प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते साल आठ नवंबर को नोटबंदी का एलान किया था. तब उन्होंने इसका मुख्य उद्देश्य यह बताया था कि सरकार इसके जरिए भ्रष्टाचार की काली कमाई को नेस्तनाबूद करना चाहती है. भ्रष्टाचारियों की कमर तोड़ना चाहती है. लेकिन भाजपा की ही सत्ता वाले मध्य प्रदेश में इस उद्देश्य की कमर टूटती दिख रही है. वह भी नोटबंदी लागू होने के महज दो महीने के भीतर ही.

नोटबंदी के दौरान 10 साल से चल रहे हवाला कारोबार का कच्चा-चिट्ठा सामने आया

नोटबंदी के दौरान 20-21 दिसंबर को आयकर विभाग की टीम ने मध्य प्रदेश के कटनी स्थित एक्सिस बैंक की शाखा पर छापा मारा था. यहां से जब्त दस्तावेजों की जांच के बाद 23 दिसंबर को 500 करोड़ रुपए के हवाला कारोबार का खुलासा हआ. यह कारोबार करीब 10 साल से चल रहा था और जुलाई 2016 से तो कटनी के एसपी (पुलिस अधीक्षक) गौरव तिवारी की निगरानी में पुलिस की एसआईटी (विशेष जांच टीम) इसकी जांच भी कर रही थी.

यहां तक मामला सामान्य किस्म का ही था. लेकिन मामले में पेंच आना शुरू हुआ, पांच जनवरी 2017 से. उस दिन एसआईटी ने स्थानीय खनन कारोबारी सतीश और मनीष सरावगी के यहां डाटा एंट्री ऑपरेटर के तौर पर काम करने वाले संदीप बर्मन को गिरफ्तार किया. यह इस केस में पहली गिरफ्तारी थी. संदीप से हुई पूछताछ के आधार पर पुलिस ने अगले ही दिन यानी छह जनवरी को सरावगी बंधुओं के अकाउंटेंट संजय तिवारी को पूछताछ के लिए थाने बुला लिया.

आंच राज्य सरकार के कद्दावर मंत्री संजय पाठक तक

बर्मन और तिवारी से पूछताछ के आधार पर एसपी गौरव तिवारी ने बताया, ‘सरावगी बंधुओं ने देश-विदेश में हवाला की रकम इधर से उधर करने के लिए एक्सिस बैंक में 45 से ज्यादा बोगस खाते खुलवाए. वह भी ऐसे लोगों के नाम पर, जिन्हें उनके बारे में पता तक नहीं था. इनमें रजनीश कुमार तिवारी नाम का एक खाताधारक तो ऐसा है जिसके पिता भीख मांगते हैं. ऐसे खाताधारकों के नाम पर 32 से ज्यादा फर्जी फर्में बनाई गईं. इन फर्मों के जरिए चोरी का कोयला, बॉक्साइट, डोलोमाइट बेचने का कारोबार किया गया.’

हालांकि एसपी से बड़ा धमाका किया संजय तिवारी की पत्नी पुष्पा ने. उन्होंने छह जनवरी को ही मीडिया के सामने आरोप लगाया कि उन्हें सतीश सरावगी धमका रहे हैं. उनका कहना था, ‘वे कह रहे हैं कि हम लोग संजय पाठक के लिए काम करते हैं. आयकर विभाग या पुलिस के सामने मुंह खोला तो चींटियों की तरह मसल दिए जाओगे.’ संजय पाठक मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार में सूक्ष्म एवं लघु उद्योग मंत्रालय में स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री हैं.

रातों-रात एसपी का तबादला

इस तरह मामला उलझना शुरू हुआ तो उलझता ही गया. छह जनवरी की रात ही कटनी पुलिस ने एक छोटे लोडिंग वाहन से 27 बोरी दस्तावेज बरामद किए. ये दस्तावेज सरावगी स्कूल (सरावगी बंधुओं द्वारा संचालित) से निकालकर कहीं नष्ट करने के लिए ले जाए जा रहे थे. इन दस्तावेजों की बरामदगी के बाद तो हड़कंप मच गया. लगा कि अब तक आरोप और बयानों की शक्ल में जो तथ्य सामने आए हैं उन्हें मजबूत आधार मिल जाएगा. भ्रष्टाचार से त्रस्त आम जनता के लिए यह उम्मीद थी, तो सत्ता संस्थानों की ऊंचाई पर बैठे लोगों के लिए आशंका. शायद इसीलिए हवाला कांड में अब तक हुई पुलिस जांच की डायरी सात जनवरी को आनन-फानन में भोपाल तलब कर ली गई. दो दिन तक इसका राजधानी में अध्ययन किया गया और नौ जनवरी को इसे पुलिस मुख्यालय से रिलीज कर कटनी वापस भेज दिया गया. इसके साथ ही एसपी गौरव तिवारी को रिलीव कर कटनी से छिंदवाड़ा भेज दिया गया.

