चीन की ट्रंप को चेतावनी, कहा - अगर ताइवान को बढ़ावा दिया तो हम भी चुप नहीं बैठेंगे | सोमवार, 16 जनवरी 2017

ताइवान को लेकर अमेरिका के निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बयानबाजी और चीन की चेतावनी बताती है कि आने वाले समय में दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ सकता है. सोमवार को चीन के दो अखबारों ने एक बार फिर ट्रंप को चेतावनी दी है. इसमें कहा गया है कि अगर डोनाल्ड ट्रंप ताइवान को चीन का हिस्सा मानने वाली ‘वन चाइना पॉलिसी’ को लेकर अपना मौजूदा रुख जारी रखते हैं तो चीन भी शांत नहीं बैठा रहेगा. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक चीनी अखबारों का यह भी कहना है कि ट्रंप के इस उकसावे की कीमत ताइवान को भी चुकानी पड़ सकती है.

चाइना डेली ने लिखा है कि ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद ‘वन चाइना पॉलिसी’ में किसी भी बदलाव से दोनों देशों के संबंध बिगड़ना तय है. इसी तरह चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने अपने संपादकीय में लिखा है कि अगर ट्रंप वन चाइना पॉलिसी से कोई छेड़छाड़ करते हैं तो चीन सख्त कदम उठाएगा. आगे कहा गया है, ‘इससे ताइवान को चीन में मिलाने की प्रक्रिया तेज होगी और उन लोगों का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा जो ताइवान की आजादी का समर्थन करते हैं.’

डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले साल दिसंबर में ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग वेन से फोन पर बात की थी और ‘वन चाइना पॉलिसी’ की प्रांसगिकता पर भी सवाल उठाया था. दरअसल, चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि ताइवान खुद को एक स्वतंत्र देश मानता है.

एमएच-370 का कोई सुराग न मिलने के साथ तलाशी अभियान बेनतीजा खत्म | मंगलवार, 17 जनवरी 2017

मलेशिया के लापता विमान एमएच-370 के लिए चलाया जा रहा तलाशी अभियान खत्म हो गया है. मलेशिया, चीन और ऑस्ट्रेलिया की सरकारों ने यह ऐलान किया. मलेशिया एयरलाइंस के इस विमान ने आठ मार्च 2014 को 239 यात्रियों के साथ क्वालालंपुर से बीजिंग के लिए उड़ान भरी थी लेकिन, वह रास्ते में ही रहस्यमय ढंग से लापता हो गया था. इसमें एक भारतीय के अलावा ज्यादातर चीनी नागरिक सवार थे.

बीते तीन साल से इस विमान की खोज के लिए गहरे समुद्र में चल रहा अभियान बेनतीजा रहा है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक तीनों सरकारों की ओर से जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया है कि तलाशी अभियान को बंद करने का फैसला बहुत आसान नहीं था लेकिन, सभी वैज्ञानिक उपायों को आजमाने के बावजूद लापता विमान का सुराग लगाने में कोई सफलता नहीं मिल सकी. संयुक्त बयान के मुताबिक एमएच-370 विमान के मलबे का पता लगाने के लिए दक्षिण हिंद महासागर के करीब 1,20,000 वर्ग किमी के दायरे में तलाशी अभियान चलाया गया. विमानन इतिहास के इस सबसे खर्चीले खोज अभियान पर लगभग 1,020 करोड़ रुपये का खर्च आया.

नाइजीरियाई वायु सेना ने गलती से विस्थापितों के कैंप पर बम गिराया, 100 से ज्यादा की मौत | बुधवार, 18 जनवरी 2017

नाइजीरियाई वायु सेना की एक गलती के चलते 100 से ज्यादा निर्दोष मारे गए हैं जबकि 200 से ज्यादा लोग घायल हो गए हैं. समाचार एजेंसी एपी के मुताबिक वायु सेना ने चरमपंथी संगठन बोको हरम के खिलाफ कार्रवाई के दौरान गलती से विस्थापितों के एक कैंप पर बम गिरा दिया. रेडक्रॉस ने कहा है कि इस हमले में उसके छह कार्यकर्ता भी मारे गए हैं.

नाइजीरियाई सेना के कमांडर मेजर जनरल लकी इराबोर ने इस घटना की पुष्टि की है. उन्होंने बताया है कि वायु सेना से यह चूक नाइजीरिया और कैमरून की सीमा पर रान कस्बे में हुई. यहां बोको हराम के आतंकियों के जुटने की सूचना पर लड़ाकू विमानों को कार्रवाई के लिए भेजा गया था. नाइजीरियाई सेना ने इन दिनों देश के उत्तरी इलाके में बोको हराम के खिलाफ निर्णायक अभियान चला रखा है. बोको हरम नाइजीरिया को इस्लामिक राज्य बनाने के लिए आम नागरिकों को निशाना बना रहा है.

