पिछले हफ्ते बांग्लादेश के खिलाफ शुरू हुए टेस्ट मैच से पहले भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली और कोच अनिल कुंबले टीम चयन को लेकर काफी परेशान थे. इनकी यह मुश्किल पिछले दिनों इंग्लैण्ड के खिलाफ खेली गई टेस्ट सीरीज से शुरू हुई. चौंकाने वाली बात यह है कि इस सीरीज में 4-0 से जीत हासिल करने के बाद भी उनकी यह परेशानी ज्यों की त्यों बनी रही. आलम यह है कि बांग्लादेश से मैच जीतने के बाद भी यह परेशानी खत्म नहीं हुई है. अक्सर कोच और कप्तान किसी खिलाड़ी द्वारा अच्छा प्रदर्शन न करने से परेशान रहते हैं लेकिन इन दोनों की परेशानी खिलाड़ियों के अच्छे प्रदर्शन ने बढ़ा दी है.

इंग्लैण्ड के खिलाफ सीरीज के पहले टेस्ट मैच में लेग स्पिनर अमित मिश्रा के कोई खास प्रदर्शन न करने की वजह से दूसरे टेस्ट मैच में स्पिनर जयंत यादव को मौका दिया गया था. इस मैच में यादव ने चार विकेट लिये. साथ ही 35 और 27 नाबाद रन की पारियां भी खेलीं जिस वजह से उन्हें तीसरे टेस्ट मैच में भी मौका मिल गया. इस मैच में भी उन्होंने चार विकेट झटकने के साथ ही कठिन समय में एक अर्धशतकीय पारी खेली. इसके बाद चौथे टेस्ट मैच में तो उन्होंने कमाल करते हुए शानदार शतक लगा दिया. ऐसा ही कुछ राजस्थान के बल्लेबाज करूण नायर के साथ भी हुआ है. रोहित शर्मा के घायल होने के बाद इंग्लैण्ड के खिलाफ 16 सदस्यीय टीम में चुने गए नायर को अजिंक्य रेहाणे के चोटिल होने की वजह से पांचवें टेस्ट मैच में खिलाया गया. इस मैच में उन्होंने इतिहास रचते हुए तिहरा शतक लगा दिया.

चुनने की मुश्किल

इन दो खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन ने ही कप्तान और कोच की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. जहां नायर ने तिहरा शतक ठोक टीम में अपनी जगह पक्की कर ली. वहीं, रणजी में दोहरा शतक लगा चुके हरफनमौला जयंत यादव के रूप में टीम को ऐसा स्पिनर मिला जो अमित मिश्रा के साथ-साथ रोहित शर्मा की जगह पर भी फिट बैठता दिख रहा है. ऐसे में कप्तान कोहली की मुश्किल यह है कि 2016 में टेस्ट में शानदार प्रदर्शन करने वाले अजिंक्‍य और रोहित दोनों को टीम में कैसे खिलायें. ऐसी ही मुश्किल का सामना उन्हें विकेट कीपर को लेकर भी करना पड़ रहा है. इंग्लैण्ड के खिलाफ दूसरे टेस्ट मैच में ऋद्धिमान साहा के चोटिल होने के बाद पार्थिव पटेल को मौका दिया गया जिन्होंने चार पारियों में 195 रन बनाए. रणजी में भी वे लगातार शानदार प्रदर्शन भी कर रहे हैं. ऐसे में साहा और पार्थिव में से किसे खिलाया जाए इसे लेकर भी कप्तान और कोच चिंतित थे. हालांकि, बाद में बांग्लादेश के खिलाफ साहा का चुनाव किया गया.

