कुछ को उनकी आवाज शहद की मिठास लगती है तो कुछ को उन्हें सुनते हुए ऐसा अहसास होता है जैसे दिन भर की थकान के बाद मखमल का बिस्तर मिल गया. एआर रहमान तो उन्हें दुनिया की सबसे खूबसूरत आवाज कहते हैं. कोई गाता मैं सो जाता जैसे उनके कितने ही गीत मन की हर पीर हरते लगते हैं. वे हैं केरल में जन्मे और सारी दुनिया में सराहे जाने वाले कट्टासरी जोसफ येसुदास.

वैसे तो येसुदास को हिंदी पट्टी 1975 में आई फिल्म छोटी सी बात के बाद से ही पहचानने लगी थी. जानेमन-जानेमन तेरे दो नयन और ये दिन क्या आए जैसे गीतों के जनक सलिल चौधरी ने हिंदी फिल्म जगत में उनकी पारी की बढ़िया शुरुआत कर दी थी. लेकिन जिस फिल्म ने उनके लिए शोहरत की आंधी पैदा की वह थी 1976 में आई चितचोर. गोरी तेरा गांव बड़ा प्यारा, जब दीप जले आना और आज से पहले आज से ज्यादा जैसे गीतों ने येसुदास को घर-घर में जाना जाने वाला नाम बना दिया. आलम यह था कि चितचोर के संगीत निर्देशक रवींद्र जैन कहने लगे कि अगर उन्हें आंखें मिलीं तो वे सबसे पहले येसुदास को देखना चाहेंगे.

तब से मलयालम से लेकर हिंदी, रूसी, अरबी और लैटिन तक तमाम भाषाओं में येसुदास ने 40 हजार से ज्यादा गीत गाए हैं. वे रिकॉर्ड सात बार सर्वश्रेष्ठ गायक का राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुके हैं. पांच बार फिल्मफेयर, पद्मश्री (2002) और पद्मभूषण (1975) जैसे सम्मान भी उनकी झोली में हैं.

येसुदास का जन्म 10 जनवरी, 1940 को कोच्चि में हुआ था. उनके पिता ऑगस्टाइन जोसेफ मशहूर थियेटर कलाकार और गायक थे. ऑगस्टाइन की ही दिली इच्छा थी कि उनका सबसे बड़ा बेटा पार्श्वगायक बने. उन्हें भी यह रास्ता रास आया. हालांकि इस पर चलना आसान नहीं था. ईसाई होकर कर्नाटक संगीत की शिक्षा लेने के लिए उन्हें कई बार कड़वे ताने भी सुनने पड़े. इसी दौरान उनके घर की आर्थिक हालत भी बिगड़ गई जिसके चलते उनके लिए फीस चुकाने तक के लाले पड़ गए थे. ऊपर से ऑडिशन देने जब वे पहली बार चेन्नई गए तो उनका टेस्ट लेने वाले संगीत निर्देशक का कहना था कि उनकी आवाज में दम नहीं है और उन्हें कुछ और काम करना चाहिए. बताते हैं कि एआईआर त्रिवेंद्रम को भी उनकी आवाज प्रसारण के लायक नहीं लगी.

लेकिन येसुदास बिना हार माने चलते रहे. 1961 में आई फिल्म ‘कलापदुक्कल’ से उनकी आवाज का जादू बिखरना शुरू हुआ तो सुनने वालों पर उसका सम्मोहन आधी सदी बाद आज भी तारी है. मशहूर गायक हरिहरन का कहना है कि येसुदास केरल में लोगों के जीवन का एक अभिन्न हिस्सा हैं. बसों, टैक्सियों, गलियों, घरों, होटलों तक हर जगह कहीं न कहीं उनकी आवाज गूंजती सुनाई दे ही जाती है. प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता ममूटी एक साक्षात्कार में कहते हैं, ‘येसुदास हैं तो संगीत सांस लेता है.’

येसुदास के कुछ यादगार गीत

1. जानेमन जानेमन तेरे दो नयन— छोटी सी बात (1975)

2. गोरी तेरा गांव बड़ा प्यारा - चितचोर (1976)

3. जब दीप जले आना - चितचोर (1976)

4. का करूं सजनी - स्वामी (1977)

5. मधुबन खुशबू देता है - साजन बिना सुहागन (1978)

6. इन नजारों को तुम देखो - सुनैना (1979)

7. दिल के टुकड़े-टुकड़े करके - दादा (1979)

8. चांद जैसे मुखड़े पे बिंदिया सितारा - सावन को आने दो

9. कहां से आए बदरा - चश्मेबद्दूर (1981)

10. सुरमई अंखियों में - सदमा (1983)