इस महीने की शुरुआत में जब ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम भारत पहुंची तो उसे लेकर चर्चाएं शुरू हो गईं. ऑस्ट्रेलिया और भारत दोनों ही देशों के क्रिकेट विशेषज्ञों का कहना था कि यह अब तक की सबसे कमजोर टीम है जो लगातार छह सीरीज जीत चुकी विराट कोहली की टीम के सामने आसानी से घुटने टेक देगी. भारतीय टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली जो हमेशा से किसी तरह की भविष्यवाणी करने से बचते हैं, उन्होंने भी कह दिया, ‘मैं वैसे क्रिकेट में भविष्यवाणी नहीं करता हूं, लेकिन मुझे कोई आश्चर्य नहीं होगा यदि विराट सेना इस ऑस्ट्रेलियन टीम को 4-0 से हरा दे.’

ऐसा ही कुछ भारतीय ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह का भी मानना है. उनका कहना था, ‘अगर ऑस्ट्रेलियाई टीम अच्छा भी खेलती है तो भारत 3-0 से सीरीज जीतेगा, वह भी तब जब ऑस्ट्रेलिया अच्छा खेलेगा, नहीं तो भारत 4-0 से जीतेगा ...ऑस्ट्रेलिया की पुरानी टीम में मैथ्यू हेडन, गिलक्रिस्ट, पोंटिंग, डेमियन मार्टिन, माइकल क्लार्क जैसे विश्‍व स्तरीय बल्लेबाज थे, लेकिन इस टीम में सिर्फ डेविड वॉर्नर और स्टीवन स्मिथ ही अच्छे बल्लेबाज हैं. मुझे नहीं लगता कि कंगारू ज्यादा देर विकेट पर टिक पाएंगे.’

हालांकि, ऐसे बयानों से अलग अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो ऐसा बिलकुल नहीं लगता कि भारतीय टीम भी विशेषज्ञों की तरह ही स्टीवन स्मिथ की कप्तानी वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम को हल्के में लेगी. डेविड वॉर्नर, स्टीवन स्मिथ और शान मार्श के अलावा भी इस टीम में ऐसे कई खिलाड़ी हैं जिनसे निपटने के लिए कप्तान विराट कोहली और कोच अनिल कुंबले को विशेष योजना बनानी पड़ेगी.

मिचेल स्टार्क

ऑस्ट्रेलिया से पहले भारत दौरे पर आयी टीमों में न्यूजीलैंड, इंग्लैंड और बांग्लादेश की टीमें थीं. इनके प्रमुख तेज गेंदबाजों में ट्रेंट बोल्ट, जेम्स एंडरसन, स्टुअर्ट ब्रॉड, बेन स्टोक, क्रिस वोक्स और तस्कीन अहमद थे. भले ही ये सभी प्रमुख विश्स्तरीय गेंदबाजों में शुमार होते हों लेकिन इनमें से किसी की गेंदबाजी में मिचेल स्टार्क जैसी तेजी और स्विंग का मिश्रण नहीं है और यही खूबी स्टार्क को इन सभी से अलग करती है.

बाएं हाथ के इस तेज गेंदबाज को पारी की शुरुआत में विकेट लेने के लिए भी जाना जाता है. अपने कुल 143 टेस्ट विकेट में से 30 फीसदी विकेट उन्होंने सलामी बल्लेबाजों के ही हासिल किए हैं. स्टार्क की यह खूबी भारत की मुश्किलें बढ़ा सकती है क्योंकि भारत की सलामी जोड़ी काफी समय से संघर्ष करती नजर आ रही है. इस समय भी भारत की ओर से मुरली विजय और केएल राहुल की जिस जोड़ी को मौका दिया जा रहा है उसकी साझेदारी का औसत 19 रन प्रति पारी से भी कम रहा है.

