अपने नस्लवादी और रूढ़िवादी बयानों के लिए चर्चा में रहने वाले रिपब्लिकन सांसद जेफ सेशंस अमेरिका के नए अटॉर्नी जनरल बन गए हैं. गुरूवार को व्हाइट हाउस में हुए एक कार्यक्रम में उन्होंने पद की शपथ ली. इससे पहले बुधवार को काफी जोरदार बहस के बाद अमेरिकी सीनेट ने उनके नाम पर मुहर लगा दी थी. डेमोक्रेटिक सांसदों ने इस दौरान काफी हंगामा किया था और सेशंस के बयानों का हवाला देते हुए उनके नाम पर विरोध जताया था. हालांकि, सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी के बहुमत के कारण उनकी चली नहीं और 47 के मुकाबले 52 मतों के मामूली अंतर से सेशंस के नाम की पुष्टि हो गई. बीते नवंबर में राष्ट्रपति निर्वाचित होने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने अटॉर्नी जनरल के तौर पर जेफ सेशंस के नाम का प्रस्ताव दिया था.

अमेरिका में जेफ सेशंस को महिलाओं, समलैंगिकों और आप्रवासियों के प्रति सख्त रुख रखने वाले शख्स के रूप में जाना जाता है. वे अमेरिका में अपराधियों के साथ पूछताछ के दौरान टॉर्चर की वकालत करते रहे हैं. पेशे से वकील रहे सेशंस को अपने साथी अश्वेत वकीलों के खिलाफ नस्लवादी टिप्पणियां करने के लिए भी जाना जाता है. वे सार्वजनिक रूप से इन वकीलों को श्वेत लोगों से ढंग से बात करने की चेतावनियां दिया करते थे. 1980 में नस्लवादी टिप्पणियों के कारण ही संसद ने सेशंस को संघीय न्यायाधीश बनाने से इनकार कर दिया था.

जब डोनाल्ड ट्रंप ने जेफ सेशंस को अटॉर्नी जनरल के तौर पर नामित किया था तो अमेरिका सहित दुनिया भर के मानवाधिकार संगठनों ने इस फैसले पर विरोध जताया था. ‘ह्यूमन राइट्स वॉच’ सहित कई संगठनों ने अमेरिकी संसद से सेशंस के नाम को ख़ारिज करने की अपील भी की थी.

जेफ सेशंस का अटॉर्नी जनरल बनना भारत के लिए भी बुरी खबर माना जा रहा है क्योंकि वे सीनेट में रहते हुए आप्रवासियों और विदेशी कामगारों को लेकर काफी मुखर रहे हैं. पिछले दिनों ही उन्होंने कहा था कि वे सीनेट में ऐसा बिल लेकर आएंगे जिसमें वीजा नियमों को सख्त बनाने का प्रावधान होगा और कंपनियों को पहले अमेरिकियों को नौकरी देने का वादा करना ही होगा.

कुछ लोगों की चिंताएं इस बात को लेकर भी हैं कि जेफ़ सेशंस अब प्रवासन और निर्वासन के नियमों में मनमुताबिक बदलाव कर सकते हैं क्योंकि अटॉर्नी जनरल बनते ही वे इस तरह के मामलों की सुनवाई करने वाली अदालतों में जजों को नियुक्त करने वाली संस्था के प्रमुख बन गये हैं. इससे सेशंस को इन जजों को हटाने और अप्रवासन के नियमों को बदलने का अधिकार भी मिल गया है. कुछ अमेरिकी पत्रकारों का मानना है कि चुनाव प्रचार के दौरान अप्रवासियों से जुड़े विषयों पर ट्रंप ने जेफ सेशंस की सलाह से ही जनता से वादे किये थे और इन्हें पूरा करने के मकसद से ही उन्होंने सेशंस को अटार्नी जनरल के पद पर चुना है.