केरल से इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के सांसद ई अहमद के निधन के बाद बजट पेश करने के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव की खबर है. आम तौर पर किसी सांसद के निधन के बाद संसद की कार्यवाही एक दिन के लिए स्थगित करने की परंपरा रही है. लेकिन, केंद्र सरकार ने सांसद ई अहमद के निधन के बाद बजट पेश करने का फैसला किया है. मंगलवार को राष्ट्रपति के अभिभाषण के दौरान ई अहमद को दिल का दौरा पड़ा था. बुधवार तड़के उनका निधन हो गया. अहमद के निधन के संसद की कार्यवाही एक दिन के लिए स्थगित होने के कयास लगाए जा रहे थे. हालांकि, वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा बजट की प्रति के साथ राष्ट्रपति से मिलने और ट्विटर पर 11 बजे बजट पेश करने की सूचना के साथ साफ हो गया कि बजट तय समय पर पेश होगा.

इस मामले में सूचना और प्रसारण मंत्री वेंकैया नायडू ने कहा कि बजट पेश करने की तैयारियां अपने अंतिम चरण में हैं और इस पर कोई विवाद नहीं होना चाहिए क्योंकि यह संवैधानिक जिम्मेदारी है. लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने भी ई अहमद के निधन पर शोक जताया और कहा कि बजट को तय समय पर पेश करना संवैधानिक उत्तरदायित्व है.

हालांकि, इस फैसले पर विपक्षी दलों की तीखी प्रतिक्रिया आई है. पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा ने कहा, ‘वित्त मंत्री को बजट की प्रति के साथ राष्ट्रपति के पास जाने की कोई जरूरत नहीं थी, आखिर जल्दबाजी किस बात की है? यह चौंकाने वाला है और सरकार की सोच बताता है.’ उनका यह भी कहना था कि अगर बजट की गोपनीयता पर कोई असर नहीं पड़ता है तो बजट टालना कोई बड़ा फैसला नहीं है. हालांकि, संविधान के जानकार सुभाष कश्यप ने कहा कि बजट की प्रतियां संसद पहुंचने के बाद उसे रोकना संभव नहीं रह जाता.

राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव का भी इस पर बयान आया है. उन्होंने भी केंद्रीय बजट न पेश करने की बात कही. उधर, सपा सांसद नरेश अग्रवाल ने कहा, ‘ संसद की परंपरा (कार्यवाही स्थगित करना) तो यही रही है, लेकिन यह सरकार परंपरा का निर्वहन नहीं करती.’ इससे पहले कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार पर ई अहमद की निधन की घोषणा करने में जानबूझ कर देरी करने का आरोप लगाया था. इसे अमानवीय कृत्य बताते हुए उन्होंने कहा था कि सरकार के पास 31 मार्च तक का वक्त है और बजट को आगे बढ़ाना चाहिए.