पाकिस्तानी सेना ने आखिरकार भारतीय सैनिक चंदू बाबूलाल चव्हाण को रिहा कर दिया है. समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक उसने चव्हाण को शनिवार दोपहर 2.30 बजे भारतीय अधिकारियों को सौंपा. इससे पहले पाकिस्तानी सेना की मीडिया विंग आईएसपीआर ने बयान जारी कर भारतीय सिपाही को रिहा करने के फैसले की जानकारी दी थी. अपने बयान में उसने कहा था कि यह फैसला शांति और सौहार्द कायम करने के प्रयासों के तहत लिया गया है. पाकिस्तानी सेना ने यह दावा भी किया है कि चव्हाण ने अपने अधिकारियों के व्यवहार से नाराज होकर नियंत्रण रेखा पार की थी.

चंदू बाबूलाल चव्हाण 37 राष्ट्रीय राइफल्स का जवान है. पिछले साल 30 सितंबर को गलती से नियंत्रण रेखा पार करने के समय वह जम्मू-कश्मीर के मेंडर जिले में तैनात था. इसके एक दिन पहले भारतीय सेना ने नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में बने आतंकी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक करने का दावा किया था. हालांकि, चव्हाण इस अभियान में शामिल नहीं था. लेकिन, पाकिस्तानी सेना ने उसे सर्जिकल स्ट्राइक के दिन पकड़ने का दावा किया था.

चव्हाण के पाकिस्तान क्षेत्र में पहुंचने के बाद भारतीय सेना ने कहा था कि अक्सर दोनों देशों के सैनिक और आम नागरिक गलती से सीमा पार कर जाते हैं, जिन्हें तय व्यवस्था के तहत लौटा दिया जाता है. इसके बाद भारतीय सेना और विदेश मंत्रालय पाकिस्तान के साथ अपने स्तर पर संपर्क बनाए हुए थे.

इसी महीने की 12 तारीख को रक्षा राज्यमंत्री सुभाष भामरे ने चंदू बाबूलाल चव्हाण की जल्द रिहाई का आश्वासन दिया था. उन्होंने कहा था कि पाकिस्तानी सेना जरूरी पूछताछ के बाद चव्हाण को रिहा कर देगी. चव्हाण महाराष्ट्र के धूले का रहने वाला है जो रक्षा राज्यमंत्री भामरे का चुनाव क्षेत्र है. चंदू बाबूलाल चव्हाण के भाई ने रक्षा राज्यमंत्री भामरे और अन्य लोगों को अपने भाई की सुरक्षित रिहाई के लिए धन्यवाद कहा है.