पांच राज्यों (उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर) के विधानसभा चुनाव की हलचल के बीच ओडिशा से चौकाने वाला चुनावी नतीजा सामने आया है. पूरब के इस राज्य में पांच चरणों में पंचायत चुनाव हो रहे हैं. हर चरण की वोटिंग के साथ उसके नतीजे भी घोषित होते जा रहे हैं. पहले चरण में जिला परिषदों की 188 सीटों पर मतदान हुआ. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इसमें से 71 जीत ली हैं. इन नतीजों ने बीजू जनता दल (बीजेडी) के प्रमुख और राज्य के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की पेशानी पर बल डा दिए हैं.

नवीन पटनायक की परेशानी की दो बड़ी वजहें हैं. पहली तो यही कि वे राज्य में पिछले 17 साल से मुख्यमंत्री हैं. ऐसे में इन नतीजों को उनकी सरकार के खिलाफ सत्ता-विरोधी रुझान की तरह देखा जा सकता है. दूसरी बात उन्होंने अपने कार्यकाल के शुरुआती नौ साल तक भाजपा के साथ मिलकर राज्य में सरकार चलाई थी. अब वही पार्टी उनके प्रदेश में अपना जनाधार बढ़ाती हुई नजर आ रही है. पंचायत चुनाव नतीजों से तो यही लगता है.

पहले चरण की जिन सीटों के नतीजे अब तक आए हैं, उनमें से पिछले चुनाव में भाजपा महज 11 पर ही जीत सकी थी. लेकिन इस बार उसने अपनी ताकत छह गुना से भी ज्यादा बढ़ाई है. भाजपा महासचिव अरुण सिंह दावा करते हैं, ‘अभी चार चरणों का चुनाव बाकी है. हम राज्य में बीजेडी के मुख्य प्रतिद्वंद्वी के तौर पर उभरेंगे.’ पहले चरण में सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस को हुआ है. उसे सिर्फ 11 सीटें ही मिल सकी हैं. सत्ताधारी बीजेडी को इस चरण में 96 सीटें मिली हैं. बाकी सीटें अन्य के खाते में गई हैं. राज्य में जिला परिषदों की कुल 851 सीटें हैं. इनमें से अब तक 651 बीजेडी, 126 कांगेस और 36 भाजपा के पास थीं.