बॉम्बे हाईकोर्ट ने मालेगांव बम धमाकों की आरोपित साध्वी प्रज्ञा ठाकुर की जमानत याचिका मंजूर कर ली है. अदालत ने यह फैसला राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा पेश किए गए कुछ ऑडियो टेप और वीडियो क्लिप्स देखने-सुनने के बाद किया. इनमें प्रज्ञा ठाकुर और अन्य आरोपितों के बीच फोन पर हुई कथित बातचीत की रिकॉर्डिंग थी.

पीड़ित पक्ष की शिकायत के बाद अदालत ने एनआईए से ये टेप पेश करने के लिए कहा था. उसका आरोप था कि एनआईए मामले में निष्पक्ष जांच नहीं कर रही है. पीड़ितों के वकील बीए देसाई का कहनाथा कि ऐसे कई आधार हैं जिनसे प्रज्ञा ठाकुर पर लगे आरोप पहली नजर में सही मालूम होते हैं. देसाई के मुताबिक प्रज्ञा ठाकुर पर गैरकानूनी गतिविधियां (निरोधक) कानून के तहत गंभीर आरोप हैं जो इस वारदात में उनके शामिल होने की तरफ इशारा करते हैं.

अभियोजन पक्ष की तरफ से ये आरोप 20 जनवरी को एनआईए द्वारा जारी एक बयान के बाद लगाए गए थे. इसमें एजेंसी ने कहा था कि उसे प्रज्ञा ठाकुर को जमानत दिए जाने पर कोई एतराज नहीं है. एजेंसी की तरफ से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने कोर्ट से कहा था, ‘केस की शुरुआत में जिन प्रमुख गवाहों ने प्रज्ञा के खिलाफ बयान दिए थे वे अब मुकर गए हैं. ऐसे में एनआईए के पास प्रज्ञा के खिलाफ कोई सबूत नहीं हैं.’

मालेगांव में 2008 में हुए इन धमाकों में चार लोग मारे गए थे जबकि 79 घायल हुए थे. महाराष्ट्र एटीएस ने इस मामले में 14 लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था. इनमें साध्वी प्रज्ञा और लेफ्टिनेंट कर्नल एस पुरोहित भी शामिल थे. उन पर महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ क्राइम एक्ट (मकोका) के तहत आरोप लगाए गए थे जिन्हें बाद में सुप्रीम कोर्ट ने हटा दिया था.