अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को नील गोरसच को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के लिए अपने उम्मीदवार के रूप में नामित किया है. नील अभी संघीय अपीलीय न्यायालय में कार्यरत हैं और उनके फैसलों के आधार पर उन्हें रुढ़िवादी रुझान वाला जज माना जाता है. ट्रंप द्वारा उन्हें चुनने के पीछे इसे ही प्रमुख वजह माना जा रहा है. माना जा रहा है कि इससे सुप्रीम कोर्ट में रुढ़िवादी रुझान वाले जजों को बहुमत हो जाएगा जिससे गर्भपात, गन कंट्रोल, मृत्युदंड और धार्मिक अधिकार जैसे विभाजनकारी मामलों में एकतरफा फैसले आ सकते हैं.

कोलोराडो में जन्मे 49 वर्षीय नील गोरसच बीते 25 वर्षों में सुप्रीम कोर्ट के लिए नामित सबसे कम उम्र के उम्मीदवार हैं. अगर सीनेट से उनकी नियुक्ति को मंजूरी मिल जाती है तो सुप्रीम कोर्ट में रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक राष्ट्रपतियों के समय में नियुक्त जजों की संख्या क्रमशः पांच और चार हो जाएगी. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जज गोरसच की कानूनी जानकारी की तारीफ की है और कहा है कि उनके फैसले अमेरिका को लंबे समय तक प्रभावित करेंगे.

नील गोरसच को लेकर सीनेट में रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक सीनेटरों के बीच टकराव हो सकता है. शीर्ष डेमोक्रेट्स नेता चक शूमर ने इसका संकेत भी दे दिया है. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी जज गोरसच के नाम को मंजूरी देने के मामले में सामान्य बहुमत के बजाय 100 सदस्यीय सीनेट में 60 वोटों से फैसला करने की मांग करेगी. शूमर का यह भी कहना था, ‘जज गोरसच ने श्रमिकों की तुलना में हमेशा ही कंपनियों का पक्ष लिया है, महिला अधिकारों को लेकर बैर भाव दिखाया है और वे न्यायशास्त्र की जिस नजरिए का समर्थन करते हैं, उससे उनके सुप्रीम कोर्ट के स्वतंत्र और निष्पक्ष जज साबित होने को लेकर संदेह है.’