भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर उर्जित पटेल बुधवार को संसद की वित्तीय मामलों की समिति के सामने पेश हुए थे. इस दौरान समिति के सदस्य दिग्विजय सिंह ने जब पटेल से कुछ मुश्किल सवाल पूछे तो आरबीआई गवर्नर रह चुके पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उन्हें टोका. एक खबर के मुताबिक पूर्व प्रधानमंत्री ने दिग्विजय से कहा, ‘आप उनसे (पटेल से) ऐसे बात नहीं कर सकते.’ फिर वे पटेल से बोले, ‘आपको इस तरह के सवालों के जवाब देने की जरूरत नहीं है.’ इस तरह मनमोहन सिंह पटेल को एक असहज स्थिति से बचा ले गए.

लेकिन अब सवाल यह है कि शुक्रवार को पटेल संसद की लोकलेखा समिति (पीएसी) के सामने पेश होने वाले हैं. वहां उन्हें कौन बचाएगा?

खबरों के मुताबिक, दिग्विजय सिंह ने आरबीआई गवर्नर से यह भी पूछा था, ‘लोगों पर अपने ही खातों से पैसे निकालने के लिए लगी बंदिशें कब तक हटा ली जाएंगी?’ सूत्र बताते हैं कि इस के जवाब में पटेल ने सिर्फ इतना कहा, ‘नकदी की कोई समस्या नहीं है. अब तक अर्थव्यवस्था में 9.2 लाख करोड़ रुपए डाले जा चुके हैं. जबकि नोटबंदी के फैसले से 15.44 लाख करोड़ रुपए की मुद्रा चलन से बाहर हुई थी.’ उनके इस जवाब से समिति के सदस्य कुछ तल्ख हो गए. उन्होंने कहा, ‘आप (पटेल) साफ जवाब नहीं दे रहे हैं.’ इस पर मनमोहन सिंह ने आपत्ति जताई थी.

समिति के ही एक सदस्य ने बताया कि इससे पहले अध्यक्ष वीरप्पा मोइली ने भी सदस्यों से कहा था कि आरबीआई गवर्नर की गरिमा का ख्याल रखा जाना चाहिए. मोइली का मानना था कि उन पर और अन्य अधिकारियों पर ऐसे सवालों का जवाब देने का दबाव नहीं डालना चाहिए जिनके बारे में खुद उनके सामने ही स्थिति स्पष्ट न हो. लेकिन सूत्र बताते हैं कि जब आरबीआई गवर्नर अधिकांश सवालों का जवाब साफ-साफ नहीं दे सके तो कुछ सदस्यों का रवैया तल्ख हो गया था. हालांकि अब यही स्थिति शुक्रवार को पैदा होने की आशंका बन रही है, जब पटेल को पीएसी के सदस्यों के सामने नोटबंदी पर जवाब देना होगा.

वैसे पटेल ने समिति के सदस्यों के सामने यह साफ कहा कि नोटबंदी पर चर्चा पिछले साल जनवरी से ही शुरू हो गई थी और इस पर फैसला पिछले साल 27 मई के आसपास लिया गया. लेकिन उनका कहना था कि इस संबंध में कोई दस्तावेज नहीं हैं क्योंकि गोपनीयता बनाए रखने के लिए इस मसले पर हुई बैठकों का रिकॉर्ड नहीं रखा गया है. भाजपा सदस्य निशिकांत दुबे ने इस पर सुझाव दिया कि आरबीआई को उन अधिकारियाें के यात्रा दस्तावेज पेश करने चाहिए जो बैठकों में हिस्सा लेने के लिए मुंबई से दिल्ली आए थे. इससे यह पुख्ता हो सकेगा कि इस पर आरबीआई की सरकार के साथ चर्चा पहले से चल रही थी. हालांकि इस सुझाव पर भी समिति को कोई आश्वासन नहीं मिला.