वित्त वर्ष 2017-18 का आम बजट नोटबंदी की पृष्ठभूमि में केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पेश किया. तकरीबन दो महीने पहले यानी 8 नवंबर, 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को यह जानकारी दी कि 500 रुपये और 1000 रुपये के पुराने नोट अब नहीं चलेंगे. उसके बाद काफी लोगों को कई तरह की परेशानियां उठानी पड़ीं. आज जब अगले वित्त वर्ष के लिए अरुण जेटली बजट पेश कर रहे थे तो दो महीने पहले की गई उस घोषणा और उसके बाद की स्थितियों की छाप उनके बजट भाषण पर स्पष्ट तौर पर दिख रही थी.

इस बजट में नोटबंदी के बाद आम लोगों को जो परेशानी हुई उससे उपजी नाराजगी को दूर करने का प्रयास तो किया ही गया है साथ ही साथ इसकी वजह से अर्थव्यवस्था को जो फायदे हो सकते हैं उन्हें उठाने के प्रति भी सरकार प्रतिबद्ध दिखती है.

1- किसानों को दिए जाने वाले कर्ज में बढ़ोतरी

नोटबंदी को लेकर तमाम विपक्षी दलों ने यह कहा कि इससे किसानों को काफी परेशानी हुई है. यह बात पूरी तरह गलत भी नहीं है. गांव-गांव में आम किसान नोटबंदी की वजह से परेशान देखे गए. नोटबंदी की वजह से किसानों के बीच बढ़ी नाराजगी को दूर करने के मकसद से वित्त मंत्री ने यह घोषणा की कि किसानों को दिया जाने वाला कर्ज अगले वित्त वर्ष में दस लाख करोड़ रुपये कर दिया जाएगा. चालू वित्त वर्ष के लिए पिछले बजट में आठ लाख करोड़ रुपये कृषि कर्ज के तौर पर वितरित करने का लक्ष्य रखा गया था.

2- छोटे करदाताओं को राहत

नोटबंदी के बाद बैंकों और एटीएम के बाहर लगी लंबी-लंबी कतारों में आम लोग ही लगे. नोटबंदी की वजह से इस वर्ग के लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा. इनमें एक बड़ा वर्ग उन छोटे करदाताओं का है जिनकी सालाना आमदनी पांच लाख से कम है. केंद्रीय वित्त मंत्री ने इस वर्ग के जख्मों पर मरहम लगाते हुए 2.5-5 लाख के दायरे में आने वाले लोगों की आयकर की दर को 10 फीसदी से घटाकर पांच फीसदी कर दिया. इससे औसतन हर ऐसे व्यक्ति को सालाना 12,500 रुपये की बचत होगी.

3- ऑनलाइन लेन-देन को बढ़ावा

भले ही नोटबंदी की घोषणा करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने जो भाषण दिया था, उसमें एक बार भी कैशलेस लेन-देन को बढ़ावा देने की बात नहीं की गई थी लेकिन बाद में सरकार लगातार इस दिशा में कोशिश करती रही है. आम बजट में भी ऑनलाइन लेन-देने को बढ़ावा देने के उपायों की घोषणा की गई है और नकद लेनदेन को हतोत्साहित करने की कवायद की गई है.

इस बार बजट में तीन लाख रुपये से ज्यादा के नकद लेनदेन को प्रतिबंधित करने की घोषणा की गई है. इसके अलावा पहली बार रेल बजट के साथ पेश किये जाने वाले इस आम बजट में ऑनलाइन रेल टिकट बुक कराने पर लगने वाले सेवा शुल्क में भी छूट देने की घोषणा की गई है. हालांकि यह छूट नोटबंदी के बाद ही दे दी गई थी. लेकिन अब वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अपने बजट में साफ कर दिया है कि यह बरकरार रहने वाली है. इसका मतलब यह हुआ कि हर एसी-3 के टिकट पर तकरीबन 46 रुपये की बचत होगी और स्लीपर श्रेणी के टिकट पर तकरीबन 23 रुपये की. इसके साथ ही भीम ऐप के जरिए लेन-देने पर छूट की घोषणा भी वित्त मंत्री ने की.

4- पिछड़े वर्गों के लिए आवंटन में बढ़ोतरी

कुछ दिनों पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने यह बयान दिया था कि आरक्षण की नीति की समीक्षा होनी चाहिए. इस बयान को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि में देखा गया. बिहार विधानसभा चुनावों से पहले भी सरसंघचालक मोहन राव भागवत ने भी ऐसा ही बयान दिया था. नोटबंदी के मामले में भी सरकार पर यही आरोप लगे कि वह पिछड़े लोगों की आवश्यकताओं का ध्यान नहीं रखती. इन तीनों चीजों को एक साथ जोड़ने पर सरकार के सामने जो चुनौती दिखती है, उससे पार पाने की कोशिश भी 2017-18 का बजट करता हुआ दिखता है.

केंद्रीय वित्त मंत्री ने घोषणा की कि अनुसूचित जातियों के लोगों के कल्याण के लिए बजट आवंटन में 35 फीसदी की बढ़ोतरी करके इसे 52,000 करोड़ रुपये कर दिया है. इसी तरह से अनूसूचित जनजाति के लोगों के लिए बजट आवंटन को बढ़ाकर 31,920 करोड़ रुपये और अल्पसंख्यकों के लिए 4,195 करोड़ रुपये करने की घोषणा भी वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में की. इसके अलावा वित्त मंत्री ने यह भी कहा है कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत कर्ज देने में दलितों, महिलाओं, आदिवासियों और पिछड़े वर्ग के लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी.