मुरली विजय, केएल राहुल, पुजारा, कोहली और रेहाणे से लेकर गेंदबाजों में अश्विन, जडेजा, शमी और भुवनेश्वर सभी टेस्ट में अच्छी फॉर्म बनाए हुए हैं. यही कारण है कि 37 साल बाद भारत ने एक बार फिर इतिहास दोहराया है. भारतीय टीम बांग्लादेश के खिलाफ हैदराबाद टेस्ट को मिलाकर भारतीय धरती पर लगातार 20 टेस्ट मैचों में अजेय रही है जिनमें से उसने 17 मैच जीते और 3 ड्रॉ खेले हैं. इससे पहले उसने जनवरी 1977 से 3 फरवरी, 1980 के बीच यह कारनामा किया था. तब भारतीय टीम ने 6 टेस्ट जीते थे, जबकि 14 ड्रॉ खेले थे. इसके अलावा भारतीय टीम देश और विदेश में मिलाकर पहली बार 19 टेस्ट मैचों में अजेय रही है. कोहली की कप्तानी में नंबर वन बनी भारतीय टीम ने श्रीलंका, दक्षिण अफ्रीका, वेस्टइंडीज, न्यूजीलैंड, इंग्लैंड और बांग्लादेश को हराकर लगातार छह टेस्ट सीरीज जीतने का कार्तिमान भी स्थापित किया है. भारतीय टीम में ऐसा कम ही देखने को मिलता है कि टीम में हर खिलाड़ी लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहा हो और उसके चोटिल होने पर मौका पाने वाला नया खिलाड़ी भी असाधारण खेल का प्रदर्शन कर दे.

स्वर्णकाल

क्रिकेट के कई जानकारों का मानना है कि अब एक बार फिर भारतीय क्रिकेट का सुनहरा समय शुरू हो गया है. इन लोगों का कहना है कि केवल भारतीय टीम के लिए चुने गए 11 से 15 खिलाड़ी ही शानदार प्रदर्शन नहीं कर रहे हैं, बल्कि घरेलू क्रिकेट में भी एक से एक धुरंधर खिलाड़ी सामने आ रहे हैं. यदि रणजी ट्रॉफी के इस सीजन पर नजर डालें तो युवराज सिंह जैसे कई खिलाड़ी शानदार प्रदर्शन के दम पर टेस्ट टीम में दावा ठोक रहे हैं. इसके अलावा इस सीजन में पांच युवा खिलाड़ियों ने तिहरे शतक लगाए हैं. साथ ही कई रिकार्ड भी तोड़े गए हैं जिनमें गुजरात के सुमित गोहेल के नाबाद 359 रन काफी चर्चा में रहे हैं. यह दुनिया भर में प्रथम श्रेणी क्रिकेट में एक ओपनिंग बल्लेबाज की अब तक की सबसे बड़ी पारी है. इसके अलावा इसी सीजन में रणजी का सबसे तेज शतक भी लगा है. दिल्ली के ऋषभ पंत ने 48 गेंदों में ही यह कारनामा कर डाला. जानकारों के मुताबिक भारतीय टीम के प्रदर्शन और इन प्रतिभाओं को देखकर कहा जा सकता है कि भारतीय क्रिकेट का स्वर्णिम काल शुरू हो गया है.

टेस्ट के साथ-साथ अगर वनडे टीम को देखें तो उसका भी हाल कुछ ऐसा ही नजर आ रहा है. न्यूजीलैंड के खिलाफ केदार जाधव को रेहाणे के चोटिल होने पर मौका मिला और उन्होंने जबरदस्त हरफनमौला प्रदर्शन कर टीम में जगह बना ली. इंग्लैंड के खिलाफ शिखर धवन, एल राहुल, कोहली, युवराज, धोनी, केदार जाधव, हार्दिक पांड्या जैसे शानदार ख़िलाड़ी टीम में हैं. लेकिन, इसके बाद भी पिछली सीरीज में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले रेहाणे, रोहित, मनीष पाण्डेय और अमित मिश्रा टीम से बाहर हैं. जाधव के चलने से सुरेश रैना का वनडे से पत्ता लगभग पूरी तरह कट गया है. शानदार खिलाडियों की फ़ौज लिए कप्तान और कोच की अंतिम 11 को लेकर मुश्किलें वनडे में भी टेस्ट से कम नहीं हैं. हालांकि, इसे कोहली के लिए एक मौका भी माना जा रहा है जिसमें वे 2019 के लिए एक अच्छी और संतुलित टीम तैयार कर सकते हैं.

