आगरा में मणिपुर के कुछ छात्रों से ताजमहल के प्रवेश द्वार पर भारतीय होने का सबूत मांगे जाने की घटना की जांच के आदेश दे दिए गए हैं. मंगलवार को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) के अधिकारियों ने मीडिया को बताया कि इंफाल के केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के छात्रों और प्रोफेसरों ने विभाग को एक लिखित शिकायत दी है. अधिकारियों के अनुसार इस घटना को गंभीरता से लेते हुए मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं. घटना की पुष्टि के लिए एएसआई की ओर से ताजमहल के प्रवेश द्वार की सीसीटीवी फुटेज भी मंगाई गई है.

बीते रविवार को 'ऑल इंडिया एजुकेशनल टुअर' के तहत ताजमहल देखने आए इंफाल के छात्रों के एक समूह को सीआइएसएफ के जवानों ने प्रवेश द्वार पर रोक दिया था. छात्रों का कहना है कि सुरक्षाकर्मियों ने उनसे भारतीय होने का सबूत दिखाने की मांग की. इस पर कुछ छात्रों ने आधार कार्ड दिखा दिया. लेकिन जिन छात्रों के पास आधार कार्ड नहीं था, उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया. छात्रों के अनुसार उन्होंने अपने पहचान पत्र और टुअर से संबंधित चिट्ठी भी सुरक्षाकर्मियों को दिखाई, फिर भी उनके साथ कोई नरमी नहीं बरती गई.

छात्रों की शिकायत के मुताबिक सीआइएसएफकर्मियों ने उनसे कहा कि वे विदेशी हैं और भारतीय बनकर सस्ता टिकट पाना चाहते हैं. ताजमहल में विदेशी पर्यटकों के लिए प्रवेश टिकट 1000 रुपये का है जबकि भारतीयों के लिए 40 रुपये का. शिकायत में छात्रों ने सीआइएसएफ पर अपने और अपने प्रोफेसरों के साथ अभद्र व्यवहार करने का आरोप भी लगाया है.

उधर, ताजमहल स्थित पर्यटन पुलिस के एसएचओ आरपी पाण्डेय ने मामले की पुष्टि की है. उनका कहना है कि जब छात्रों ने उन्हें इस घटना की जानकारी दी तो पर्यटन पुलिस ने तत्काल मामले में दखल देकर सभी छात्रों को ताजमहल देखने की अनुमति दिलवा दी थी.