अमेरिका के नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपना एक और एक चुनावी वादा पूरा कर दिया है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक सोमवार को उन्होंने अमेरिका को ट्रांस पैसिफिक भागीदारी (टीपीपी) समझौते से अलग करने के कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए. इसे पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा का समर्थन हासिल था. लेकिन, अमेरिकी संसद की मंजूरी नहीं मिली थी. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वे टीपीपी में शामिल देशों के साथ अलग-अलग व्यापार समझौता करेंगे जिसमें अगर कोई गलत व्यवहार करता है तो अमेरिका के पास 30 दिन के भीतर समझौता तोड़ने का मौका होगा. उन्होंने अपने इस फैसले को अमेरिकी निर्माण उद्योग और अमेरिकी श्रमिकों के हित में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम बताया.

दुनिया का यह सबसे बड़ा निर्माण व्यापार समझौता दो फरवरी 2016 को न्यूजीलैंड के प्रमुख शहर ऑकलैंड में हुआ था. इसमें दुनिया की 40 फीसदी अर्थव्यवस्था पर कब्जा रखने वाले 12 देश शामिल थे. इसका मकसद प्रशांत महासागर के किनारे बसे वाले देशों में निवेश की सहूलियतें बढ़ाना और कई तरह के शुल्कों को खत्म करना था. चीन को इससे बाहर रखा गया था.

2016 में राष्ट्रपति चुनाव के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते को अमेरिकियों का रोजगार छीनने वाली आपदा बताया था. इसके बाद जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे का बयान आया था कि अमेरिका की भागीदारी के बगैर इस समझौते का कोई मतलब नहीं रहेगा. हालांकि, अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव का परिणाम आने के बाद शिंजो अबे ने डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की थी और उन्हें भरोसा करने लायक नेता बताया था. जापान प्रशांत महासागर में चीन के बढ़ते प्रभाव का सामना करने के लिए इस समझौते को जरूरी मानता है.

वैसे डोनाल्ड ट्रंप का यह दूसरा चुनावी वादा है जिसे उन्होंने पूरा किया है. इससे पहले उन्होंने राष्ट्रपति बनने के कुछ घंटे के भीतर लगभग दो करोड़ अमेरिकियों तक बीमा लाभ पहुंचाने वाले एफोर्डेबल केयर एक्ट (ओबामाकेयर) को वापस लेने का फैसला किया था. जानकार मान रहे हैं कि उनका अगला कदम कांग्रेस सदस्यों के कार्यकाल की संख्या तय करने के लिए संविधान संशोधन और अवैध प्रवासियों को उनके देश वापस न भेजने की ओबामा की नीति में बदलाव हो सकता है.

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