यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के अलग होने से जुड़ा ब्रेक्जिट विधेयक पहले चरण की संसदीय बाधा पार करने में सफल रहा है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक बुधवार को 498 सांसदों ने इस विधेयक के पक्ष में वोट डाले जबकि 114 इसके विरोध में रहे. हाउस ऑफ कॉमन्स में दो दिन तक चली बहस के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्षी सांसदों ने जनमत संग्रह में जनता के फैसले का सम्मान करने की बात कही और विधेयक का समर्थन किया. ब्रिटेन में बीते साल 23 जून को हुए जनमत संग्रह में 52 फीसदी जनता ने ब्रेक्जिट का समर्थन किया था.

इसे प्रधानमंत्री टेरेसा मे के लिए राहत की खबर माना जा रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक अब वे 31 मार्च से अपनी तय समय सीमा के अनुसार यूरोपीय संघ से ब्रेक्जिट पर बातचीत शुरू कर सकेंगी. ब्रिटेन की शीर्ष अदालत ने अपने हालिया फैसले में कार्यकारी आदेश के जरिए यूरोपीय संघ की लिस्बन संधि के अनुच्छेद-50 को लागू करने के सरकार के फैसले पर रोक लगा दी थी और इस मामले में संसद की मंजूरी को अनिवार्य बताया था. इसके बाद सरकार को संसद में ब्रेक्जिट विधेयक लाना पड़ा था.

टेरेसा मे की सरकार ब्रेक्जिट विधेयक से जुड़ी सारी संसदीय प्रक्रियाओं को सात मार्च के पहले तक पूरा करना चाहती है. इस विधेयक को लेकर अगले हफ्ते से दूसरे चरण की संसदीय प्रक्रिया शुरू होगी, जिसमें इसके प्रावधानों पर चर्चा की जाएगी. रिपोर्ट के मुताबिक इस चरण में ब्रेक्जिट का विरोध करने वाले सांसद उन प्रावधानों को विधेयक में शामिल कराने की कोशिश करेंगे जिनसे ब्रेक्जिट के बाद ब्रिटेन पर पड़ने वाले आर्थिक दबावों को कम किया जा सके. इसके अलावा वे ब्रेक्जिट संबंधी बातचीत में संसदीय निगरानी बढ़ाने वाले प्रावधानों को शामिल कराने की भी कोशिश करेंगे.