मोदी सरकार द्वारा पेश किए गए 2017 के आम बजट पर नेताओं की प्रतिक्रिया आनी शुरू हो गई हैं. जहां एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बजट के लिए वित्तमंत्री की पीठ ठोंकी है, वहीं विपक्ष ने इसे लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा है.

प्रधानमंत्री ने बजट को भविष्योन्मुखी बताते हुए कहा कि यह बजट गरीब, किसान, दलित, शोषित, वंचित, युवाओं और महिलाओं की आकांक्षा को पूरा करेगा. साथ ही रोजगार सृजन, पारदर्शिता और ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के विकास को सुनिश्चित करेगा. उन्होंने आगे कहा, ‘पांच लाख की व्यक्तिगत आय पर 10 प्रतिशत से पांच प्रतिशत टैक्स कर देना एक क्रांतिकारी फ़ैसला है. इससे देश की बड़ी आबादी को फ़ायदा होगा.’

उधर, कांग्रेस सहित लगभग सभी विपक्षी पार्टियों ने बजट की आलोचना करते हुए सरकार पर निशाना साधा है. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा, ‘यह पूरी तरह से शेरो शायरी का बजट है, किसानों और युवाओं के लिए इसमें कुछ नहीं किया गया है. हम आतिशबाजी की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन हमें बुझा हुआ बारूद मिला है.’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हुए राहुल का कहना था, ‘मोदी जी ने हर साल दो करोड़ लोगों को रोजगार देने का वादा किया था, लेकिन पिछले साल केवल डेढ़ लाख लोगों को ही रोजगार मिला. किसानों का कर्ज़ भी नहीं माफ किया गया. मोदी केवल बड़े-बड़े भाषण देते हैं.’

हालांकि, कांग्रेस उपाध्यक्ष ने राजनीतिक चंदे को लेकर तय किए गए नए नियम का समर्थन किया है. उन्होंने कहा, ‘पॉलिटिकल फंडिंग को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार जो कदम उठाएगी, हम उसका पूरा समर्थन करेंगे.’

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आम बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे निराशाजनक बताया. उन्होंने कहा, ‘बिहार के लोगों को आम बजट से कुछ विशेष हासिल हुआ हो, ऐसा नहीं लगता. बिहार को विशेष राज्य का दर्जा या विशेष पैकेज को लेकर भी बजट मिलने की उम्मीद जताई गयी थी, जो पूरी नहीं हो सकी.’ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि बजट में नोटबंदी के नतीजों की भी जानकारी नहीं दी गयी है इसलिए उन लोगों को भी निराशा हुई है जिन्होंने नोटबंदी पर सरकार का समर्थन किया था.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पूरे बजट को भ्रामक और लक्ष्य विहीन करार दिया है. ममता ने ट्विटर के जरिए कहा, ‘विवादास्पद बजट 2017 अनुपयोगी, आधारहीन, मिशनविहीन और क्रियाहीन है...यह भ्रामक आंकड़ों और खोखले शब्दों की बाजीगरी से भरा है जिसका कोई मलतब नहीं है. मोदी सरकार अपनी पूरी विश्वसनीयता खो चुकी है.’

केंद्र और राज्य में भाजपा की सहयोगी पार्टी शिवसेना के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी बजट को लेकर नाखुशी जाहिर की है. ठाकरे ने कहा, ‘हर साल बजट पेश करने की क्या जरूरत है? पहले ये बताया जाए कि क्या पिछले साल की गई घोषणाएं पूरी कर दी गई हैं?’