किरण जी आपने कहा कि ‘मैं नाम की उपराज्यपाल बनी नहीं रह सकती जैसा कि राज्य सरकार चाहती है.‘ ज्यादातर राज्यों में राज्यपाल या उपराज्यपाल प्रशासनिक रूप से बहुत सक्रिय नहीं होते. फिर आपको नाम की उपराज्यपाल बनने में क्या दिक्कत है?

देखिये मेरी दिक्कत है कि बिना सक्रिय हुए, एक्टिव हुए मेरा पाचन तंत्र ठीक नहीं रहता. और दूसरा यह कि नाम की उपराज्यपाल बने रहकर मुझे मिला टारगेट भी पूरा नहीं हो सकता.

टारगेट?

अरे टारगेट यानी लक्ष्य और जनता के प्रतिनिधि के रूप में मेरा लक्ष्य है सेवा. मैं यहां सेवा करने आई हूं और पुडुचेरी के लोगों की सेवा करके ही रहूंगी.

क्या आप भी नजीब जंग की तरह कभी भी इस्तीफा दे सकती हैं?

मैं इस्तीफा दूंगी, लेकिन अपना यहां आने का खास उद्देश्य पूरा करने के बाद.

कौन-सा खास उद्देश्य?

पूरे प्रदेश में नियमित योग शिविर शुरू कराने हैं.

मतलब आप आरएसएस का एजेंडा पूरा करने में लगी हैं.

मेरा एक ही एजेंडा है; देश सेवा और वो मैं पूरा करके रहूंगी.

पहले दिल्ली और अब पुडुचेरी, आखिर गैरभाजपा राज्यों में सरकार और केंद्र के प्रतिनिधि के बीच इस तरह का तनाव क्यों है?

मेरा और श्री जंग का चुनाव टी20 का फाइनल मैच जीतने के लिए हुआ था, न कि प्रैक्टिस मैच में अच्छे प्रर्दशन के लिए जैसा कि बाकी राज्यपाल करते हैं. नजीब जंग बहुत शानदार खेले, लेकिन जख्मी होने के कारण उन्हें बीच में ही मैच छोड़ देना पड़ा. पर मैं जख्मी होकर नहीं, फतह हासिल करके जाऊंगी.

पुडुचेरी के मुख्यमंत्री वी नारायणसामी ने सरकारी कामकाज में सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाया था...आपने उसे रद्द क्यों कर दिया?

जब मैंने भाजपा ज्वाइन की थी, तो नरेंद्र मोदी पर किये गए मेरे पुराने टवीट्स को सोशल मीडिया पर खूब ट्रेंड कराया गया और मेरे यूटर्न का खूब मजाक उड़ाया गया. जिस सोशल मीडिया ने मेरी जान नहीं छोड़ी उससे में किसी और को कैसे बच जाने दूं!

लगभग डेढ़ साल पहले अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर राजपथ पर जो बारिश हुई थी उसे आपने सामूहिक योग का नतीजा बताया था. क्या आप सच में मानती हैं कि सामूहिक योग के प्रभाव से बारिश हो सकती है?

भारत एक अदभुत क्षमताओं वाला देश है, यहां कुछ भी संभव है.

आप अक्सर किसी न किसी विवाद में क्यों घिरी रहती हैं?

केंद्र सरकार की...अब्ब्ब्ब्ब मेरा मतलब इस समाज की, देश की सेवा करना मेरा पहला उद्देश्य है. सेवा करते वक्त मैं अक्सर हाइपरएक्टिव हो जाती हूं. मेरे हाइपरएक्टिविज्म का परिणाम ही ये विवाद हैं. जब भी आप मुझे विवाद से घिरा पाएं, तो समझ लें कि मैं देश सेवा के किसी न किसी काम में अतिसक्रिय हूं. (जोश के साथ) क्या देश सेवा में अतिसक्रिय होना गलत है, बुरा है?

दिल्ली चुनाव को आपने अपने जीवन का सर्वोत्तम अनुभव क्यों कहा ?

