सलमान खान जितने चर्चित अभिनेता हैं, लगभग उतने ही विवादित भी हैं. कभी वे आपराधिक मामलों में फंसने के चलते विवादों में घिरते हैं तो कभी उन मामलों से बच निकलने के चलते विवादित होते हैं. बीती 18 जनवरी को भी वे ऐसे ही एक आपराधिक मामले से दोषमुक्त होने के चलते इन दिनों विवादों में हैं. इस बार वे जिस मामले में दोषमुक्त हुए हैं, उसमें उन पर अवैध हथियार रखने और शिकार के लिए उन हथियारों का प्रयोग करने के आरोप थे.

बीती 18 जनवरी को जोधपुर की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत ने उन्हें इन आरोपों से दोषमुक्त कर दिया है. सीजेएम दलपतसिंह राजपुरोहित ने इसके लिए कुल 102 पन्नों का फैसला लिखवाया. इस फैसले को पढ़ने पर कई ऐसे तथ्य सामने आते हैं जिनसे समझा जा सकता है कि कैसे सलमान खान हर बार आपराधिक मुकदमों से आसानी से बच निकलते हैं. इसे समझने की शुरुआत उन आरोपों से करते हैं जो अभियोजन पक्ष ने सलमान खान पर इस मामले में लगाए थे.

इस फैसले के पेज नंबर दो पर अभियोजन पक्ष के आरोपों का जिक्र मिलता है. इसके अनुसार 2 अक्टूबर, 1998 के दिन जोधपुर के कांकाणी गांव के रहने वाले दो लोगों ने एक लिखित शिकायत वन विभाग के कर्मचारियों को दी थी. छोगाराम और पूनमचंद नाम के इन ग्रामीणों ने शिकायत पत्र में लिखा था कि 1-2 अक्टूबर की रात सलमान खान और उनके साथियों ने दो कृष्ण मृगों (काले हिरणों) का शिकार किया और गांव वालों के जागने पर वे अपने साथियों के साथ ही वहां से भाग गए.

वन विभाग के अधिकारियों को जब यह शिकायत पत्र मिला तो उन्होंने कुछ प्राथमिक जांच की और फिर थाना लूणी के थानाधिकारी को इस संबंध में एक लिखित रिपोर्ट भेजी. इसी रिपोर्ट के आधार पर सलमान खान के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज हुआ और जांच शुरू हुई. इस जांच के दौरान सामने आया कि सलमान खान ने अपने लाइसेंसी हथियार कुछ साथियों के हाथ वापस मुंबई भिजवा दिए थे. अधिकारियों के कहने पर ये हथियार मुंबई से वापस जोधपुर मंगवाए गए. इस दौरान सलमान खान जोधपुर पुलिस की हिरासत में ही थे.

सलमान खान ने रिवाल्वर गुम होने की जानकारी सबसे पहले पुलिस निरीक्षक सत्यमणि तिवारी को दी जो फिल्म की यूनिट के साथ ही पिछले कुछ दिनों से ड्यूटी पर थे  

मुंबई से वापस जोधपुर लाए गए इन हथियारों में एक .22 बोर की राइफल थी और एक .32 बोर की रिवाल्वर. इन दोनों हथियारों का लाइसेंस सलमान खान के नाम पर ही था लेकिन उसे रिन्यू नहीं किया गया था जिसकी अंतिम तिथि 22 सितंबर 1998 को ही समाप्त हो चुकी थी. सलमान खान जब जोधपुर आए थे तो ये हथियार उनके पास थे और शिकार का मामला चर्चित होने के बाद उन्होंने इन्हें वापस मुंबई भिजवा दिया था, यह साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष ने एक किस्से का जिक्र आरोपपत्र में किया है.

आरोपपत्र के अनुसार शिकार की घटना से कुछ दिन पहले सलमान खान की रिवाल्वर गुम हो गई थी. यह 29 सितंबर की बात है. उस दिन सलमान खान लूणी हवेली में फिल्म की शूटिंग कर रहे थे. सलमान खान ने रिवाल्वर गुम होने की जानकारी सबसे पहले पुलिस निरीक्षक सत्यमणि तिवारी को दी जो फिल्म की यूनिट के साथ ही पिछले कुछ दिनों से ड्यूटी पर थे. सत्यमणि तिवारी ने इस बारे में जोधपुर पुलिस अधीक्षक को बताया जिन्होंने उन्हें शिकायत दर्ज करने के आदेश दिए. इसके बाद सत्यमणि तिवारी ने सलमान खान से उनके हथियारों के लाइसेंस मांगे और सलमान के असिस्टेंट दिनेश गावरे को साथ लेकर वे शिकायत दर्ज करने के लिए लूणी हवेली से जोधपुर के लिए रवाना हो गए.

आरोपपत्र में आगे लिखा है कि रिवाल्वर गुम हो जाने संबंधी मुकदमा दर्ज करने से पहले सत्यमणि तिवारी ने तसल्ली के लिए उम्मेद भवन के कमरा नंबर 508 की तलाशी लेना उचित समझा. इसी कमरे में सलमान खान ठहरे थे. यह तलाशी होटल के मेनेजर, सिक्यूरिटी ऑफिसर और रूम असिस्टेंट के सामने ली गई. तलाशी के दौरान इस कमरे से एक राइफल और एक एयरगन मिली. रिवाल्वर इस कमरे में नहीं थी लेकिन सत्यमणि तिवारी जब कमरे से ही सटे बाथरूम में पहुंचे तो वहां उन्हें एक बेडकवर रखा दिखा जिसे खोलने पर उसके अंदर से रिवाल्वर निकल आई.

