पिछले दिनों मीडिया और सोशल मीडिया में एक खबर की जबरदस्त चर्चा रही. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से पाकिस्तान पर लगाम कसने की गुजारिश की थी. इसके बाद अमेरिका की तरफ से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ को कड़ा फैसला लेने के लिए कहा गया और हाफिज़ सईद को लाहौर में नज़रबंद करना उसी का नतीजा था. हालांकि इस पर भारत सरकार का आधिकारिक बयान काफी समझदारी भरा था लेकिन उत्तर प्रदेश के चुनाव से पहले भाजपा समर्थकों ने इसे मोदी सरकार की बड़ी कामयाबी के तौर पर प्रचारित करने की कोशिश की.

जहां तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच हुई बातचीत का सवाल है तो सुनी-सुनाई यह है कि उनके बीच हुई आधा घंटे से ज्यादा लंबी बातचीत में हाफिज़ सईद का जिक्र एक बार भी नहीं आया था. यह बातचीत शिष्टाचार से भरी थी जिसमें अमेरिका और भारत के सुधरते रिश्ते और दोस्ती को बेहतर बनाने के रोडमैप पर बातचीत हुई.

अब जो लोग इस बातचीत को हाफिज़ सईद की गिरफ्तारी से जोड़कर देख रहे हैं तो उनका सवाल होगा कि आखिर बातचीत के ठीक बाद ही हाफिज सईद गिरफ्तार कैसे हो गया? इसकी दो साफ वजहें बताई जा सकती हैं. पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार और जियो न्यूज़ के डायरेक्टर रहे शाहिद मसूद की बात गौर करने वाली है. मसूद ने अपने शो में यह दावा किया कि हाफिज़ सईद को नज़रबंद अमेरिका या भारत के दवाब में नहीं बल्कि उसकी जान बचाने के लिए किया गया है.

विश्वस्त सूत्रों के हवाले से शाहिद मसूद का कहना है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ने अफगानिस्तान से कुछ फोन कॉल टेप किए थे. इन फोन कॉल्स से पता चला था कि अफगानिस्तान से ऑपरेट करने वाले आतंकवादी संगठन तहरीके तालिबान ने हाफिज़ सईद को खत्म करने की योजना बनाई है. इसके तहत हाफिज़ सईद को मारने के लिए कुछ फिदायीन लाहौर पहुंचनेवाले थे. जैसे ही पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी को यह बात पता चली उसने हाफिज सईद के बाहर निकलने पर रोक लगाकर उसकी सुरक्षा बढ़ा दी गई.

हाफिज़ सईद को नज़रबंद करने से पहले पाकिस्तान की सरकार ने उसे पब्लिसिटी का भी पूरा मौका दिया. लाहौर में उसकी प्रेस कांफ्रेंस आयोजित की गई. नज़रबंद होने से पहले उसने अपनी कार से ही एक वीडियो संदेश भी भेजा. इसमें उसने कहा कि नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के दवाब में उस पर कार्रवाई की गई है. पाकिस्तान के पत्रकार बताते हैं कि यह सब एक मिलीभगत थी.

ये भी इत्तेफाक से कुछ ज्यादा ही है कि नज़रबंद होने के बाद उसने जमात उद दावा की जगह एक और नया संगठन बना लिया है. अब इस नए संगठन का नाम तहरीक आज़ादी जम्मू-कश्मीर है. आतंकवाद पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि अब लश्कर और जमात उद दावा के सारे पैसे इस नए संगठन के खाते में डाल दिए जाएंगे फिर पाकिस्तान की सरकार उन खातों को फ्रीज कर देगी. हो सकता है भारत में खाते फ्रीज करने की खबर भी जोर-शोर से फैलाई जाए. जानने वाले मानते हैं कि इन खबरों से ज्यादा खुश होने की जरूरत नहीं है. क्योंकि पाकिस्तान वही करता है जो उसे करना है और हाफिज सईद वही करता है जो पाकिस्तान उससे करवाना चाहता है.