पंजाब विधानसभा चुनाव में तमाम राजनीतिक पार्टियों ने सत्ता में आने पर साफ-सुथरी सरकार देने और कानून व्यवस्था में सुधार का वादा किया है. लेकिन चुनावों पर नजर रखने वाली संस्था एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) द्वारा जारी रिपोर्ट पार्टियों के इस दावे पर सीधे-सीधे सवाल खड़े करती दिखती है. इसके मुताबिक चुनावी मैदान में उतरे 1145 उम्मीदवारों में से 100 (नौ फीसदी) के खिलाफ आपराधिक मामले और 77 (सात फीसदी) उम्मीदवारों के खिलाफ गम्भीर अपराध के मामले दर्ज हैं. चार उम्मीदवारों के खिलाफ हत्या के मामले चल रहे हैं, जबकि 11 के खिलाफ हत्या की कोशिश करने के आरोप हैं.

दागी नेताओं मौका देने में कोई पार्टी पीछे नहीं

कांग्रेस के उम्मीदवारों में सबसे ज्यादा 12 फीसदी के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं. इसके बाद सत्ताधारी अकाली दल और आम आदमी पार्टी (आप) में यह आंकड़ा 11 फीसदी है. भाजपा और अपना पंजाब पार्टी के नौ फीसदी उम्मीदवार इस श्रेणी में आते हैं. एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक कुल 117 सीटों में छह ऐसी हैं, जहां तीन या तीन से अधिक आपराधिक छवि वाले उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं.

उम्मीदवारों की औसत संपत्ति 3.49 करोड़ रुपये

चार फरवरी को होने जा रहे इस चुनाव में 16 फीसदी यानी 178 उम्मीदवारों की संपत्ति पांच करोड़ रुपये या इससे ज्यादा है. इसके साथ ही 37 फीसदी उम्मीदवार करोड़पति हैं. दूसरी ओर, 341 उम्मीदवारों ने अपनी संपत्ति 10 लाख रुपये से कम बताई है. राजनीतिक पार्टियों की बात करें तो अकाली दल में 93 फीसदी उम्मीदवार करोड़पति हैं. इसके बाद कांग्रेस में 88 फीसदी, भाजपा में 87 फीसदी और ‘आप’ में 63 फीसदी उम्मीदवार इस श्रेणी में आते हैं. एडीआर के मुताबिक उम्मीदवारों की औसत संपत्ति का आंकड़ा 3.49 करोड़ रुपये है. कांग्रेस के कपूरथला से उम्मीदवार राणा गुरजित सिंह सबसे अमीर उम्मीदवार हैं, जिन्होंने अपने शपथपत्र में 169 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति घोषित की है.

1145 उम्मीदवारों में केवल 81 महिलाएं

एडीआर के मुताबिक कुल उम्मीदवारों में से 60 फीसदी यानी 680 उम्मीदवारों की शिक्षा पांचवीं से लेकर 12वीं तक है. इसके अलावा 32 फीसदी यानी 365 उम्मीदवारों ने खुद के स्नातक या इससे ज्यादा पढ़ा-लिखा होने की बात कही है. दूसरी ओर, 41 फीसदी उम्मीदवार निरक्षर हैं. राज्य में 1145 उम्मीदवारों में से महिला उम्मीदवारों की संख्या केवल 81 है.