पिछले दो दिनों से जारी बवाल के बाद ईरान ने मान लिया है कि बीते 29 जनवरी को उसने बैलेस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया था. हालांकि, उसने इन आरोपों को पूरी तरह नकार दिया है जिनमें यह कहा गया था कि ईरान ने यह परीक्षण कर परमाणु समझौते का उल्लंघन किया है.

बुधवार को ईरान के रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है, ‘29 जनवरी को ईरानी रक्षा मंत्रालय ने बैलेस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया था. लेकिन यह किसी समझौते का उन्लंघन नहीं था क्योंकि यह मिसाइल परमाणु हथियारों को ले जाने में सक्षम नहीं है.’ इस बयान के जारी होने के बाद ईरान के रक्षा मंत्री होसैन देहघन ने भी मीडिया को बताया कि हाल ही में ईरान की योजनाओं के तहत एक मिसाइल टेस्ट किया गया था जो छह देशों के साथ हुए परमाणु समझौते का उल्लंघन नहीं करता है. उन्होंने आगे कहा, ‘इसलिए हम नहीं चाहते कि कोई बाहरी हमारे रक्षा मामले में दखल दे.’

इससे पहले मंगलवार को अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र में ईरान के मिसाइल परीक्षण को लेकर कड़ी आपत्ति जताई थी. उसने इस परीक्षण को परमाणु समझौते का उल्लंघन बताया था. यूएन में अमेरिकी राजदूत निक्की हेली का कहना था, ‘यह पूरी तरह से भड़काऊ और गैर जिम्मेदाराना रवैया है क्योंकि तेहरान ने इसके बारे में कोई सूचना नहीं दी.’ हेली के मुताबिक परमाणु समझौते के समय यूएन के प्रस्ताव 2231 के तहत ईरान को परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम बैलेस्टिक मिसाइल बनाने और इसका परीक्षण करने से प्रतिबंधित किया गया था.

हालांकि, इस मामले की गंभीरता को देखते हुए यूएन सोमवार को ही एक बैठक बुला चुका था. इस बैठक में परीक्षण की पुष्टि करने को लेकर बातचीत की गई थी. बैठक में शामिल अधिकारियों का कहना था कि पुष्टि के बाद ही मामले की जांच को लेकर कोई फैसला किया जाएगा.

जुलाई 2015 में ईरान और अमेरिका सहित दुनिया की छह बड़ी शक्तियों के बीच परमाणु समझौता हुआ था. इस समझौते के तहत ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने और उसकी निगरानी करवाने पर राजी हो गया था. इसके बदले उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंध हटाने पर सहमति बनी थी.