रूस ने सैन्य विमान हादसे के पीछे आतंकी साजिश से इनकार किया | सोमवार, 26 दिसंबर 2016

रूस ने अपने एक सैन्य विमान के काला सागर के ऊपर दुर्घटनाग्रस्त होने के पीछे किसी आतंकी साजिश की आशंका से इनकार कर दिया है. रूस के परिवहन मंत्री मैक्सिम सोकोलोव ने कहा है कि विमान हादसे की जांच पायलट की गलती और विमान की तकनीकी खामी पर केंद्रित रहेगी. खबरों के मुताबिक रविवार की सुबह रूस का टीयू-154 सैन्य विमान दक्षिणी शहर सोची से उड़ान भरने के दो मिनट बाद ही दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. यह विमान चालक दल के आठ सदस्यों सहित कुल 92 यात्रियों को लेकर सीरिया के तटवर्ती शहर लातकिया जा रहा था.

रक्षामंत्री मैक्सिम सोकोलोव ने इस विमान हादसे के बाद रूसी हवाई अड्डों की सुरक्षा बढ़ाने से भी इंकार कर दिया है. हालांकि, कई विशेषज्ञ इस विमान हादसे को आतंकी हमले से जोड़कर देख रहे हैं. समाचार एजेंसी आरआईए नोवोस्टी के अनुसार रूस के पूर्व एयर ट्रैफिक नियंत्रक विटाली एंद्रेव ने कहा, ‘कुछ गड़बड़ी संभव है...नहीं तो उन्हें (पायलटों को) सूचना देने से कोई नहीं रोक पाता.’ इसके अलावा टीयू-154 के मलबे के विस्तार को भी आतंकी हमले के सबूत के तौर पर पेश किया जा रहा है.

इजरायल के खिलाफ प्रस्ताव से नाराज ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र को मौज करने वालों का क्लब बताया | मंगलवार, 27 दिसंबर 2016

बीते हफ्ते इजरायल के खिलाफ प्रस्ताव पारित होने के बाद से अमेरिका के निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप संयुक्त राष्ट्र से खासे नाराज हैं. एक बार फिर उसकी आलोचना करते हुए उन्होंने ट्विटर पर लिखा है कि संयुक्त राष्ट्र में काफी संभावना है, लेकिन अब यह महज साथ बैठने, बातें करने और मौज करने वालों का क्लब बनकर रह गया है जो बहुत दुखद है.

शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने इजरायल द्वारा फिलिस्तानी इलाकों में आवासीय बस्तियां बसाने के विरोध में प्रस्ताव पारित किया था. इसके बाद भी ट्रंप ने ट्वीट किया था कि ‘संयुक्त राष्ट्र अभी जैसा है, 20 जनवरी के बाद वैसा नहीं रहेगा (जब वे अमेरिका का राष्ट्रपति बन जाएंगे).’ सोमवार को अन्य ट्वीट में ट्रंप ने कहा, 'संयुक्त राष्ट्र के फैसले से इजरायल को बड़ा नुकसान हुआ है. इससे शांति कायम करने की उसकी पहल कमजोर पड़ गई है. लेकिन, हमें किसी भी तरह से इस लक्ष्य को हासिल करना होगा.'

हांगकांग और ताइवान के आजादी समर्थकों को मक्खियों की तरह पटक दिया जाएगा : चीन | बुधवार, 28 दिसंबर 2016

चीन ने हांगकांग और ताइवान की आजादी के समर्थकों को सख्त चेतावनी दी है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक बुधवार को चीन ने कहा कि हांगकांग और ताइवान की आजादी के समर्थकों की आपस में हाथ मिलाने की कोशिशें विफल रही हैं और इन्हें मक्खियों की तरह जमीन पर पटक दिया जाएगा.

ताइवान के लिए नीति निर्माण से जुड़े कार्यालय के प्रवक्ता आन फेंगशांग ने कम्युनिस्ट चीन के संस्थापक माओत्से तुंग की कविता की एक लाइन ‘इस छोटी सी दुनिया में, कुछ मक्खियां तेजी से उड़ते हुए दीवार से टकरा गईं’ का उल्लेख करते हुए आजादी समर्थकों को चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि आखिरकार ऐसे लोग खुद को छिन्न-भिन्न और लहूलुहान ही पाएंगे. माओत्से तुंग की इस कविता का मतलब है कि चीन के दुश्मन उसके सामने मक्खियों की तरह हैं, जिनसे वह डरता नहीं.

1997 में स्वायत्तता की शर्त पर चीन का शासन स्वीकार करने वाले हांगकांग में हाल के दिनों में आजादी समर्थक आंदोलनों में बढ़ोतरी हुई है और चीन इनको दबाने की कोशिश कर रहा है.

