात से सबक लेना चाहिए कि अमेरिका के अगले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ‘एक चीन नीति’ को चुनौती देने के बाद चीन ने उन्हें कैसे संभाला. अखबार लिखता है कि भारत के पास महान देश होने की क्षमता है लेकिन, दृष्टि अदूरदर्शी है.

अखबार के मुताबिक दक्षिण चीन सागर जैसे मुद्दे पर अमेरिका को चीन से उलझने से पहले दो बार सोचना पड़ा. दूसरी ओर, उसने हैरानी जताई है कि भारत को ऐसी कौन सी चीज विश्वास दे रही है कि वह चीन के साथ उलझ सकता है. ग्लोबल टाइम्स की यह टिप्पणी भारत द्वारा मंगोलिया को एक अरब डॉलर की मदद करने के संदर्भ में आई. मंगोलिया ने दलाई लामा की अगवानी की थी जिससे नाराज चीन ने उसकी आर्थिक नाकेबंदी कर दी. इसके बाद वहां की सरकार ने भारत से मदद मांगी थी.

प्रत्येक भारतीय के सिर पर औसतन 54,000 रुपये के कर्ज का बोझ

द टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक 2015-16 में औसतन प्रत्येक भारतीय पर 53,756 रुपये का कर्ज है. साल 2009-10 में यह आंकड़ा 30,17, 2013-14 में 45,319 और 2014-15 में 49,270 रुपये था. इसके अलावा मार्च, 2016 में भारत पर कुल 32.2 लाख करोड़ रुपये के बाहरी कर्ज का बोझ था. विश्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक भारत पर बाहरी कर्ज का आकार इसकी कुल जीडीपी का आधा है.

विपक्षी पार्टियों को नोटबंदी की समय सीमा खत्म होने का इंतजार

नवभारत टाइम्स में प्रकाशित खबर के मुताबिक कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी पार्टियों की नजर नोटबंदी की समय सीमा खत्म होने पर लगी हुई है. माना जा रहा है कि 30 दिसंबर के बाद पहले से मोदी सरकार पर आक्रामक रुख अपना चुका विपक्ष हमले को और तेज करने की तैयारी में है. अखबार ने पार्टी सूत्रों के हवाले से कहा है कि कांग्रेस की निगाहें नोटबंदी के बाद जारी होने वाले आंकड़ों पर होंगी. केंद्र में प्रमुख विपक्षी पार्टी इन आंकड़ों के सामने आने के बाद आगे की रणनीति तय करेगी.

कांग्रेस के अलावा बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव पटना में महारैली की योजना बना रहे हैं. माना जा रहा है कि इस रैली में वे प्रमुख विपक्षी पार्टियों के नेताओं को बुला सकते हैं. नीतीश कुमार पहले ही नोटबंदी की समीक्षा किए जाने की बात कह चुके हैं. खबर के मुताबिक तमाम विपक्षी पार्टियां यह मानकर चल रही हैं कि अगले साल राज्यों में होने वाले चुनाव में स्थानीय मुद्दों पर नोटबंदी का मुद्दा भारी पड़ेगा.