वित्त मंत्री ने अरुण जेटली ने आम बजट पेश कर दिया है. काले धन को रोकने की कवायदें करने के साथ-साथ उन्होंने इसके जरिये नोटबंदी से जनता को हुई परेशानी पर मरहम लगाने की भी कोशिश की है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बजट को अर्थतंत्र और देश को नई मजबूती देने वाला बताया है. उन्होंने कहा है कि वित्त मंत्री ने दाल के दाम से लेकर डेटा की स्पीड और शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य तक हर चीज का ख्याल रखा है. रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा कि यह बजट प्रधानमंत्री के कहे गए शब्दों का छपा संस्करण है. भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने इसे जनता का बजट बताया. उधर, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने इसे शेरो-शायरी वाला बजट बताया. उन्होंने कहा कि इसमें राजनीतिक चंदे को पारदर्शी बनाने की कवायद ठीक है लेकिन, सरकार ने किसानों और मजदूरों का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा है.

इस बजट की खास बातें :

कर राहत

आम बजट-2017 में आम लोगों को आयकर में राहत दी गई है. ढाई लाख से पांच लाख रु तक की आय पर लगने वाले 10 फीसदी टैक्स को पांच फीसदी कर दिया गया है. रेल बजट को आम बजट के साथ पेश करते हुए ई-टिकट खरीदने वालों को विशेष राहत दी गई है. अब आईआरसीटीसी से टिकट लेने पर सेवा कर नहीं लगेगा.

नकद निकासी पर नियंत्रण और काले धन पर सख्ती

काले धन पर लगाम कसने के लिए बैंकों के जरिए लेन-देन को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है. इसके लिए तीन लाख रुपये से ज्यादा की नगद निकासी पर रोक लगाने का फैसला किया गया है. ऑनलाइन भुगतान को बढ़ावा देने के लिए भीम एप को प्रोत्साहित करने और आधार नंबर आधारित भुगतान करने से जुड़ी 20 लाख मशीनों को लगाने का भी प्रस्ताव किया गया है. वित्त मंत्री ने कहा कि कर चोरी करके विदेश भाग जाने अपराधियों की संपत्ति जब्त करने के लिए सरकार नया कानून लाने पर विचार करेगी.

नकद चुनावी चंदे की सीमा घटी

राजनीतिक चंदों में पारदर्शिता लाने के लिए नकद चंदा लेने की सीमा को 20,000 रुपये से घटाकर 2,000 रुपये कर दिया गया है. सभी राजनीतिक दलों को चेक या इलेक्ट्रॉनिक भुगतान के जरिए चंदा लेने की छूट होगी.

विदेशी निवेश बढ़ाने की पहल

विदेशी निवेश को सरल बनाने के लिए फॉरेन इंवेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड को खत्म करने का फैसला लिया गया है. वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार वित्तीय घाटे से संबंधित लक्ष्य हासिल करने के मामले में सही दिशा में है. आम बजट में वित्त वर्ष 2017-18 के लिए वित्तीय घाटे का लक्ष्य सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 3.2 फीसदी और 2018-19 के लिए जीडीपी का तीन फीसदी रखा गया है.

गांव-देहात का ख्याल

ग्रामीण क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देते हुए मनरेगा के आवंटन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी करते हुए इसे 48,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है. यह मनरेगा के लिए अब तक का सबसे बड़ा आवंटन होगा. इसके अलावा मई 2018 तक सभी गांवों तक बिजली पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है.

युवा शक्ति को प्रोत्साहित करने पर विशेष जोर

आम बजट में संकल्प कार्यक्रम के तहत 4,000 करोड़ रुपये की लागत से 3.5 करोड़ युवाओं को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है. इसके अलावा पूरे देश में 100 से ज्यादा इंडिया इंटरनेशनल स्किल सेंटर बनाने का प्रस्ताव किया गया है. इसके तहत उन्नत प्रशिक्षण के अलावा युवाओं को विदेशी भाषाएं भी सिखाई जाएंगी, जिससे उनके लिए विदेशों में रोजगार पाना आसान हो सके. बजट में प्रधानमंत्री कौशल केंद्रों को सभी 600 जिलों में बनाने का लक्ष्य रखा गया है. अभी यह केंद्र 60 जिलों में ही हैं.