जब रितिक ने चला दी शाहरुख पर मीठी छुरी!

रईस और काबिल का क्लैश लंबे समय से रोशन खानदान और शाहरुख के बीच क्लेश की वजह बना हुआ है. शाहरुख इस विवाद पर अब तक कम ही बोले हैं लेकिन राकेश रोशन ने जमकर बयानबाजी की है और रईस के निर्माताओं व शाहरुख पर मौका मिलते ही आरोप लगाए हैं कि उनके द्वारा पहले से बुक डेट पर शाहरुख को रईस रिलीज नहीं करनी चाहिए थी. दूसरी तरफ रितिक रोशन अब तक इस मुद्दे पर बेहद संभलकर बात करते रहे हैं और अपने पिता का सपोर्ट करने के बावजूद शाहरुख से दुश्मनी मोल लेने से बचने के चलते उनके बारे में पब्लिकली कोई भी आलोचनात्मक टिप्पणी नहीं कर रहे हैं.

मगर हाल ही में उन्होंने चतुराई का परिचय देकर बिना बोले ही यह बोल दिया कि इस क्लैश में शाहरुख की ही गलती है और उनके पिता राकेश रोशन की सलाह मानकर रईस को किसी और डेट पर रिलीज नहीं कर शाहरुख ने सही नहीं किया है.

हुआ ये कि कुछ दिन पहले सलमान खान ने करण-अर्जुन के निर्माण के दौरान खिंची एक तस्वीर ट्विटर पर पोस्ट की जिसमें वे, शाहरुख और रितिक साथ खड़े नजर आ रहे थे. जब किसी जिज्ञासु ने रितिक से इस तस्वीर पर टिप्पणी करने को कहा तो रितिक ने तपाक से कहा कि उन्हें वो दिन बेहद अच्छे से याद है जब यह तस्वीर ली गई. उस दिन शाहरुख और सलमान नाराज थे क्योंकि जिस जगह शूटिंग हो रही थी वह जगह शाहरुख को पसंद नहीं थी और दोनों यह चर्चा कर मायूस हो रहे थे कि इस लोकेशन की वजह से यह सीन स्क्रीन पर बहुत बुरा दिखने वाला है. लेकिन कंप्लीट होने के बाद जब शाहरुख ने फिल्म देखी तो इतने खुश हुए कि राकेश रोशन को गले लगा लिया और कहा कि उस दिन मैं गलत था और आप सही!

यानी कि, रितिक रोशन ने इशारों-इशारों में शाहरुख से कह दिया है कि जिस तरह 22 साल पहले उनके पिता सही थे, आज भी वे ही सही हैं. और उनकी बात नहीं मानने की वजह से शाहरुख को इस बार रईस से नुकसान होना लगभग तय है. शायद ऐसी ही बातों को मीठी छुरी चलाना कहा जाता होगा.

कटियाबाज रति अग्निहोत्री!

बिजली की चोरी करने को छोटे शहरों में कटियाबाजी भी कहते हैं और कानपुर के कटियाबाजों, अर्थात् बिजली चुराने वालों पर बनी एक डॉक्यूमेंट्री ‘कटियाबाज’ ने ऐसी ही चोरियों का विवरण हमें दो-तीन साल पहले दिखाया भी था. बड़े शहरों में भी कटियाबाज भारी तादाद में मिलते हैं मगर वे लंगर डालकर बिजली चोरी करने के बजाय सॉफिस्टिकेटिड तरीके अपनाते हैं, इसीलिए उनपर कोई डॉक्यूमेंट्री नहीं बनाता! लेकिन अगर कोई फिल्म कलाकार कटियाबाजी करे, और वो भी शहर मुंबई में, तो डॉक्यूमेंट्री बनने से पहले खबर अवश्य बन जाती है!

‘एक दूजे के लिए’ की नायिका रति अग्निहोत्री ने हाल ही में कटियाबाजी की हदें पारकर 48 लाख से ऊपर की बिजली चोरी कर डाली! उन्होंने अपने पति अनिल वीरवानी संग अप्रैल 2013 से लेकर 2017 तक पौने दो लाख यूनिट बिजली का उपयोग बिना इसके पैसे भरे किया और रात-दिन बेधड़क एसी चलाए. मुंबई के वर्ली इलाके के बेहद महंगे स्टर्लिंग सी फेस अपार्टमेंट्स में रहने वाली रति ने यह कारनामा एक सीनियर कटियाबाज की मदद से अंजाम दिया जिसने उनके घर पर लगे बिजली के मीटर में ऐसी छेड़छाड़ की कि मुंबई के बिजली विभाग को तकरीबन चार साल तक उनकी इस कारस्तानी का पता ही नहीं चल सका. और अब जब चला है तो रति और पति (उनके) के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है, फिलहाल मामले की तफ्तीश जारी है.


