अमेरिका में जल्द ही भारतीय कामगारों को रोजगार संबंधी मुश्किलों को सामना करना पड़ सकता है. शुक्रवार को अमेरिकी संसद (कांग्रेस) में एच-1बी वीजा से जुड़ी नीतियों को सख्त बनाने के लिए एक बिल पेश किया गया है. इस बिल में अमेरिकी कामगारों से पहले वीजा धारकों को नौकरियां दिए जाने पर सख्त रोक की बात कही गई है. साथ ही इसमें स्पष्ट किया गया है कि वीजा धारक अमेरिकी कर्मचारियों की जगह नहीं ले सकते.

खबरों के मुताबिक बिल के पास होने के बाद अमेरिकी नियोक्ताओं को एच-1बी धारकों को नौकरी देने से पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि अमेरिकी कामगारों को रोजगार देने के पूरे प्रयास किए जा चुके हैं. संसद में इस बिल को पेश करने वाले सांसद चक ग्रासले का कहना है, ‘कांग्रेस ने अमेरिका के योग्य कर्मचारियों की मदद के लिए वीजा नियमों को बनाया था न कि इसलिए कि बाहर के लोग आएं और उनकी नौकरियां छीन लें.’ ग्रासले का कहना था कि यह बिल बहुत जरूरी है क्योंकि कुछ कंपनियां कम वेतन पर प्रवासी कर्मचारियों को नौकरी देकर स्थानीय कामगारों की संख्या में कटौती कर रही हैं.

अमेरिकी मीडिया के अनुसार इस बिल के पास होने के बाद लॉटरी द्वारा एच-1बी वीजा के वार्षिक वितरण पर रोक लगा दी जाएगी. हालांकि, इसके पारित होने के बाद अमेरिकी विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे प्रवासी छात्रों को रोजगार में पहले की तरह ही प्राथमिकता दी जाएगी.

जानकारों के मुताबिक अगर अमेरिकी संसद में यह बिल पास हो गया तो आईबीएम, टीसीएस और इंफोसिस जैसी आईटी कंपनियां सबसे ज्यादा प्रभावित होंगी जिन्होंने एच-1बी और एल-1वीजा के तहत बड़ी संख्या में भारतीय युवाओं को नौकरी दी है. पिछले दिनों इस बिल और प्रवासियों के मामले में डोनाल्ड ट्रंप के रुख को देखते हुए इंफोसिस और टीसीएस जैसी दिग्गज कंपनियों ने भविष्य में अमेरिकी कॉलेजों से ज्यादा इंजीनियरों को नियुक्त करने की बात कही थी. हाल ही में संपन्न हुए अमेरिकी चुनावों में प्रवासियों पर नियंत्रण और वीजा नियमों को सख्त बनाना डोनाल्ड ट्रंप के प्रमुख मुद्दों में से एक था.