रूस के इस कदम ने भारत के सामने इधर कुआं उधर खाई वाली स्थिति पैदा कर दी है | गुरुवार, 29 दिसंबर 2016

जल्द ही भारत को अपने दो मित्र देशों रूस और अफगानिस्तान में से किसी एक का चुनाव करना पड़ सकता है. भारत को इस स्थिति का सामना आतंकी संगठन 'अफगान-तालिबान' को लेकर इन दोनों के रुख के कारण करना पड़ सकता है. दरअसल, रूस ने तालिबान को संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की आतंकी संगठनों की सूची से हटवाने की मुहिम तेज कर दी है. अफगानिस्तान के विरोध के बावजूद मास्को में रूस, चीन और पाकिस्तान के बीच एक बैठक हुई है जिसमें ये तीनों यूएन की सूची से तालिबान को हटवाने पर सहमत हो गए हैं.

मंगलवार को हुई इस बैठक के बाद जारी बयान में कहा गया, 'सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों के तौर पर रूस और चीन यूएन की प्रतिबंध वाली सूची से अफगान तालिबान का नाम हटवाने का अपना रुख फिर से दोहराते हैं. अफगानिस्तान और तालिबान के बीच शांतिपूर्ण बातचीत के उद्देश्य से तालिबान को प्रतिबंधित सूची से हटाए जाने पर विचार किया गया है.' अफगानिस्तान के विरोध को देखते हुए रूस की ओर से यह भी कहा गया है कि अगली बार बातचीत में अफगानिस्तान को भी शामिल किया जाएगा.

चीन और रूस के इस तालिबान समर्थित रुख से भारत की चिंता बढ़ गई है क्योंकि अफगानिस्तान तालिबान को आतंकी संगठन मानता है और उसके खिलाफ एक लंबी लड़ाई लड़ रहा है.

सीरिया में इस संघर्ष विराम का सबसे अहम पहलू इसमें अमेरिका का मध्यस्थ न होना है | शुक्रवार, 30 दिसंबर 2016

नया साल सीरिया के लिए शांति का तोहफा लेकर आता दिख रहा है. रूस और तुर्की की मध्यस्थता से वहां एक बार फिर संघर्ष विराम लागू हो गया है. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सीरिया के विद्रोही गुटों के समर्थक तुर्की के साथ समझौता होने के बाद गुरुवार को इसकी घोषणा की. साल में तीसरी बार हुए इस संघर्ष विराम से सीरिया में बीते छह साल से जारी खून-खराबा रुकने की उम्मीद बढ़ गई है. हालांकि, इससे पहले अमेरिका और रूस की मध्यस्थता से फरवरी और सितंबर में संघर्ष विराम की दो कोशिशें असफल हो चुकी हैं.

रूस के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि संघर्ष विराम समझौते पर सीरिया के विद्रोही गुटों ने भी हस्ताक्षर किए हैं. रॉयटर्स के मुताबिक फ्री सीरियन आर्मी और अन्य विद्रोही गुटों ने नेताओं ने संघर्ष विराम को मानने की बात कही है. हालांकि, संघर्ष विराम लागू होने के तुरंत बाद विद्रोहियों और सरकारी सेना के बीच झड़प ने इसे एक बार खतरे में जरूर डाल दिया था. लेकिन, इसके बाद से टकराव की कोई खबर नहीं है. बीते कुछ दशक में यह पहला मौका है, जब मध्य-पूर्व से जुड़े किसी समझौते में अमेरिका शामिल नहीं है.

अमेरिका का यह फैसला पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका बनकर आया है | शनिवार, 31 दिसंबर 2016

अमेरिका ने पाकिस्तान को एक बड़ा झटका देते हुए उसके मिसाइल कार्यक्रम से जुड़ी सात संस्थाओं पर पाबंदी लगा दी है. खबरों के मुताबिक अमेरिका के वाणिज्य विभाग ने इन संस्थाओं को अमेरिका की ‘एक्सपोर्ट एडमिनिस्ट्रेशन रेगुलेशन्स’ (ईआरए) सूची में डाल दिया है. इस सूची में उन संस्थाओं को रखा जाता है जिन पर अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा या विदेश नीति के खिलाफ काम करने का आरोप होता है. इस सूची में डालने के बाद इन कंपनियों से जुड़ी सभी वस्तुओं का आयात-निर्यात कड़ी समीक्षा के दायरे में आ जाता है. इन कंपनियों में सरकारी और निजी, दोनों तरह के प्रतिष्ठान शामिल हैं.

पाकिस्तान हमेशा से अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम में किसी तरह की गड़बड़ी होने से इंकार करता रहा है. उधर, अमेरिकी वाणिज्य विभाग के नोटिफिकेशन में कहा गया है कि इन पाकिस्तानी संस्थाओं को ईआरएस सूची में डाले जाने के लिए पर्याप्त सबूत हैं. नोटिफिकेशन के अनुसार पाकिस्तान की ये सभी सरकारी, अर्द्ध सरकारी और निजी संस्थाएं अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों में शामिल हैं. हालांकि, वाणिज्य विभाग के नोटिफिकेशन में इन पाकिस्तानी संस्थाओं द्वारा किए गए उल्लंघनों या उन वस्तुओं की जानकारी नहीं दी गई है जिनका आयात-निर्यात अमेरिकी हितों को नुकसान पहुंचा सकता है.