‘अमेरिकी मर्दों की तुलना में भारतीय पुरुष महिलाओं की ज्यादा इज्जत करते हैं. महिलाओं को वे बेहद सम्मानित तरीके से प्रपोज करते हैं जबकि वेस्ट में तो ‘जान न पहचान तू मेरा मेहमान’ वाला मामला है, और मैं इन सब मामलों में उनके जैसी फॉरवर्ड बिलकुल नहीं हूं.’

— प्रियंका चोपड़ा

फ्लैशबैक : जब कवि प्रदीप ने बैजू बावरा के गीत लिखने से मना कर दिया और इसके चलते फिल्मी दुनिया को एक नया गीतकार मिला

बैजू बावरा (1952) को हमारे हिंदी सिनेमा में मील का पत्थर कहा जाता है. इस फिल्म ने न सिर्फ शास्त्रीय संगीत को मुख्यधारा के हिंदी सिनेमा में हमेशा के लिए स्थापित किया बल्कि फिल्म के संगीतकार नौशाद को भी उनके जीवन का इकलौता फिल्मफेयर अवॉर्ड दिलाया. फिल्म के नायक, नए-नवेले भारत भूषण को स्टार बना दिया और ‘बेबी मीना’ के नाम से पहचानी जाने वालीं मीना कुमारी को बतौर नायिका मशहूर कर दिया. अभी तक फिल्मों में छोटे-मोटे रोल करने को मजबूर मीना कुमारी की झोली में यह फिल्म आकर गिरी भी इसलिए, क्योंकि निर्देशक विजय भट्ट की पहली पसंद नरगिस को उस समय राज कपूर आरके बैनर के बाहर काम करने की इजाजत नहीं दे रहे थे.

अपने संगीत में लोक-गीतों और वेस्टर्न संगीत को शामिल कर चुके नौशाद ने तब पहली बार किसी फिल्म के लिए पूरी तरह से शास्त्रीय संगीत में रचा-बचा संगीत दिया और फिल्म के बनते वक्त इंडस्ट्री के कई जानकारों ने निर्देशक और संगीतकार को टोका कि यह संगीत पसंद नहीं किया जाएगा क्योंकि इतना सारा क्लासिकल म्यूजिक आम जनता को समझ ही नहीं आएगा. लेकिन दर्शकों ने बैजू बावरा के संगीत को हाथों-हाथ लिया और फिल्म की सफलता के बाद हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत हमेशा के लिए नौशाद के संगीत का हिस्सा बन गया.

बैजू बावरा के ‘मन तड़पत हरि दर्शन को आज’ और ‘तू गंगा की मौज’ जैसे कालजयी गीत सहित तमाम गीत लिखने का श्रेय शकील बदायूंनी को जाता है. उनके शब्दों ने ही बैजू बावरा को वो किनारा दिया था जहां अपने संगीत के साथ बहते हुए नौशाद पहुंचना चाहते थे. लेकिन बैजू बावरा के निर्देशक विजय भट्ट चाहते थे कि उनकी इस फिल्म का किनारा कवि प्रदीप बनें, और भजनों व व्याकुलता में डूबे गीतों को हिंदी की वो शुद्धता दें, जो उस जमाने में फिल्मी गीतों को सिर्फ कवि प्रदीप ही दे सकते थे.

जिस दिन इस फिल्म के सिलसिले में कवि प्रदीप पहली बार नौशाद से मिलने पहुंचे, अपनी व्यस्तता के चलते नौशाद ने उन्हें कई घंटों का इंतजार करा दिया. गुस्से में आकर कवि प्रदीप बिना उनसे मिले ही वापस लौट आए और फिल्म के लिए निर्देशक विजय भट्ट को दूसरा गीतकार तलाशना पड़ा. तलाश नए गीतकार शकील बदायूंनी पर खत्म हुई जिन्होंने बैजू बावरा के गीतों के लिए न सिर्फ अपनी पसंदीदा भाषा उर्दू का साथ छोड़ा बल्कि शुद्ध हिंदी की टेक लेकर इतने मर्मस्पर्शी गीत लिखे कि तानसेन को चुनौती देने वाले एक बावरे बैजू का संगीत हमेशा के लिए अमर हो गया.