इस घटना को आधार बनाते हुए पुलिस ने आरोपपत्र में लिखा कि सलमान खान हथियार लेकर जोधपुर आए थे. सलमान खान ने इन हथियारों का प्रयोग करते हुए 1-2 अक्टूबर की रात काले हिरन का शिकार किया था, यह साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष ने कुल 20 लोगों को गवाह बनाया और कुल 61 दस्तावेज बतौर साक्ष्य अदालत में जमा किये. लेकिन जब इस मामले में जिरह शुरू हुई तो अभियोजन के आरोप पल भर को भी ठहर नहीं पाए और पूरा मामला सलमान खान के पक्ष में चला गया. ऐसा क्यों हुआ, इसे उन भारी कमियों और लापरवाहियों से समझा जा सकता है जो अभियोजन ने जांच और जिरह के दौरान की थी.

जिन तीन लोगों के सामने उन्होंने सलमान खान के कमरे की तलाशी ली थी, उनमें से कोई भी अभियोजन की तरफ से गवाही के लिए पेश नहीं हुआ  

पुलिस का आरोप था कि सलमान खान ने शिकार के बाद हथियारों को अपने साथियों द्वारा मुंबई भिजवा दिया था. लेकिन वे साथी कौन थे, इस बारे में पुलिस ने कोई जांच ही नहीं की. वे साथी कभी पेश ही नहीं किये गए. साथ ही जिन ग्रामीणों को एफआईआर में घटना का प्रत्यक्षदर्शी बताया गया है, उन लोगों को कभी न्यायालय में पेश ही नहीं किया गया. ऐसे में अभियोजन की तरफ से सिर्फ सत्यमणि तिवारी ही एक मात्र ऐसे गवाह थे जिन्होंने यह गवाही दी कि जोधपुर में सलमान खान के पास ये हथियार थे और उन्होंने खुद इन हथियारों को देखा था. लेकिन सत्यमणि की गवाही भी न्यायालय में टिक नहीं सकी क्योंकि जिन तीन लोगों के सामने उन्होंने सलमान खान के कमरे की तलाशी ली थी, उनमें से कोई भी अभियोजन की तरफ से गवाही के लिए पेश नहीं हुआ. उल्टा उन तीन में से एक होटल कर्मचारी सलमान खान की तरफ से ही गवाही देने के लिए न्यायालय पहुंचा और उसने अदालत को बताया कि सलमान खान के कमरे की कभी कोई तलाशी ही नहीं हुई थी.

सत्यमणि तिवारी की गवाही को न्यायालय ने इसलिए भी संदेह से देखा क्योंकि उनकी गवाही के अनुसार उन्होंने 29 सितंबर को सलमान खान के लाइसेंस को देखा था. यानी उन्हें तभी यह भी मालूम चल गया था कि सलमान खान के हथियारों के लाइसेंस की वैधता 22 सितंबर को समाप्त हो चुकी है. ऐसी स्थिति में एक पुलिस अधिकारी होने के नाते उन्हें सलमान खान के खिलाफ तभी कार्रवाई करनी चाहिए थी. चूंकि उन्होंने कोई भी लिखित कार्रवाई नहीं की इसलिए न्यायालय ने माना कि उनकी गवाही को संदेह से परे नहीं माना जा सकता.

अभियोजन ने यह भी आरोप लगाया था कि सलमान खान ने इंडियन एयरलाइन्स के जरिये हथियार मुंबई भिजवाए थे. लेकिन यह साबित करने के लिए अभियोजन ने न तो कोई टिकट और न ही एयरलाइन्स से जुड़ा कोई अन्य दस्तावेज न्यायालय में पेश किया. साथ ही पूरी जांच के दौरान जांचकर्ताओं ने न तो कभी मौके का दौरा किया और न ही कभी घटनास्थल के निरीक्षण से जुडी कोई रिपोर्ट बनाकर न्यायालय में पेश की. मौके से किसी भी तरह के बन्दूक के छर्रे या गोलियां कभी बरामद ही नहीं की गई. इसके अलावा जिन 20 गवाहों को अभियोजन की ओर से न्यायालय में पेश किया गया, उनके बयानों को न्यायालय ने अधूरा और विरोधाभासी मानते हुए विश्वसनीय नहीं माना.

सिर्फ अभियोजन की ये बड़ी गलतियां ही सलमान खान के पक्ष में नहीं गई बल्कि उनकी छोटी-छोटी गलतियों का भी पूरा फायदा सलमान खान को मिला. उदाहरण के लिए, सलमान खान के खिलाफ ‘अभियोजन स्वीकृति’ जारी करते हुए जब जिलाधिकारी ने सलमान के नाम और पते के साथ ही थाना लूणी, जिला जोधपुर भी लिखा दिया, तो न्यायालय ने मान लिया कि यह स्वीकृति तो किसी जोधपुर निवासी सलमान खान के खिलाफ जारी की गई है. इस तरह से सलमान खान के बच निकलने के जो रास्ते अभियोजन नहीं खोल पाया था, न्यायालय ने स्वयं ही खोल दिए.