भारत में सुपर कंप्यूटर के विकास में अहम भूमिका निभाने वाले कंप्यूटर वैज्ञानिक डॉ विजय भटकर को नालंदा विश्वविद्यालय का नया कुलपति बनाया गया है. वे इस विश्वविद्यालय के तीसरे कुलपति होंगे. खबरों के मुताबिक शुक्रवार को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने डॉ भटकर की नियुक्ति को मंजूरी दे दी. उनका कार्यकाल तीन साल का होगा. नालंदा विश्वविद्यालय के गवर्निंग बोर्ड ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से डॉ भटकर के नाम की सिफारिश की थी. कुछ खबरों में यह भी कहा गया है कि राष्ट्रपति मुखर्जी के पास केवल डॉ भटकर का ही नाम भेजा गया था.

डॉ विजय भटकर दिल्ली स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष हैं. इसके अलावा वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के संगठन विज्ञान भारती के प्रमुख भी हैं जो स्वदेशी विज्ञान को बढ़ावा देने से जुड़ा है. डॉ भटकर की निजी वेबसाइट के मुताबिक वे 1987 में पुणे स्थित सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सी-डैक) में सुपर-कंप्यूटर बनाने की परियोजना का नेतृत्व कर चुके हैं. इसके तहत देश के पहले सुपर कंप्यूटर परम 8000 और परम 10000 बनाए गए थे. उन्हें 2000 में पद्मश्री और 2015 में पद्मभूषण मिल चुका है.

नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति का पद पिछले दो महीने से खाली पड़ा था. पिछले साल 25 नवंबर को सिंगापुर के पूर्व विदेश मंत्री जॉर्ज यो ने इस शिकायत के साथ कुलपति पद से इस्तीफा दे दिया था कि सरकार विश्वविद्यालय की स्वायत्ता को प्रभावित कर रही है. उन्होंने यह भी कहा था कि सरकार ने विश्वविद्यालय के गवर्निंग बोर्ड को भंग करने और नया बोर्ड बनाने के बारे में उनकी राय नहीं ली है. जॉर्ज यो ने तीन साल के वित्तीय योगदान के आधार पर पूर्वी एशियाई देशों को गवर्निंग बोर्ड का सदस्य बनाने वाले प्रावधान को हटाने पर भी नाराजगी जताई थी.

इससे पहले 2015 में चर्चित अर्थशास्त्री और नालंदा विश्वविद्यालय के पहले कुलपति अमर्त्य सेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार की खुली आलोचना करते हुए यह पद छोड़ दिया था. हालांकि, विश्वविद्यालय के मेंटोर ग्रुप का सदस्य होने के नाते वे पिछले साल तक गवर्निंग बोर्ड में शामिल थे. लेकिन, पिछले साल 21 नवंबर को गठित नए गवर्निंग बोर्ड में केंद्र सरकार ने उन्हें जगह नहीं दी थी.