कैलाश विजयवर्गीय ने हाल ही में जो ट्वीट किया है वह कई लोगों को उनकी फिल्मों पर राजनीति करने की कोशिश लग सकता है. इस ट्वीट में उन्होंने अपने समर्थकों से अप्रत्यक्ष तौर पर शाहरुख खान की फिल्म रईस के बजाय ऋतिक रोशन की काबिल का साथ देने के लिए कहा है. ऐसा पहली बार हुआ है जब भाजपा में महासचिव स्तर का कोई नेता इस तरह से दो फिल्मों पर टिप्पणी कर रहा है.

कैलाश विजयवर्गीय की शाहरुख खान पर एकतरफा फायरिंग क्या महज एक संयोग है, एक बड़बोले नेता का पब्लिसिटी स्टंट या फिर एक सोची-समझी रणनीति. भारतीय जनता पार्टी में सोशल मीडिया का काम देखने वाले एक नेता के मुताबिक सोशल मीडिया इस वक्त बंटा हुआ है और उस पर भाजपा समर्थक भारी संख्या में हैं. ऐसे में कैलाश विजयवर्गीय सरीखे नेता अपनी फेसबुक पोस्ट और ट्वीट्स से पार्टी की वह लाइन बताने की कोशिश करते हैं जो आधिकारिक नहीं होती. फिर भाजपा के कट्टर समर्थक उसके आधार पर सोशल मीडिया पर कैंपेन चलाते हैं. इसकी पुष्टि इस बात से भी होती है कि कैलाश विजयवर्गीय जैसे नेताओं के बयान को भाजपा औपचारिक तौर पर भले नहीं अपनाती हो लेकिन वह कभी उनका मुंह भी बंद नहीं करवाती है.

शाहरुख खान भाजपा समर्थकों के इस तरह के अभियानों का पहले भी शिकार हो चुके हैं. उनकी पिछली फिल्म ‘दिलवाले’ का कारोबार ठंडा रहा. उन्होंने इसके बारे में एक इंटरव्यू में कहा कि अहिष्णुता पर दिए उनके बयान का खामियाज़ा उनकी फिल्म को उठाना पड़ा. इस बार अपनी नई फिल्म ‘रईस’ की रिलीज़ से पहले शाहरुख ने पूरी सावधानी बरती - उन्होंने फिल्म की पाकिस्तानी हीरोइन माहिरा खान को प्रमोशन के लिए भारत नहीं बुलाया और अपने आप ही राज ठाकरे से मुलाकात कर वादा किया कि वे आगे से कभी किसी पाकिस्तानी कलाकार के साथ काम नहीं करेंगे. लेकिन अचानक फिर से उनकी फिल्म रईस सोशल मीडिया पर भाजपा समर्थक सिपाहियों के निशाने पर आ गई.

फिल्म उद्योग में दोस्ती रखने वाले मुंबई के एक भाजपा नेता के मुताबिक सलमान और आमिर खान के बारे में भाजपा में अलग-अलग राय हैं. लेकिन शाहरुख खान को लेकर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की सोच एकदम साफ है. भाजपा में ज्यादातर नेता उन्हें राहुल और प्रियंका गांधी वाड्रा का बेहद करीबी मानते हैं. कांग्रेस के एक राज्यसभा सांसद गपशप के दौरान बताते हैं कि राहुल और प्रियंका गांधी ने शाहरुख खान को राज्यसभा की सदस्यता ऑफर की थी. लेकिन उन्होंने इस प्रस्ताव को शालीनता के साथ ठुकरा दिया था. वे बताते हैं कि गांधी परिवार से उनके संबंध इस तरह के हैं कि वे जब चाहें तब उसके किसी भी सदस्य से सीधे बातचीत कर सकते हैं. लेकिन भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से उनके किसी भी तरह के रिश्ते न के बराबर भी नहीं हैं.

कहा जाता है कि आमिर खान इस मामले में शाहरुख से ज्यादा समझदार निकले. असहिष्णुता पर उनका बयान शाहरुख खान से ज्यादा तीखा था. लेकिन जब आमिर खान का विरोध हुआ, उनकी फिल्म के पोस्टर जले, जिन कंपनियों के वे ब्रांड एंबेस्डर थे उन कंपनियों ने उन्हें दिखाने से इंकार कर दिया तो उन्होंने संबंध बनाने की एक नई शुरुआत की. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस के एक करीबी नेता के मुताबिक इसके लिए आमिर खान ने सीधे फड़णवीस से संपर्क किया. वे न केवल किसानों से जुड़े सरकार के अभियान में बढ़-चढ़कर शामिल हुए बल्कि फड़णवीस के बुलावे पर हर सरकारी कार्यक्रम में भी शामिल होते रहे. इसके अलावा नोटबंदी के दौरान आमिर बिलकुल चुप्पी साधे रहे और दंगल के प्रमोशन के वक्त उन्होंने प्रधानमंत्री की योजना बेटी बचाओ बेटी पढाओ का जमकर प्रचार किया. बताया जाता है कि आमिर की इन कोशिशों से अब भाजपा उनके बारे में कम से कम नकारात्मक सोच नहीं रखती है.

इस मामले में सबसे ज्यादा भाग्यशाली सलमान खान हैं. उनके बारे में भाजपा नेताओं की राय काफी सकारात्मक है. इसकी वजह सलमान के पिता सलीम खान हैं. मुंबई फिल्म उद्योग के संपर्क में रहने वाले एक भाजपा नेता के मुताबिक भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने सलीम खान को पार्टी में शामिल करने की कोशिश की थी. हालांकि औपचारिक तौर पर उन्होंने ऐसा करने से इंकार कर दिया, लेकिन जरूरत पड़ने पर सलीम खान भाजपा और खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पक्ष में कई बयान देते रहे. सलमान के मामले में रही-सही कसर कांग्रेस ने पूरी कर दी. जब वे आर्म्स एक्ट वाले मामले में बरी हुए तो कांग्रेस के कुछ नेताओं ने इस पर सवाल खड़े कर दिए. सलमान खान का विरोध कांग्रेस ने किया तो भाजपा समर्थकों को लगा कि वे भाजपा के करीब हैं. हालांकि सलमान को जानने वाले मुंबई के एक पत्रकार बताते हैं कि शाहरुख और आमिर तो फिर भी कुछ सियासी बातें कर लेते हैं, लेकिन सलमान के मुंह से कभी सियासत की बात आज तक किसी ने नहीं सुनी. वो यारों के यार हैं, अगर किसी दिन कांग्रेस के किसी जिगरी दोस्त ने प्रचार के लिए बुलाया तो वो वहां भी चले जाएंगे.

भाजपा के एक सूत्र के मुताबिक भाजपा नेतृत्व को कैलाश विजयवर्गीय के ट्वीट से कोई परेशानी नहीं है. वह बस इस बात से थोड़ी नाराज़ है कि विजयवर्गीय ने शाहरुख खान के खिलाफ अभियान चलाने के लिए प्रधानमंत्री की तस्वीर का इस्तेमाल किया. इस ट्वीट में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर को राहुल गांधी की तस्वीर के साथ लगाया है.