हिंद महासागर में चीनी नौसेना की सक्रियता भारत के लिए चिंता का विषय : अमेरिका | गुरुवार, 19 जनवरी 2017

अमेरिकी नौसेना के शीर्ष कमांडर हैरी हैरिस जूनियर ने हिंद महासागर में चीन की बढ़ती सक्रियता को लेकर महत्वूपर्ण बयान दिया है. उनके मुताबिक हिंद महासागर में चीन का बढ़ता प्रभाव भारत के लिए चिंता का विषय है. हैरी का कहना है, ‘इस क्षेत्र में जो प्रभाव चीन का है वैसा प्रभाव भारत का नहीं बन पाया है.’

एडमिरल हैरी ने एनडीटीवी से कहा कि हिंद महासागर में चीनी विमानवाहक जहाजों की आवाजाही को रोकने वाला कोई नहीं है. लेकिन, चीनी युद्धपोतों और पनडुब्बियों पर भारत और अमेरिका मिल कर नजर रखे हुए हैं और वे चीनी पोतों की गतिविधियों से जुड़ी जानकारी आपस में साझा करते हैं.

खबरों के मुताबिक पिछले तीन सालों में चीन ने हिंद महासागर में परमाणु क्षमता वाली पनडुब्बियों से लैस जहाजी बेड़ों की संख्या में इजाफा किया है. इस कदम के पीछे उसकी दलील है कि उसने सोमालिया के समुद्री डकैतों से निपटने के लिए ये तैयारियां की हैं. लेकिन भारतीय नौसेना का मानना है कि सोमालियां के समुद्री डकैतों से लड़ने के लिए इतनी बड़ी संख्या में युद्धपोत तैनात करने की कोई आवश्यकता नहीं है. कई जानकार भी मानते हैं कि चीन हिंद महासागर में सैन्य बंदरगाहों और युद्धपोतों की तैनाती कर भारत पर दवाब बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रहा है.

सबसे पहले अमेरिकियों को नौकरी देने की बात करने वाला बिल अमेरिकी संसद में पेश | शुक्रवार, 20 जनवरी 2017

अमेरिका में जल्द ही भारतीय कामगारों को रोजगार संबंधी मुश्किलों को सामना करना पड़ सकता है. शुक्रवार को अमेरिकी संसद (कांग्रेस) में एच-1बी वीजा से जुड़ी नीतियों को सख्त बनाने के लिए एक बिल पेश किया गया है. इस बिल में अमेरिकी कामगारों से पहले वीजा धारकों को नौकरियां दिए जाने पर सख्त रोक की बात कही गई है. साथ ही इसमें स्पष्ट किया गया है कि वीजा धारक अमेरिकी कर्मचारियों की जगह नहीं ले सकते.

खबरों के मुताबिक बिल के पास होने के बाद अमेरिकी नियोक्ताओं को एच-1बी धारकों को नौकरी देने से पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि अमेरिकी कामगारों को रोजगार देने के पूरे प्रयास किए जा चुके हैं. संसद में इस बिल को पेश करने वाले सांसद चक ग्रासले का कहना है, ‘कांग्रेस ने अमेरिका के योग्य कर्मचारियों की मदद के लिए वीजा नियमों को बनाया था न कि इसलिए कि बाहर के लोग आएं और उनकी नौकरियां छीन लें.’ ग्रासले का कहना था कि यह बिल बहुत जरूरी है क्योंकि कुछ कंपनियां कम वेतन पर प्रवासी कर्मचारियों को नौकरी देकर स्थानीय कामगारों की संख्या में कटौती कर रही हैं.

जानकारों के मुताबिक अगर अमेरिकी संसद में यह बिल पास हो गया तो आईबीएम, टीसीएस और इंफोसिस जैसी आईटी कंपनियां सबसे ज्यादा प्रभावित होंगी जिन्होंने एच-1बी और एल-1वीजा के तहत बड़ी संख्या में भारतीय युवाओं को नौकरी दी है.

पाकिस्तान में बम धमाका, 20 की मौत | शनिवार, 21 जनवरी 2017

पाकिस्तान में हुए एक बम धमाके में कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई है जबकि 45 अन्य घायल हुए हैं. यह घटना देश के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र कुर्रम एजेंसी के पाराचिनार शहर में हुई. एक अधिकारी इकराम खान ने एएफपी को बताया कि शहर की सब्जी मंडी में यह धमाका शनिवार सुबह आठ बजे हुआ जब बाजार में भारी भीड़ थी.

अधिकारियों के मुताबिक इस विस्फोट के लिए रिमोट द्वारा संचालित आईईडी बम का इस्तेमाल किया गया था जिसे सब्जी की एक पेटी में रखा गया था. अभी तक किसी भी आतंकी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है. लेकिन अधिकारियों ने इस क्षेत्र में सक्रिय लश्कर-ए-झांगवी और अनसारुल-मुजाहिदीन जैसे संगठनों पर शक जताया है. अफगानिस्तान के सीमावर्ती कबीलाई इलाके में स्थित पाराचिनार शहर में इन संगठनों द्वारा पहले भी कई हमले किए जा चुके हैं.