अमेरिकी नौसेना के शीर्ष कमांडर हैरी हैरिस जूनियर ने हिंद महासागर में चीन की बढ़ती सक्रियता को लेकर महत्वूपर्ण बयान दिया है. उनके मुताबिक हिंद महासागर में चीन का बढ़ता प्रभाव भारत के लिए चिंता का विषय है. हैरी का कहना है, ‘इस क्षेत्र में जो प्रभाव चीन का है वैसा प्रभाव भारत का नहीं बन पाया है.’

एडमिरल हैरी ने एनडीटीवी से कहा कि हिंद महासागर में चीनी विमानवाहक जहाजों की आवाजाही को रोकने वाला कोई नहीं है. हालांकि उन्होंने चीन की तुलना अमेरिका से करते हुए कहा कि चीनी युद्धपोतों में वह क्षमता नहीं है जो अमेरिका के बड़े जहाजों में है. साथ ही उन्होंने भारतीय नेवी की हौसला अफजाई करते हुए कहा, ‘विमानवाहक जहाजों के संचालन में भारत को चीन से ज्यादा महारत हासिल है.’

एडमिरल हैरी के मुताबिक चीनी युद्धपोतों और पनडुब्बियों पर भारत और अमेरिका मिल कर नजर रखे हुए हैं और वे चीनी पोतों की गतिविधियों से जुड़ी जानकारी आपस में साझा करते हैं. बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में चीनी पनडुब्बियों पर निगरानी रखने के लिए भारत काफी हद तक अमेरिका द्वारा निर्मित बोइंग पी8-आई पनडुब्बीरोधी जहाजी बेड़े पर निर्भर है.

एडमिरल हैरी ने आगे कहा, ‘यदि भारत संचार और सुरक्षा समझौते (सीओएमसीओएसए) पर हस्ताक्षर कर देता है तो भारतीय और अमेरिकी नौसेना के बीच और जरूरी सूचनाओं का ज्यादा से ज्यादा लेनदेन आपस में किया जा सकता है.’ सीओएमसीओएसए संधि के तहत अमेरिकी सेना और उसके सहयोगी आपस में सुरक्षा संबंधी महत्वपूर्ण सूचनाएं साझा करते हैं.

एडमिरल हैरी के मुताबिक पी8 दुनिया के सर्वश्रेष्ठ सक्षम पनडुब्बीरोधी जंगी बेड़ों में से एक है. भारत के पास पी8-आई है जबकि अमेरिका के पास पी8-ए है. इन दोनों की संचार प्रणाली अलग होने के कारण उनका आपसी तालमेल वैसा नहीं हो पाता जैसा होना चाहिए. एडमिरल हैरी का कहना था, ‘ऐसे में जिन संदिग्ध पनडुब्बियों की बात हम कर रहे हैं उनपर कड़ी निगरानी रखने के लिए हमें इस समझौते को आगे बढ़ाने की जरूरत है.’

खबरों के मुताबिक पिछले तीन सालों में चीन ने हिंद महासागर में परमाणु क्षमता वाली पनडुब्बियों से लैस जहाजी बेड़ों की संख्या में इजाफा किया है. इस कदम के पीछे उसकी दलील है कि उसने सोमालिया के समुद्री डकैतों से निपटने के लिए ये तैयारियां की हैं. लेकिन भारतीय नौसेना का मानना है कि सोमालियां के समुद्री डकैतों से लड़ने के लिए इतनी बड़ी संख्या में युद्धपोत तैनात करने की कोई आवश्यकता नहीं है. कई जानकार भी मानते हैं कि चीन हिंद महासागर में सैन्य बंदरगाहों और युद्धपोतों की तैनाती कर भारत पर दवाब बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रहा है.

पिछले साल मई में कराची बंदरगाह पर परमाणु क्षमता से लैस एक चीनी पनडुब्बी को देखा गया था. इस पनडुब्बी में पाकिस्तानी सैनिक सवार थे. भारतीय नौसेना का मानना है कि चीन ने पाकिस्तान को यह पनडुब्बी लीज पर दी है. एडमिरल हैरी ने भी पाकिस्तान और चीन की निकटता पर चिंता जताई है. उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तान और चीन के बीच बढ़ते रिश्ते चिंता का विषय हैं. चीन का खुद के लिए मजबूत और समृद्ध होना बुरा नहीं है. लेकिन यदि चीन इस ताकत का इस्तेमाल आक्रामक रुख अपनाने में करता है तो यह बात भारत सहित हम सभी को परेशान कर सकती है.’