भारत के दूरसंचार बाजार में एक बड़ी हलचल होने वाली है. वोडाफोन इंडिया और आइडिया सेल्युलर के बीच विलय की बात चल रही है. इससे जुड़ी अटकलों के मीडिया में आने के बाद ब्रिटिश टेलिकॉम कंपनी वोडाफोन समूह ने भी अब इसकी पुष्टि कर दी है. कंपनी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि उसकी भारतीय इकाई वोडाफोन इंडिया (इंडस टॉवर में 42 फीसदी हिस्सेदारी को छोड़कर) और आइडिया के बीच सभी शेयरों के विलय की बातचीत चल रही है. आइडिया आदित्य बिरला समूह की कंपनी है.
हालांकि, वोडाफोन के बयान में यह नहीं बताया गया कि दोनों कंपनियों के बीच कब से बातचीत चल रही है. लेकिन, यह जरूर कहा गया है कि अभी तक दोनों कंपनियां इस सौदे की शर्तों और समय को लेकर किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई हैं.
अगर भारत की इन दोनों बड़ी कंपनियों का विलय हो जाता है तो सुनील मित्तल की कंपनी भारती एयरटेल का पहला स्थान छिन जाएगा. द इकनॉमिक टाइम्स के मुताबिक इस विलय से बनने वाली कंपनी के उपभोक्ताओं की संख्या 39 करोड़ होगी. एयरटेल के 27 करोड़ और रिलायंस जियो के पास 7.2 करोड़ उपभोक्ता हैं. इसके अलावा राजस्व के मामले में भी नई कंपनी की हिस्सेदारी 40 फीसदी हो जाएगी, जबकि एयरटेल की 32 फीसदी है.
जानकारों का कहना है कि इस समझौते से 26 अरब डॉलर के भारतीय टेलिकॉम उद्योग में मुफ्त डेटा और कॉल के साथ रिलायंस जियो की तूफानी शुरुआत के बाद बनी स्थितियों में बड़ा बदलाव आ सकता है. अभी जियो पहले स्थान के लिए एयरटेल को चुनौती देने वाली कंपनी मानी जा रही है. लेकिन, वोडाफोन और आइडिया के विलय के बाद बनी कंपनी को उसके पहले स्थान से हिला पाना रिलायंस जियो के लिए लगभग असंभव हो जाएगा.
इसके बाद सबकी निगाहें रिलायंस जियो पर रहने वाली हैं कि वह अपनी मौजूदा आक्रामक रणनीति को कब तक जारी रखती है. एक आकलन यह भी है कि अगर रिलायंस जियो मुफ्त सेवा देने वाली मौजूदा रणनीति को आगे भी जारी रखती है तो इसका ज्यादा नुकसान विलय के बाद बनने वाली नई कंपनी को होने के बजाए एयरटेल को ही भुगतना पड़ेगा जो पहले से ही राजस्व के मामले में मात खा रही है.
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