आरबीआई गर्वनर उर्जित पटेल बुधवार को नोटबंदी पर कई सवालों के जवाब देने के लिए संसद की वित्तीय मामलों की स्थायी समिति के सामने पेश हुए. खबरों के मुताबिक उर्जित पटेल ने समिति को इस बात का कोई जवाब नहीं दिया कि नोटबंदी के बाद बैंकों में कितनी रकम वापस आई है. समिति के सदस्य टीएमसी सांसद सुगाता रॉय ने इस बात की पुष्टि करते हुए बताया कि इस सवाल के जवाब पर उर्जित पटेल खामोश बैठे रहे.

पिछले दिनों कुछ खबरों में कहा गया था कि करीब 15.4 लाख करोड़ रु की अमान्य घोषित की गयी रकम का 97 फीसदी हिस्सा बैंकों में वापस आ गया है.

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक आरबीआई प्रमुख ने संसदीय समिति को बताया है कि नए नोटों में 9.2 लाख करोड़ रुपये बैंकिंग सिस्टम में डाले जा चुके हैं. हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि नोटबंदी के बाद खराब हुए हालात कब तक सामान्य होंगे.

एनडीटीवी के अनुसार नोटबंदी के फैसले की तैयारी को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में पटेल का कहना था कि इस फैसले की तैयारी जनवरी 2016 से चल रही थी. आरबीआई प्रमुख का यह बयान उनके द्वारा समिति को पहले दिए गए लिखित बयान का बिलकुल उलटा है. इससे पहले अपने बयान में उन्होंने कहा था कि नोटबंदी की घोषणा से सिर्फ एक दिन पहले सरकार ने केंद्रीय बैंक को बड़े नोट रद्द करने की सलाह दी थी.

20 जनवरी को नोटबंदी के मुद्दे को लेकर उर्जित पटेल को केवी थॉमस की अध्यक्षता वाली लोक लेखा समिति (पीएसी) के समक्ष भी पेश होना है. थॉमस ने पिछले दिनों कहा था कि अगर समिति उर्जित पटेल के जवाबों से संतुष्ट नहीं हुई तो वे नोटबंदी पर सफाई देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी समन भेज सकते हैं.