उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस नेताओं के भाजपा में शामिल होने का सिलसिला जारी है. बुधवार को कांग्रेस के दिग्गज नेता नारायण दत्त तिवारी भी भाजपा में शामिल हो गए. उन्होंने नई दिल्ली में भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की. भाजपा द्वारा एनडी तिवारी को अपने खेमे में लाने का मकसद ब्राह्मण वोटों को एकजुट करने की कोशिश माना जा रहा है. इससे पहले उत्तराखंड में कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष यशपाल आर्य और पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के सहित नौ विधायक भाजपा में शामिल हो चुके हैं.

91 वर्षीय एनडी तिवारी उत्तराखंड के अलावा अविभाजित उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं. वे केंद्रीय मंत्री भी रहे और आंध्र प्रदेश के राज्यपाल भी. हालांकि एक, सैक्स स्कैंडल के चलते उन्हें राज्यपाल का कार्यकाल बीच में छोड़ना पड़ा था.

यह पहला मौका नहीं है, जब एनडी तिवारी कांग्रेस से अलग हुए हैं. इससे पहले उन्होंने 1994 में एक अन्य कांग्रेसी नेता अर्जुन सिंह के साथ मिलकर अपनी पार्टी कांग्रेस (तिवारी) बनाई थी. बाद में सोनिया गांधी के अध्यक्ष बनने पर दोनों नेता कांग्रेस में लौट आए थे. अब कांग्रेस छोड़कर भाजपा में जाने की वजह पूछे जाने पर एक अखबार से बात करते हुए उन्होंने कहा, ‘बीजेपी और कांग्रेस में कोई बुनियादी फर्क तो है नहीं.’

एनडी तिवारी के साथ उनके बेटे रोहित शेखर भी भाजपा में शामिल हुए हैं जिन्हें तिवारी ने छह साल तक चली कानूनी लड़ाई के बाद तीन साल पहले अपना बेटा माना था. खबरों के मुताबिक भाजपा रोहित शेखर को कुमायूं क्षेत्र से टिकट देने के लिए तैयार है. हालांकि, बाहरियों को टिकट देने के मुद्दे पर इस समय पार्टी सूबे में विद्रोह का सामना कर रही है. टिकट न मिलने से नाराज कुछ नेता स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुके हैं. भाजपा उत्तराखंड की 70 सीटों में से 64 पर अपने उम्मीदवार घोषित कर चुकी है. इनमें दूसरे दलों से आए 15 नेताओं को मौका दिया गया है.