5- रोजगार गारंटी को बढ़ावा

जब केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार आई थी तो इस बात की आशंका थी कि रोजगार गारंटी योजना पर इस सरकार का जोर नहीं रहेगा. खुद प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार संसद में इसे संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार की सबसे बड़ी नाकामी बताया था. इसके बावजूद पिछले बजट से ही मोदी सरकार इस योजना पर मेहरबान दिख रही है.

इस साल इस योजना का आवंटन बढ़ाकर सरकार ने 48,000 करोड़ रुपये कर दिया. जो अब तक सबसे अधिक है. यहां यह याद रखना होगा कि नोटबंदी की वजह से बड़ी संख्या में वैसे लोग बेरोजगार हुए हैं जो असंगठित क्षेत्र में काम कर रहे थे. इनमें से भी बड़ी संख्या उनकी है जो गांवों में जाकर मनरेगा के तहत काम मांग रहे हैं. इसलिए सरकार की ओर से मनरेगा का बजट बढ़ाना बेहद अहम हो जाता है. क्योंकि इससे मनरेगा के तहत काम की बढ़ी मांग को पूरा करना आसान होगा.

6- छोटे कारोबारियों को प्रोत्साहन

छोटे कारोबारियों को भी नोटबंदी की वजह से काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा है. यही वह वर्ग है जो भारतीय जनता पार्टी का लंबे समय से समर्थक रहा है. इसके बारे में कहा जा रहा था कि नोटबंदी की वजह से भाजपा से इसका मोहभंग होने लगा है. वित्त मंत्री जेटली ने नोटबंदी से इस वर्ग हो हुए नुकसान की भरपाई करने की कोशिश की है.

इस बजट में प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत दिए जाने वाले कर्ज को 1.22 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2.44 लाख करोड़ रुपये किया जा रहा है. इससे सबसे अधिक फायदा छोटे कारोबारियों को होगा. छोटे उद्यमों की संख्या बढ़ेगी और नए रोजगार पैदा होंगे. नोटबंदी से सबसे अधिक वैसे ही लोग बेरोजगार हुए हैं, जो छोटे उद्यमों में काम कर रहे थे. वित्त मंत्री ने यह घोषणा भी की है कि दो करोड़ रुपये तक सालाना कारोबार करने वाले उद्यम ऑडिट के दायरे में नहीं आएंगे. पहले यह सीमा एक करोड़ रुपये ही थी.

7- राजनीतिक चंदे पर नकेल

नोटबंदी के बाद सरकार की सबसे अधिक आलोचना इस बात पर हुई कि राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदों पर उसने सख्त रवैया क्यों नहीं अपनाया. ऐसा किये बगैर लोग इस बात से सहमत होने को तैयार नहीं दिख रहे थे कि सरकार वास्तव में काले धन की समस्या से लड़ना चाहती है.

मौजूदा व्यवस्था यह है कि राजनीतिक दलों को 20,000 रुपये से कम के चंदों का हिसाब नहीं देना पड़ता. चुनाव सुधार के क्षेत्र में काम कर रहे लोग कहते हैं कि राजनीतिक दल इस प्रावधान का दुरुपयोग करके अपनी मोटी रकमों को 20000 रुपये के कई चंदों में बांट देते हैं. वित्त मंत्री ने 20,000 रुपये की इस सीमा को घटाकर सीधा 2000 रुपये करने की घोषणा की है. हालांकि, इससे भी राजनीति में काले धन की समस्या पर आंशिक नकेल ही लगने की संभावना है. लेकिन यह चुनाव सुधारों की दिशा में एक बड़ा कदम है इससे इनकार नहीं किया जा सकता.

8- कर आधार में बढ़ोतरी के संकेत

नोटबंदी के शुरुआती आंकड़ों से यह भले ही लग रहा हो कि इससे कोई खास फायदा नहीं होने वाला है. लेकिन आज वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में नोटबंदी के बाद प्राप्त हुई सूचनाओं को सामने रखकर यह साफ किया कि सरकार इन सूचनाओं का इस्तेमाल कराधार को बढ़ाने में करने वाली है. उन्होंने बताया कि नोटबंदी के बाद 1.48 लाख बैंक खातों में 80 लाख रुपये से अधिक जमा किए गए. इन खातों में जमा कुल रकम का औसत निकाला जाए तो यह प्रति बैंक खाता 3.31 करोड़ रुपये बैठता है. इसी तरह से उन्होंने यह भी बताया कि 1.09 करोड़ बैंक खाते ऐसे हैं जिनमें नोटबंदी के बाद 2 लाख रुपये से लेकर 80 लाख रुपये के बीच की रकम जमा की गई. अब इन खातों से जुड़े लोगों को इस रकम का हिसाब सरकार को देना पड़ेगा.

ऐसे ही उन्होंने आयकर से संबंधित कई तथ्यों का जिक्र अपने बजट भाषण में किया. उन्होंने यह भी कहा कि हमारे पास कई माध्यमों से कई तरह की सूचनाएं पहुंच रही हैं जिनके आधार पर कहा जा सकता है कि बड़ी संख्या में वैसे लोग कर नहीं चुका रहे हैं, जिन्हें चुकाना चाहिए. उन्होंने साफ संकेत दिया कि सरकार नोटबंदी के बाद मिले आंकड़ों के आधार पर कर दायरे को विस्तार देने की दिशा में बढ़ने वाली है. अगर सरकार ऐसा कर पाती है तो न सिर्फ उसे होने वाली आमदनी बढ़ेगी बल्कि जो लोग पहले से कर के दायरे में हैं, सरकार उन्हें भी कुछ राहत देने पर विचार कर सकती है.