केंद्र सरकार द्वारा पासपोर्ट बनवाने वालों के लिए कई नियम आसान किए जाने की खबर को आज सभी अखबारों ने मुख्य पृष्ठ पर जगह दी है. खबर के मुताबिक अब जन्म तिथि के सबूत के तौर पर जन्म प्रमाण पत्र की अनिवार्यता खत्म करने की बात कही गई है. फिलहाल पासपोर्ट रूल्स, 1980 के तहत 26 जनवरी, 1989 के बाद जन्मे लोगों को पासपोर्ट बनवाते हुए जन्म तिथि के सबूत के तौर पर जन्म प्रमाण पत्र जमा करना होता है. इसके अलावा दिल्ली के उप राज्यपाल नजीब जंग की प्रधानमंत्री मोदी के साथ मुलाकात किए जाने की खबर को भी अखबारों ने प्रमुखता से छापा है.

नोटबंदी के बाद आंगनवाड़ी जाने वाले लाखों बच्चे प्रभावित

नोटबंदी का बच्चों के विकास के लिए चलाए जा रहे दुनिया के सबसे बड़े कार्यक्रम एकीकृत बाल विकास सेवा (आईसीडीएस) पर भी बुरा असर पड़ा है. द टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक अक्टूबर से तुलना करें तो नकदी संकट की वजह से आंगनवाड़ी से पोषाहार पाने वाले बच्चों की संख्या नवंबर में छह फीसदी कम हो गई. आंकड़ों के मुताबिक करीब 16 लाख बच्चों को जरूरी अनाज उपलब्ध नहीं करवाया जा सका है. इसके अलावा आंगनवाड़ी में पिछले आठ महीने में बच्चों की औसतन उपस्थिति में 15 फीसदी (42 लाख) कमी दर्ज की गई है.

रिपोर्ट की मानें तो छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव स्थित आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को बैंक से पैसे निकालने के कई घंटे कतार में खड़ा होना पड़ रहा है. पैसे नहीं मिलने की वजह से उन्हें अपने बचत के पैसे भी खर्च करने पड़ रहे हैं. उत्तर प्रदेश की एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अखबार को बताती हैं, ‘बैंक से पैसे नहीं निकाल पा रहे. उधार लेकर भी कब तक काम चलाया जा सकता है?’ उन्होंने कहा कि सरकार को कम से कम बच्चों के बारे में सोचना ही चाहिए.

जीएसटी संबंधित दो विधेयकों को राज्यों की मंजूरी, आईजीएसटी विधेयक पर मतभेद

जीएसटी परिषद की शुक्रवार को हुई बैठक में दो अहम विधेयकों आदर्श जीएसटी विधेयक और मुआवजा विधेयक को मंजूरी मिल गई. हालांकि एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी) विधेयक पर केंद्र और राज्यों के बीच सहमति नहीं बन पाई है. बिजनेस स्टैंडर्ड के मुताबिक वित्तमंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता वाली इस परिषद की अगली बैठक तीन और चार जनवरी को होगी. इसमें केंद्र और राज्यों के बीच प्रशासनिक शक्तियों के बंटवारे के मुद्दे पर आम सहमति बनाने की कोशिश की जाएगी. वित्तमंत्री अरुण जेटली ने बैठक के बाद कहा, ‘अब हमारे पास आईजीएसटी विधेयक और केंद्र-राज्यों के बीच अधिकार क्षेत्र से जुड़े मुद्दे हल करने का महत्वपूर्ण काम रह गया है.’

जानकारों के मुताबिक राज्यों की मांग है कि 1.5 करोड़ रुपये तक के कारोबार पर उनका नियंत्रण हो . इससे अधिक के कारोबार पर केंद्र के साथ उन्हें साझा अधिकार मिलें. दूसरी ओर केंद्र दोनों पक्षों के अधिकारों के संबंध में एक कंप्यूटर प्रोग्राम आधारित मॉडल अपनाना चाहता है. इसके तहत पांच फीसदी करदाताओं का अनियमित तौर पर (रैंडम) चयन किया जाएगा और इन्हें दोनों के बीच बांटा जाएगा.

सरकार के पास गेहूं का पर्याप्त स्टॉक : रामविलास पासवान

केंद्रीय खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने सरकार द्वारा गेहूं के विदेश से आयात किए जाने की बात को खारिज किया है. जनसत्ता में प्रकाशित एक खबर के मुताबिक उन्होंने कहा है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली को पूरा करने के लिए गेहूं का पर्याप्त बफर स्टॉक है. रामविलास पासवान ने बताया कि भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के पास 2.75 करोड़ टन खाद्यान्न भंडार है. इनमें 1.64 लाख टन गेहूं है. इससे पहले केंद्र सरकार ने गेहूं पर आयात शुल्क को खत्म करने का ऐलान किया था.

बताया जाता है कि कारोबारी अभी तक 17 लाख टन गेहूं आयात कर चुके हैं. माना जा रहा है कि आयात कर हटाए जाने के बाद इस आंकड़े में भारी बढ़ोतरी हो सकती है. रामविलास पासवान ने आयात शुल्क हटाए जाने की वजह पूरी तरह से कीमतों को नियंत्रित करना बताया है. उन्होंने कहा कि सरकार के पास पर्याप्त स्टॉक है लेकिन, खुले बाजार में स्टॉक सीमित है.

सपा का कांग्रेस को 72 और आरएलडी- जदयू को 38 सीटें देने का प्रस्ताव

समाजवादी पार्टी (सपा) उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अन्य पार्टियों के साथ गठबंधन की संभावना पर विचार कर रही है. नवभारत टाइम्स की एक खबर के मुताबिक अखबार ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि सीटों के बंटवारे से संबंधित नए फॉमूले के तहत कांग्रेस को 72 और आरएलडी-जदयू को 38 सीटें देने का प्रस्ताव है. हालांकि कहा जा रहा है कि कांग्रेस 20 और सीटें मांग रही है जबकि,आरएलडी-जदयू की मांग कम से कम 50 सीटों की है.

सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस के लिए असली समस्या नहीं सीटों की संख्या नहीं बल्कि यह है कि उन्हें कौन-कौन सी सीटें दी जा रही हैं. कांग्रेस के एक सूत्र के मुताबिक यदि पार्टी को ऐसी सीटे दी जाएं जहां वह मजबूत है तो गठबंधन पर बात बन सकती है.

बांग्ला कवि शंख घोष को साल 2016 का ज्ञानपीठ पुरस्कार

बांग्ला कवि शंख घोष को 2016 का ज्ञानपीठ पुरस्कार देने का ऐलान किया गया है. घोष को विद्वान और आलोचक के तौर पर भी जाना जाता है. हिन्दुस्तान टाइम्स के मुताबिक 84 वर्षीय घोष साहित्य के क्षेत्र में देश का सर्वोच्च सम्मान हासिल करने वाले पश्चिम बंगाल के छठें शख्स हैं. इससे पहले 1996 में महाश्वेता देवी को इस सम्मान से नवाजा गया था.

शंख घोष का जन्म 1932 में चांदपुर में हुआ था. यह जगह अब बांग्लादेश में है. साल 2011 में भारत सरकार की तरफ से उन्हें पद्म भूषण सम्मान से नवाजा जा चुका है. उनकी प्रमुख रचनाओं में लता गुलमोमॉय, सामाजिक नोय, मूर्खो बारो है. इसके अलावा साल 1977 में बाबारेर प्रार्थना (बाबर की प्रार्थना) के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार दिया गया था.