मलेशिया के लापता विमान एमएच-370 के लिए चलाया जा रहा तलाशी अभियान खत्म हो गया है. मलेशिया, चीन और ऑस्ट्रेलिया की सरकारों ने यह ऐलान किया. मलेशिया एयरलाइंस के इस विमान ने आठ मार्च 2014 को 239 यात्रियों के साथ क्वालालंपुर से बीजिंग के लिए उड़ान भरी थी लेकिन, वह रास्ते में ही रहस्यमय ढंग से लापता हो गया था. इसमें एक भारतीय के अलावा ज्यादातर चीनी नागरिक सवार थे.

बीते तीन साल से इस विमान की खोज के लिए गहरे समुद्र में चल रहा अभियान बेनतीजा रहा है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक तीनों सरकारों की ओर से जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया है कि तलाशी अभियान को बंद करने का फैसला बहुत आसान नहीं था लेकिन, सभी वैज्ञानिक उपायों को आजमाने के बावजूद लापता विमान का सुराग लगाने में कोई सफलता नहीं मिल सकी. संयुक्त बयान के मुताबिक एमएच-370 विमान के मलबे का पता लगाने के लिए दक्षिण हिंद महासागर के करीब 1,20,000 वर्ग किमी के दायरे में तलाशी अभियान चलाया गया. विमानन इतिहास के इस सबसे खर्चीले खोज अभियान पर लगभग 1,020 करोड़ रुपये का खर्च आया.

एमएच-370 के लापता होने को विमानन इतिहास की सबसे रहस्यमयी घटना माना जाता है. इसके लापता होने के बाद अलग-अलग कयास लगे. इनमें विमान से पायलटों का नियंत्रण हटने, इसका अपहरण होने या इसके समुद्र से टकराने जैसी बातें शामिल थीं. कुछ जांचकर्ताओं ने आशंका जताई कि विमान को हिंद महासागर की तरफ मोड़ने से पहले इसके ट्रांसपॉन्डर्स जानबूझकर बंद किए गए. कुछ का कहना था कि तलाशी अभियान गलत क्षेत्र में चलाया जा रहा है. हालांकि, इस दौरान मोजांबिक, तंजानिया और दक्षिण अफ्रीका के समुद्र तटों से विमानों के कुछ टुकड़ों ने विमान का सुराग मिलने की उम्मीद जरूर जगाई. लेकिन, अभियान का अंत आखिरकार नाकामयाबी के साथ हुआ.