दिसंबर, 2012 में निर्भया कांड के बाद दिल्ली सहित देशभर में लोगों ने जिस तरह महिला सुरक्षा को लेकर आवाज बुलंद की और सरकार हरकत में आई, इसके बाद लगा था हालात तेजी से सुधरेंगे. लेकिन उस घटना के चार साल बाद भी आंकड़े इस बात की गवाही दे रहे हैं कि देश में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ. दिल्ली में तो स्थिति और बदतर ही हुई है. 31 जनवरी, 2017 की रात दक्षिणी दिल्ली में एक युवती के साथ चलती कार में दुष्कर्म का मामला सामने आया है, जिसने निर्भया कांड की याद फिर से ताजा कर दी. वहीं इससे पहले नए साल के मौके पर बेंगलुरू में महिलाओं के खिलाफ सामूहिक छेड़छाड़ की घटना ने महिला सुरक्षा के मुद्दे को एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया था.

इस बीच, राष्ट्रीय क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) ने साल 2015 में राज्यवार महिलाओं के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों से संबंधित आंकड़े जारी किए हैं. देश के अलग-अलग राज्यों में महिलाएं कितनी असुरक्षित हैं, यह बताने के साथ-साथ ये आंकड़े कई गम्भीर सवाल भी पैदा करते हैं. इन आंकड़ों का अध्ययन करने पर स्थापित धारणा के उलट यह बात सामने आती है कि सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक दृष्टि से विकसित दिल्ली और चंडीगढ़ जैसे शहर महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में भी अव्वल हैं.

महिलाओं के लिए दिल्ली अब भी सबसे खतरनाक जगह बनी हुई है

एनसीआरबी आंकड़ों के मुताबिक साल 2015 के दौरान प्रति लाख आबादी पर दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 184.3 मामले दर्ज किए गए. यह आंकड़ा 2014 की तुलना में 15.2 ज्यादा है. इसके अलावा राष्ट्रीय मीडिया में सुर्खियों से दूर रहने वाले कई राज्य भी इस सूची में दिल्ली के साथ हाथ से हाथ मिलाकर खड़े नजर आ रहे हैं. इनमें असम, तेलंगाना, ओडिशा और राजस्थान जैसे राज्य शामिल हैं. महिला अधिकारों को लेकर जागरूक माने जाने वाले असम में महिला अपराध की दर 148.2 होना, चौंकाता है.

असम और दिल्ली में महिलाओं के प्रति अपराधों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई है

साल 2014 और 2015 के बीच महिलाओं के खिलाफ अपराध दर में बढ़ोतरी के मामले में असम और दिल्ली सबसे आगे रहे. इस सूची में असम दिल्ली को पछाड़कर पहले पायदान पर है. असम में इस दौरान जहां 24.8 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज की गई, वहीं दिल्ली में यह आंकड़ा 15.2 फीसदी रहा. इसके बाद ओडिशा में 11.5 फीसदी, तेलंगाना मेें 4.8 फीसदी और अरुणाचल प्रदेश में 4.7 फीसदी बढोत्तरी दर्ज की गई.

पूर्वोत्तर के राज्य पहले के मुकाबले महिलाओं के लिए और सुरक्षित हुए हैं

एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक पूर्वोत्तर राज्यों मिजोरम, त्रिपुरा और सिक्किम में महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में कमी आई है. इसके अलावा मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल में भी महिला सुरक्षा के मामले में पहले की तुलना में स्थिति सुधरी है. साल 2015 के दौरान मिजोरम में इन मामलों में सबसे ज्यादा 20.01 फीसदी कमी दर्ज की गई. इसके बाद त्रिपुरा में 19.8 फीसदी, सिक्किम में 13.5 फीसदी और पश्चिम बंगाल में 12 फीसदी कमी देखी गई.

भारत में महिलाओं के खिलाफ होने वाली आपराधिक घटनाओं में करीब आधा हिस्सा सिर्फ पांच बड़े राज्यों का है

राज्यों में महिलाओं के खिलाफ अपराध के सबसे ज्यादा मामले आबादी के लिहाज से सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में दर्ज किए गए. साल 2015 में यहां महिलाओं के खिलाफ अपराध के कुल 35,527 मामले रिकॉर्ड किए गए. यह पूरे देश में दर्ज मामलों का 10.85 फीसदी है. इसके बाद दूसरे पायदान पर पश्चिम बंगाल है, जहां यह आंकड़ा 33,218 (10.85%) रहा. इन दोनों राज्यों के बाद महाराष्ट्र, राजस्थान और मध्य प्रदेश सूची में शामिल हैं. यह चौंकाने वाली बात है कि भारत में महिलाओं के खिलाफ होने वाली आपराधिक घटनाओं में करीब 46 फीसदी मामले इन्हीं राज्यों में दर्ज हुए हैं. साल 2015 में पूरे देश में यह आंकड़ा 3,27,394 दर्ज किया गया. साल 2014 में यह आंकड़ा 3,37,922 रहा था.

पूर्वोत्तर के राज्यों में महिलाओं के खिलाफ अपराध के सबसे कम मामले दर्ज हैं

महिलाओं के खिलाफ सबसे कम अपराध वाली सूची में पूर्वोत्तर के चार राज्यों ने बाजी मारी है. इनमें पहले पायदान पर सिक्किम है, जहां केवल 53 मामले दर्ज किए गए, जो कुल मामलों का केवल 0.016 फीसदी है. इसके बाद नगालैण्ड में 90, मिजोरम में 158, मेघालय में 334 और गोवा में 365 मामले दर्ज किए गए. ध्यान देने वाली बात है कि इन सभी राज्यों में अपराध के मामले मिलाकर भी कुल मामलों का केवल 0.3 फीसदी ही हैं.

केंद्र शासित राज्यों में चंडीगढ़ महिलाओं के लिए सबसे खतरनाक है

केंद्रशासित प्रदेशों में महिलाओं के लिए सबसे सुरक्षित पुडुचेरी रहा है, जहां महिलाओं के खिलाफ अपराध की दर 10.9 रिकॉर्ड की गई. दूसरी ओर, सबसे असुरक्षित की सूची में चंडीगढ़ 64.8 अपराध दर के साथ अव्वल रहा. इसके अलावा चंडीगढ़ में ही महिलाओं के खिलाफ अपराध के सबसे अधिक 463 मामले दर्ज किए गए. इन राज्यों में लक्षद्वीप में केवल नौ मामले रिकॉर्ड किए गए.