विरोध

बिना कोई कारण बताए एसपी गौरव तिवारी के ट्रांसफर ने जैसे आग में घी का काम किया. कटनी से लेकर भोपाल तक जनता सड़कों पर उतर आई. कटनी में शहर बंद रखा गया. ट्रेनें रोकी गईं. महिलाएं घरों से बाहर आकर सरकार के खिलाफ नारे बुलंद करने लगीं. उन्होंने सरकार के कर्ता-धर्ताओं को चुनौती दे डाली कि ‘हवाला के आरोपियों को गिरफ्तार करो, या चूड़ियां पहन लो.’

गौरव तिवारी के तबादले का कटनी के लोगों ने जमकर विरोध किया
गौरव तिवारी के तबादले का कटनी के लोगों ने जमकर विरोध किया

लेकिन किसी के कान में जूं नहीं रेंगी. उल्टा पुलिस ने लाठी-डंडे बरसाकर प्रदर्शनकारियों को खदेड़ दिया. भोपाल में विपक्षी कांग्रेस ने प्रदर्शन किया तो किसी की पत्थरबाजी की आड़ लेकर पुलिस ने पार्टी कार्यकर्ताओं को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में घुस-घुसकर पीटा. अन्ना हजारे के साथ आंदोलन में शामिल रहे और आईआईटी रुड़की से मैकेनिकल इंजीनियरिंग करने वाले राकेश पटेल को पुलिस ने गिरफ्तार किया तो उन्होंने जेल में ही भूख हड़ताल शुरू कर दी. वे मंत्री संजय पाठक के इस्तीफे और एसपी गौरव तिवारी का तबादला रद्द करने की मांग कर रहे थे.

लेकिन अब तक न हवाला कारोबारियों की गिरफ्तारी, न मंत्री का इस्तीफा

पूरे प्रदेश में प्रदर्शन हुए. मांग हर जगह से सिर्फ वही. एसपी गौरव तिवारी का कटनी से किया गया तबादला रद्द हो, संजय पाठक को मंत्री पद से हटाया जाए और हवाला कारोबारी सरावगी बंधुओं को गिरफ्तार किया जाए. लेकिन अब तक न गौरव तिवारी का तबादला रद्द हुआ, न ही संजय पाठक का मंत्री पद गया. उल्टा वे तो यह सफाई देते फिर रहे हैं कि हवाला कारोबार से उनका कोई लेना-देना नहीं है और किसी के कहने पर महिला (पुष्पा तिवारी) ने उनका नाम लिया है. ऐसे ही गौरव तिवारी के तबादले पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान ने सागर में प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के दौरान दलील दी, ‘तबादला एक-दो साल में हो, यह जरूरी नहीं. सरकार चाहे तो चार महीने में भी किसी अधिकारी-कर्मचारी का तबादला कर सकती है.’ जहां तक सरावगी बंधुओं की गिरफ्तारी का मसला है, तो उनका मामला अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और आयकर विभाग की जांच के दायरे में है. जांचें चल रही है, दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं.

सरकार के लिए 1987-90 की एक नजीर

एसपी गौरव तिवारी को कटनी में मिले जनसमर्थन ने प्रदेश के लोगों को 1987 की याद दिला दी. उस वक्त आईपीएस आशा गोपालन जबलपुर की एसपी हुआ करती थीं. बताया जाता है कि उन्होंने भी शहर में अपराधियों-भ्रष्टाचारियों की नाक में इस हद तक दम कर दिया था कि सत्ता के गलियारों में बैठे उनके आका परेशान हो गए. नतीजा यह हुआ कि सात महीने के भीतर (गौरव को छह महीने में ही कटनी से हटा दिया गया है) ही आशा को जबलपुर से ट्रांसफर कर सागर भेज दिया गया. उनके तबादले की सूचना मिलते ही जनता सड़कों पर उतर आई. तब की कांग्रेस सरकार से एसपी का तबादला रद्द करने की मांग की गई. मगर सरकार तब भी आखिर ‘सरकार’ ही थी. कइ मानते हैं कि तबादला आदेश नहीं बदला, सो जनता ने तीन साल (1990 में) बाद हुए चुनाव में सरकार को ही बदल दिया. जानकारों के एक एक वर्ग का मानना है कि मौजूदा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को यह बानगी खासतौर पर याद रखनी चाहिए और यह भी मध्य प्रदेश में डेढ़ साल बाद ही चुनाव होने वाले हैं.