आईपीएस बनने के लिए मैंने सालों आंखें फोड़ीं, तब जाकर मुझे पुलिस की नौकरी और प्रशासनिक सेवा के अनुभव हुए. लेकिन राजनीति में आप रातों-रात नायक या खलनायक बन जाते हैं, बिना ज्यादा कुछ किये धरे....यह अनुभव अपने आप में बेहद शानदार है.

तो आप राजनीति में नायिका बनीं या खलनायिका ?

इस बात के लिए मुझे नायिका बनाया जाना चाहिए था कि मैंने 37 साल पुरानी पार्टी की एक नवजात पार्टी से बुरी तरह हार का ठीकरा अपने सिर पर फुड़वा लिया. लेकिन उल्टा मुझे खलनायिका बना दिया गया! पर मैं भी किरण हूं... किरण सिर्फ उजाले का, रोशनी का प्रतीक है. मैं इस देश की नायिका थी, हूं और रहूंगी. कोई पार्टी, व्यक्ति, हार या कोई भी यू टर्न मुझे खलनायिका नहीं बना सकते.

नोटबंदी पर आपके क्या विचार हैं ?

अरविंद केजरीवाल का नोटबंदी पर इतना भारी विरोध जताना ही साबित करता है कि मोदी जी ने बिल्कुल सही कदम उठाया है.

सिर्फ केजरीवाल के विरोध के कारण आप नोटबंदी को सही ठहरा रही हैं, यह तो बड़ा अजीब है.

बाकी कारण थोड़े टेढ़े हैं मेरी तरह आपकी भी समझ में नहीं आएंगे. (जोश के साथ ऊंची आवाज में) वैसे भी हमारा देश अतुल्य भारत है, इनक्रेडिबल इंडिया. यहां कुछ भी अजीब नहीं है, सब कुछ अतुल्य है. इनक्रेडिबल है.

आपने भाजपा ही क्यों ज्वाइन की ?

मैं मोदी जी के स्वच्छता अभियान से बहुत प्रभावित हूं. समाज की किसी भी किस्म की गंदगी को साफ करने के लिए उसमें जाना पड़ता है, उसे हाथ में लेना ही पड़ता है. यही सोचकर मैंने बहुत सारी गंदगियों....अब्ब्ब्ब्ब मेरा मतलब पार्टियों में से भाजपा को चुन लिया.

अच्छा यह बताइये, आपने दिल्ली के चुनाव में अरविंद केजरीवाल की सार्वजनिक बहस की चुनौती को क्यों स्वीकार नहीं किया था ?

मैं जिस किसी भी मुद्दे पर अपनी राय रखती, तो केजरीवाल यही कहते कि ये मैं नहीं मोदी जी बोल रहे हैं. तो भाई फिर उन्हीं से बहस कर लो, मुझे क्यों ललकार रहे हो!

किरण जी उपराज्यपाल से पहले आप पुलिस अधिकारी, समाजसेविका, लेखिका, टीवी शो की होस्ट आदि भूमिकाओं में भी रह चुकी हैं. अपनी किस भूमिका को आपने सबसे ज्यादा पसंद किया?

उपराज्यपाल की भूमिका सबसे ज्यादा मजेदार है. इसमें पुलिसिया रौब भी है, समाज सेवा भी और लिखने का सबसे ज्यादा मसाला भी यहीं मिल रहा है.

कैसा मसाला ?

‘एलजी वर्सेज मुख्यमंत्री‘, इस विषय पर देश में पहली किताब मेरी ही होगी.

इस विषय पर नजीब जंग भी तो लिख सकते हैं और वो भी आपसे पहले, क्योंकि वो तो आजकल खाली भी हैं.

हां, पर उनके पास बताने के लिए और बचा ही क्या है!... आधा मीडिया और पूरा केजरीवाल ने चिल्ला-चिल्लाकर सबको बता दिया. लेकिन नारायणसामी की कौन सुनता है. और यहां सुन भी ले तो दिल्ली बहुत दूर है यहां से.

एक अंतिम सवाल, यह बताइये कि आपको अपने लिए किरण बेदी सुनना अच्छा लगता है या क्रेन बेदी ?

(मुस्कुराते हुए) क्रेन बेदी पुरानी बात हो गई. तब से जीवन में इतनी लड़ाइयां लड़ी हैं कि आप मुझे किरण के बजाय रण बेदी भी कह सकती हैं.