भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर उर्जित पटेल नोटबंदी पर जवाब देने के लिए शुक्रवार को संसद की लोक लेखा समिति (पीएसी) के सामने पेश हुए. एनडीटीवी की एक खबर के मुताबिक उन्होंने समिति को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नोटबंदी का ऐलान किए जाने से पहले की प्रक्रिया की जानकारी दी. उर्जित पटेल ने समिति को बताया कि केंद्रीय बैंक के बोर्ड ने पिछले साल आठ नवंबर को शाम साढ़े पांच बजे केंद्र सरकार के प्रस्ताव पर मुहर लगाई थी. उन्होंने बताया कि बोर्ड के पास यह प्रस्ताव सात नवंबर को भेजा गया था. आरबीआई बोर्ड के अध्यक्ष उर्जित पटेल ही हैं.

बताया जाता है कि आठ नवंबर को जब आरबीआई बोर्ड 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों को अवैध घोषित करने की योजना पर विचार कर रहा था तो उसी समय कैबिनेट की भी एक बैठक हो रही थी. इसमें मंत्रियों को मोबाइल फोन साथ में रखने से मना किया गया था. 10 सदस्यीय आरबीआई बोर्ड की बैठक में आठ सदस्य मौजूद थे और सभी ने नोटबंदी के प्रस्ताव पर अपनी सहमति दी थी. आरबीआई बोर्ड की मंजूरी मिलने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी जानकारी कैबिनेट को दी और इसकी सहमति के बाद रात के आठ बजे राष्ट्र को संबोधित किया.

प्रत्येक शुक्रवार को आरबीआई गवर्नर और एक डिप्टी गवर्नर नोटबंदी की तैयारी के लिए दिल्ली आते थे

खबर में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि आरबीआई गवर्नर ने समिति को और भी कई जानकारियां दीं. मसलन नोटबंदी की तैयारी मई, 2016 से चल रही थी. इसके लिए प्रत्येक शुक्रवार को आरबीआई गवर्नर और एक डिप्टी गवर्नर मुंबई स्थित मुख्यालय से दिल्ली आकर नोटबंदी पर काम कर रही टीम के साथ बैठक में शामिल होते थे. इस टीम में प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) और वित्त मंत्रालय के लोगों को शामिल किया था. सूत्रों के मुताबिक पटेल ने यह भी बताया कि पिछले साल मई से अगस्त के बीच आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन इसका हिस्सा थे.

आरबीआई गवर्नर बदले जाने की वजह से 2000 रु के नोट जारी करने में देरी

सूत्रों के मुताबिक उर्जित पटेल ने यह भी बताया कि 2,000 रुपये के पर्याप्त नोट जारी करने का निर्णय जून, 2016 में ही ले लिया गया था. लेकिन, इस नए नोट को नोटबंदी के फैसले के बाद चलन में लाया जाना था इसलिए इस पर नए आरबीआई के गवर्नर के हस्ताक्षर होने थे. यही वजह है कि उर्जित पटेल के पद संभालने तक इंतजार करना पड़ा. इस देरी की वजह से ही नोटबंदी के बाद पर्याप्त संख्या में नए नोट जारी नहीं किए जा सके. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2000 रुपये के नोट के डिजाइन और सुरक्षा फीचरों को मंजूरी दी थी.