राजनीतिक और संवैधानिक उथल-पुथल की स्थिति से तमिलनाडु अभी शायद कुछ दिन और बाहर न निकल सके. सुप्रीम कोर्ट ने एआईएडीएमके (अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम) महासचिव शशिकला को आय से अधिक संपत्ति मामले में दोषी ठहरा दिया है. सर्वोच्च अदालत ने उन्हें चार साल की सजा सुनाई है. सवाल उठता है कि अब क्या होगा.

1. शशिकला का जेल जाना तय, अदालत में पुनर्विचार याचिका भी

पहली संभावना एकदम साफ है कि शशिकला को अदालत में तुरंत समर्पण करना होगा. उन्हें गिरफ्तार भी किया जा सकता है. खबर है कि चेन्नई से करीब 80 किलोमीटर दूर कुवातुर स्थित गोल्डन-बे रिजॉर्ट (यहां शशिकला समर्थक विधायकों के साथ हैं) में इस मकसद से दो पुलिस महानिरीक्षक और पांच पुलिस अधीक्षकों के साथ बड़ी संख्या में पुलिस बल पहुंच चुका है. राज्य परिवहन की चार बसें भी वहां ले जाए जाने की खबर है.

कानून के जानकारों के मुताबिक अदालत ने शशिकला को पुनर्विचार याचिका दायर करने से नहीं रोका है. लेकिन यह याचिका उन्हें 30 दिन के भीतर दायर करनी होगी. यह अर्जी खारिज हुई तो वे सुधार (क्यूरेटिव) याचिका दायर सकती हैं. इसमें उनकी दलील हो सकती है कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत की अदालत ने अनदेखी की है. हालांकि यह भी तय है कि अदालत के अगले फैसले तक उन्हें जेल में ही रहना होगा.

2. शशिकला जेल से ही विश्वस्तों के जरिए पार्टी-सरकार चला सकती हैं

गोल्डन-बे रिजॉर्ट में बीती छह-सात फरवरी से करीब 100 एआईएडीएमके विधायकों को रखा गया है. आरोप तो इन विधायकों को बंधक बनाने का भी है. खबरों के मुताबिक, फिलहाल इस रिजॉर्ट में बैठक के बाद शशिकला समर्थक विधायकों ने उनके विश्वस्त ई. पलानिस्वामी को पार्टी विधायक दल का नया नेता चुन लिया है.

पूर्व अटॉर्नी जनरल सोली सोराबजी के मुताबिक अदालती फैसले से सिर्फ उनके चुनाव लड़ने और मुख्यमंत्री पद संभालने पर रोक लगती है, पार्टी की कमान संभालने पर नहीं. यानी वे जयललिता की ही तरह पार्टी प्रमुख रहते हुए जेल से ही अपने विश्वस्तों के जरिए सरकार पर भी नियंत्रण रख सकती हैं. भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी (आय से अधिक संपत्ति मामले में याचिकाकर्ता) का भी इस मामले में यही मानना है.

3. शशिकला समर्थक विधायक पन्नीसेल्वम के साथ हो लें

कोर्ट के फैसले के बाद शशिकला के खिलाफ बगावत करने वाले कार्यवाहक मुख्यमंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम (ओपीएस) का पलड़ा भारी हो गया है. उन्होंने शशिकला समर्थक विधायकों से अपील भी कर दी है कि वे पार्टी को बचाने के लिए आत्मा की आवाज पर फैसला करें. खबरें हैं कि अदालत के फैसले के तुरंत बाद करीब 22 विधायकों ने पाला बदलकर अोपीएस के साथ जुड़ने का फैसला किया है. सोमवार की ही रात मदुरै दक्षिण के विधायक एसएस सर्वनन भेष बदलकर गोल्डन-बे रिजॉर्ट से भाग निकले थे और ओपीएस के पास पहुंच गए थे.

सर्वनन ने दावा किया है कि कई और विधायक हैं जो ओपीएस के साथ आने के लिए तैयार बैठे हैं. यहां बताना जरूरी है कि शशिकला की तरफ से विधायकों को साथ रखने की रणनीति बनाने से लेकर अन्य इंतजामों तक सभी काम उनके भतीजे सुधारकरन देख रहे थे. अब वे भी शशिकला के साथ दोषी ठहराए गए हैं. उन्हें भी जेल जाना होगा. ऐसे में शशिकला गुट के लिए अपने विधायकों को एकजुट रखना मुश्किल हो सकता है.

4. राज्यपाल दोनों गुटों को बहुमत साबित करने को कह सकते हैं

राज्यपाल सीएच विद्यासागर राव अब ज्यादा समय तक राज्य को कार्यवाहक मुख्यमंत्री के भरोसे नहीं रख सकते. नए नियमित मुख्यमंत्री के तौर पर उन्हें ओपीएस (अगर इस्तीफा वापस लेने की उनकी मांग राज्यपाल मान लेते हैं तब ही) या पलानिस्वामी को जल्द ही शपथ दिलानी होगी. खबरों के मुताबिक राज्यपाल ने इस सिलसिले में अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी से राय मांगी थी. बताया जाता है कि रोहतगी ने उनसे कहा है कि वे एक हफ्ते में विधानसभा की बैठक बुलाकर दोनों पक्षों को बहुमत साबित करने के लिए कह सकते हैं.

इस तरह का प्रयोग इससे पहले 1998 में उत्तर प्रदेश में हो चुका है. उस वक्त सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया था कि विधासनभा में बहुमत के जरिए यह फैसला किया जाए कि मुख्यमंत्री पद के दो दावेदारों- जगदंबिका पाल और कल्याण सिंह में से किस के पास सबसे ज्यादा समर्थन है. हालांकि राज्यपाल तमिलनाडु में यही तरीका अपनाएं, यह आवश्यक नहीं है. वे सिर्फ पलानिस्वामी को ही बहुमत साबित करने के लिए कह सकते हैं. इससे भी तय हो जाएगा कि विधायक उनके साथ हैं या ओपीएस के समर्थन में.

कुल मिलाकर घटनाक्रम तेजी से बदल रहे हैं. आने वाले दिनों में तमिलनाडु की राजनीतिक तस्वीर और कुछ और दिलचस्प और अनपेक्षित मोड़ भी ले सकती है.