केरल के सांसद ई अहमद को श्रृद्धांजलि देने के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली भाजपानीत एनडीए सरकार का चौथा आम बजट पेश कर रहे है. उन्होंने बीते साल नवंबर में 500 रुपये और 1000 रुपये के पुराने नोटों को बंद करने के फैसले को अपनी सरकार का साहसिक कदम बताया. वित्त मंत्री ने कहा कि टैक्स चोरी करना जीवन शैली का हिस्सा बन गया था, लेकिन नोटबंदी के जरिए एक नई सामान्य स्थिति लाने का प्रयास किया गया है. अरुण जेटली ने यह भी कहा कि नए नोटों की आपूर्ति का काम तेजी से चल रहा है और अगले साल तक इसका असर खत्म हो जाएगा. उन्होंने कहा कि नोटबंदी का अर्थव्यवस्था पर मामूली और अल्पकालिक असर होगा. वित्त मंत्री के मुताबिक बैंक अब अधिक लोन दे पाएंगे और समाज के हर तबके का विकास होगा.

महंगाई पर काबू रखने में सरकार सफल

अच्छी उम्मीदों को सुशासन का मूलमंत्र बताते वित्त मंत्री ने कहा कि इस दौरान सरकार महंगाई पर काबू रखने और तेज विकास दर का लक्ष्य पाने में सफल रही है. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का ध्यान युवाओं को उत्साहित करने, विकास का लाभ उठाने और रोजगार बढ़ाने पर होगा.

किसानों का खास ख्याल

वित्त मंत्री ने कहा कि अगले वित्तीय वर्ष में सरकार के एजेंडे में बदलाव, प्रोत्साहन और स्वच्छ भारत शामिल है. उन्होंने कहा कि अच्छे मानसून की उम्मीद के साथ कृषि क्षेत्र के 4.1फीसदी दर से विकास करने का अनुमान है. उनके मुताबिक फसल बीमा योजना को 2017-18 में 40 फीसदी और 2018-19 में 50 फीसदी तक विस्तार देने का लक्ष्य है. वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार पांच साल में किसानों की आय दोगुनी कर देगी. उनका यह भी कहना था कि अगले साल 10 लाख करोड़ रुपए कृषि कर्ज़ के तौर पर दिए जाएंगे.

अरुण जेटली ने कहा कि सरकार राजकोषीय क्षमता को ध्यान में रखते हुए ग्रामीण इलाकों में बजट का खर्च बढ़ाने, ढांचागत विकास और गरीबी उन्मूलन के नजरिए से काम काम करेगी. मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी करने के काम में तेजी की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि सभी कृषि विज्ञान केंद्रों पर मिनी लैब बनाई जाएगी. वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के तहत डेयरी प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर फंड बनाया जाएगा.

इससे पहले अरुण जेटली ने कहा कि यह बजट तीन बड़ी चुनौतियों के बीच पेश किया जा रहा है. इनमें पहली अमेरिका के केंद्रीय बैंक की नीति है जिसकी वजह से विदेशी निवेश घटा है, दूसरी तेल के बढ़ते दाम हैं और तीसरी वे दिक्कतें हैं जो विकसित देशों की अर्थव्यवस्था के बंद होते दरवाजों से भारत के सामने आ रही हैं .