बॉम्बे हाईकोर्ट ने महिला-पुरुष द्वारा एक दूसरे को पति-पत्नी मान लेने की रजामंदी को शादी की वैधता के लिए नाकाफी बताया है. द हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक गुरुवार को बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि किसी पुरुष के साथ शारीरिक संबंध होने, उसे पति मानकर सिंदूर लगाने या मंगलसूत्र पहनने के आधार पर किसी शादी को वैध नहीं माना जा सकता.

हाईकोर्ट का यह फैसला एक महिला की याचिका पर आया. इस महिला ने एक 40 वर्षीय व्यापारी से मंदिर में भगवान कृष्ण की मूर्ति के सामने शादी करने का दावा किया था. उसने अपनी याचिका में यह भी कहा था कि वह इसके बाद से अपने माथे पर सिंदूर लगा रही है और मंगलसूत्र पहन कर रही है. महिला ने उस व्यापारी के साथ डेढ़ साल से शारीरिक संबंध होने का दावा करते हुए उसे वैवाहिक अधिकार दिलाने का अनुरोध किया था.

लेकिन बॉम्बे हाईकोर्ट ने इससे इनकार कर दिया.अदालत ने महिला हिंदू विवाह अधिनियम-1955 के तहत इस विवाह को वैध नहीं माना. उसने कहा कि इस विवाह को महिला या पुरुष में से किसी के समुदाय की मान्यता हासिल नहीं थी और न ही किसी गवाह ने ही उन्हें पति-पत्नी के रूप में स्वीकार किया था. जस्टिस बीपी धर्माधिकारी की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा, ‘जब तक शादी से जुड़े सभी समारोह नहीं होते या कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं होता, किसी विवाह को संपन्न नहीं माना जा सकता.’ इससे पहले परिवार न्यायालय ने दोनों को पति-पत्नी मानने का फैसला सुनाया था. याचिकाकर्ता महिला की पहले एक शादी हो चुकी है और दो बच्चे भी हैं.

हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता महिला और व्यापारी के बीच के संबंध को लिव-इन रिलेशनशिप मानने से भी इंकार कर दिया क्योंकि दोनों एक साथ एक छत के नीचे नहीं रह रहे थे. अदालत ने इस तथ्य पर भी गौर किया कि महिला का अपने पहले पति से तलाक हो चुका था, लेकिन बच्चों के लिए वह अपने ससुराल में ही रह रही है. रिपोर्ट के मुताबिक इस महिला ने परिवार न्यायालय का दरवाजा तब खटखटाया था, जब व्यापारी के परिजनों ने उसकी शादी अपने समुदाय में किसी लड़की से तय कर दी थी. वहीं पुलिस का कहना है कि याचिकाकर्ता महिला ने इस व्यापारी के खिलाफ शादी का वादा करके बलात्कार करने का मामला भी दर्ज कराया था और व्यापारी से दो लाख रुपये मिलने के बाद यह मामला वापस ले लिया था.