खतरा

वनडे हो या टेस्ट, क्रिकेट के हर फार्मेट में भारतीय क्रिकेट का भविष्य अच्छा नजर आ रहा है. लेकिन इसके बाद भी कुछ जानकार भारतीय क्रिकेट के भविष्य को लेकर आशंकाएं जाहिर कर रहे हैं. हालांकि, ये आशंकाएं क्रिकेट खेलने वालों से जुड़े न होकर उसे खिलवाने वालों यानी उसके प्रशासकों से जुडी हैं. इन जानकारों के मुताबिक भारतीय क्रिकेट में सुधार को लेकर जब से बीसीसीआई पर सुप्रीम कोर्ट या लोढ़ा समिति की पहरेदारी शुरू हुई है तब से इसके प्रशासकों ने इसकी तरक्की में रोड़ा अटकाना शरू कर दिया है. ऐसी कई घटनाएं हो चुकी हैं जिनसे इस बात को वजन मिलता दिखता है.

बीते तीन अक्टूबर को जब लोढ़ा समिति द्वारा बीसीसीआई के बैंक खातों से भुगतान पर रोक लगाई गयी तो बीसीसीआई ने भारत-न्यूजीलैंड सीरीज रद्द करने की बात कह दी. उसका कहना था जब पैसे ही नहीं होंगे तो मैच कैसे कराएगा. बीसीसीआई की ओर से यह बात तब कही गयी जब लोढ़ा समिति ने साफ़ कर दिया था कि उसने बोर्ड के रोजाना के कामकाज से जुड़े भुगतान पर कोई रोक नहीं लगाई है बल्कि यह रोक केवल राज्य क्रिकेट संघों को बड़े भुगतान करने पर लगाई गई है. हालांकि, लोढ़ा समिति के दखल के बाद यह स्थिति खत्म हुई.

लोढ़ा समिति और बीसीसीआई में जारी जंग का खामियाजा घरेलू और जूनियर टीमों को भुगतना पड़ रहा है. खबरों के मुताबिक इस समय इंग्‍लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज खेल रही भारत की अंडर-19 टीम फंड की कमी से इस कदर जूझ रही है कि खिलाड़ी अच्छे खाने को तक तरस रहे हैं. एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, टीम के खिलाड़ि‍यों यहां तक कि कोच राहुल द्रविड़ को भी अब तब बोर्ड की ओर से दैनिक भत्ते नहीं मिल पाए हैं. जूनियर टीम के खिलाड़ि‍यों को 6,800 रुपये प्रतिदिन का भत्ता दिया जाता है लेकिन पिछले एक महीने से ज्यादा समय से यह नहीं मिल पा रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, हालत यह है कि कई खिलाड़ियों को अपने घर से खाने के लिए पैसे मंगाने पड़ रहे हैं. इससे पहले ऐसी ही कई शिकायतें राजस्थान की रणजी टीम के खिलाड़ी भी कर चुके हैं.

अड़ंगे

सुप्रीम कोर्ट द्वारा बीसीसीआई अध्यक्ष अनुराग ठाकुर और सचिव अजय शिर्के को पद से हटाये जाने के बाद भी बोर्ड अधिकारियों पर इंग्लैंड के साथ होने वाली वनडे सीरीज रद्द करने की कोशिश के आरोप लगे हैं. बताया जाता है कि अपने निष्कासन के बाद अजय शिर्के ने इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड के अधिकारियों को फोन कर मौजूदा दौरा रद्द करने की सलाह दी थी. इस खबर का खुलासा तब हुआ जब बीसीसीआई के सीईओ राहुल जौहरी और ईसीबी प्रमुख जाइल्स क्लार्क के बीच हुए कुछ ई-मेल्स सामने आए. इनसे पता चलता है कि शिर्के ने क्लार्क को सुरक्षा और राज्य क्रिकेट संघों के पास फंड की कमी जैसी चीज़ों का हवाला देते हुए उनसे इस दौरे को रद्द करने की बात कही थी.

