दिल्ली के लगभग 20 साल पुराने उपहार सिनेमा अग्निकांड में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुना दिया है. गुरुवार को जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच ने गोपाल अंसल की सजा घटाने से इंकार कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले के आदेश में गोपाल अंसल को एक साल की सजा सुनाई थी, जिसमें चार महीने की सजा वे पहले ही काट चुके हैं. अदालत ने बाकी सजा पूरी करने के लिए उन्हें चार हफ्ते में सरेंडर करने का आदेश दिया है.

वहीं सुशील अंसल को राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वे जितनी सजा काट चुके हैं, वह काफी है. गोपाल अंसल के बड़े भाई सुशील पांच महीने जेल में रह चुके हैं. साथ ही इस मामले में कोर्ट ने आरोपितों पर 30-30 करोड़ रुपये के जुर्माने को बरकरार रखा है. सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला अंसल बंधुओं की पुनर्विचार याचिका पर आया है, जिसमें जुर्माने के एवज में सजा घटाने की मांग की गई थी.

दिल्ली के उपहार सिनेमाहॉल में 13 जून, 1997 को आग लग गई थी जिसमें 23 बच्चों सहित 59 लोगों की मौत हो गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अंसल बंधुओं (सिनेमाहॉल के मालिक) को लापरवाही बरतने का दोषी पाया था. सुप्रीम कोर्ट ने उपहार अग्निकांड के पीड़ितों के संगठन और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की पुनर्विचार याचिका को भी खारिज कर दिया. इसमें याचिकाकर्ताओं ने जुर्माने की जगह पर सजा बढ़ाने की मांग की थी.

उपहार अग्निकांड में अपने बेटे-बेटी को खो चुकी नीलम कृष्णमूर्ति ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर निराशा जताई है. समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से साफ हो गया है कि देश में धनी लोग जुर्माना देकर सजा से बच सकते हैं. नीलम कृष्णमूर्ति ने यह भी कहा, ‘जिस दिन मेरे बच्चे मरे थे, मुझे उसी दिन इन लोगों (अंसल बंधुओं) को गोली मार देनी चाहिए थी.’