जानकारों की मानें तो लोढ़ा समिति की सिफारिशों के तहत जो अधिकारी बोर्ड या क्रिकेट संघों से अपना पद खो चुके हैं वे सुप्रीम कोर्ट की आगे की राह कठिन करने का मन बना चुके हैं और ऐसा करने में अगर खेल का नुकसान भी हो रहा है तो उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. साथ ही ये लोग यह भी दिखाना चाहते हैं कि खेल को नुकसान लोढ़ा समिति की वजह से हो रहा है. पिछले महीने एक-दूसरे के प्रबल विरोधी माने जाने वाले अनुराग ठाकुर और तमिलनाडु क्रिकेट संघ के अध्यक्ष एन श्री निवासन के बीच बेंगलुरु में एक बैठक हुई. बताया जा रहा है कि इन दोनों धड़ों ने लोढ़ा समिति से निपटने के लिए हाथ मिला लिए हैं.

इस बैठक में क्या हुआ होगा इसका संकेत अगले दिन आए कुछ फैसलों से मिलता है. इस बैठक के अगले ही दिन तमिलनाडु क्रिकेट संघ ने इंग्लैंड की अंडर-19 टीम के साथ होने वाले दो टेस्ट मैच चेन्नई में करवाने से इनकार कर दिया. इसके लिए उसने पिछले दिनों तमिलनाडु में आये तूफान को जिम्मेदार ठहराया. इसके अलावा इस बैठक के बाद ही हैदराबाद क्रिकेट संघ ने बांग्लादेश के साथ अगले महीने होने वाले टेस्ट मैच का आयोजन कराने में असमर्थता जाहिर कर दी. हालांकि, लोढा समिति के दबाव के बाद हैदराबाद को राजी होना पड़ा. इसके अलावा लोढ़ा समिति की सिफारिशों की वजह से पद छोड़ने को मजबूर हुए बीसीसीआई और राज्य संघों के पदाधिकारियों की योजना मैचों के आयोजन के लिए स्टेडियम न देने की भी है. इनसे जुड़े सूत्रों के मुताबिक क्रिकेट संघ इन मैदानों को अपनी संपत्ति बताते हुए इन्हें मैचों के लिए देने से इनकार करने वाले हैं.

यही नहीं बीसीसीआई के कुछ अधिकारियों ने टीम चयन के दौरान भी रोड़ा अटकाने की कोशिश की थी. छह जनवरी को इंग्लैंड के खिलाफ वनडे और टी20 टीम के चयन के लिए दोपहर 12:30 का समय निर्धारित किया गया था. लेकिन, इससे ठीक पहले बीसीसीआई के पूर्व संयुक्त सचिव अमिताभ चौधरी ने सीईओ राहुल जौहरी को यह बैठक शाम को करवाने का आदेश दे दिया. अमिताभ का कहना था कि बोर्ड के संविधान के मुताबिक टीम चयन के समय सचिव या संयुक्त सचिव का होना जरूरी है इसलिए उनके आने पर ही चयन किया जाये, अगर ऐसा नहीं हुआ तो यह चयन वैध नहीं माना जायेगा. इस मामले में गौर करने वाली बात यह है कि बोर्ड और राज्य संघ में नौ साल पूरे कर चुके अमिताभ चौधरी ने यह अड़चन तब डाली जब तीन दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने अनुराग ठाकुर को पद से हटाते हुए कहा था कि बोर्ड या राज्य संघ में नौ साल पूरे करने वाला कोई भी अधिकारी अब बीसीसीआई में पद संभालने योग्य नहीं रह गया है. छह जनवरी को कई घंटे चले घटनाक्रम के बाद जब लोढ़ा समिति ने अमिताभ को अयोग्य बताते हुए राहुल जौहरी को टीम चयन करने का आदेश दिया तब जाकर चयनकर्ताओं ने भारतीय टीम का चयन किया.

साफ है कि अपने स्वर्णिम काल की ओर बढ़ रहे भारतीय क्रिकेट को अब उसके प्रशासकों से ही सबसे बड़ा खतरा दिख रहा है.