मिचेल स्टार्क की एक खूबी यह भी है कि वे हर परिस्थिति में 140-150 किमी/घंटा की रफ्तार से गेंदबाजी कर सकते हैं. उनकी यह खूबी भारत के निचले क्रम के बल्लेबाजों के लिए बड़ी परेशानी खड़ी कर सकती है. आंकड़ों पर गौर करें तो भारत में खेलते हुए पिछले नौ मैचों में रिद्धिमान साहा, आर अश्विन और रविंद्र जडेजा ने स्टार्क जैसी तेज गेंदबाजी का सामना नहीं किया है. ऐसे में स्टार्क भारतीय गेंदबाजों द्वारा बल्ले से योगदान करने पर अंकुश लगा सकते हैं जो ऑस्ट्रेलिया के लिए काफी ज्यादा राहत देने वाला होगा.

जोश हेजलवुड

इस समय दुनिया के तीन प्रमुख गेंदबाजों में शामिल तेज गेंदबाज जोश हेजलवुड को ऑस्ट्रेलिया में दूसरा ग्लेन मैक्ग्रा माना जाता है. उनकी गेंदबाजी में तेजी और सटीकता का मिश्रण होने के कारण ही उनकी तुलना मैक्ग्रा से की जाती है. उनकी गेंदबाजी का प्रमुख पहलू चतुराई और अनुशासन है जो बल्लेबाज को आगे आकर खेलने के बाद पीछे मुड़ने का मौका नहीं देता. यही वजह है कि 26 साल का यह तेज गेंदबाज 25 से भी कम के औसत से 26 मैचों में 109 टेस्ट विकेट हासिल कर चुका है.

हेजलवुड की एक खासियत उनका जुझारूपन भी है. दिसंबर 2014 में भारत के खिलाफ ही अपना पहला टेस्ट मैच खेलने वाले हेजलवुड इसके बाद से एक मैच छोड़कर ऑस्ट्रेलिया द्वारा खेले गए सभी मैचों का हिस्सा रहे हैं. साथ ही उन्हें लंबे-लंबे बॉलिंग स्पेल डालने के लिए भी जाना जाता है.

नैथन लियोन

इस समय ऑट्रेलिया की टीम में ऑफ स्पिनर नैथन लियोन सबसे अनुभवी खिलाड़ी हैं. वे शेन वार्न और रिची बेनॉड के बाद टेस्ट इतिहास में ऑस्ट्रेलिया के सबसे सफल स्पिनर भी हैं. 63 टेस्ट मैचों में 228 विकेट ले चुके लॉयन को उनके विरोधी हर सीरीज से पहले कमतर आंकते हैं. लेकिन वे अपने प्रदर्शन से हमेशा ही इन सभी को गलत साबित करते रहे हैं. उन्होंने हर तरह की पिच पर विकेट लेकर अपनी गेंदबाजी का लोहा मनवाया है.

अपने टेस्ट करियर में सात बार पांच विकेट लेने वाले नैथन को भारत के खिलाफ और भारतीय पिचों पर खेलने का काफी अनुभव है और यह उनके गेंदबाजी आंकड़ों से भी जाहिर होता है. वे 2013 में दिल्ली में हुए एक टेस्ट मैच में भारत के खिलाफ एक पारी में सात विकेट हासिल कर चुके हैं. यह उनके द्वारा एक पारी में किया गया अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन भी है. उन्होंने अपने टेस्ट जीवन का दूसरा सबसे शानदार प्रदर्शन भी भारत के खिलाफ 2014 में एडिलेड टेस्ट में किया था. इन आंकड़ों को देखते हुए साफ़ है कि भारतीय टीम को नैथन लियोन से निपटने के लिए एक अच्छी रणनीति बनानी होगी.

मिचेल स्टार्क, जोश हेजलवुड और नैथन लियोन के अलावा भारतीय टीम को स्टीवन ओ’ कीफ से भी सतर्क रहना पड़ेगा जो पिछले कुछ समय से ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजी का प्रमुख हिस्सा बने हुए हैं. गेंदबाजी के क्षेत्र में कप्तान स्टीवन स्मिथ के पास जैक्सन बर्ड और हरफनमौला मिचेल मार्श भी हैं. ऐसे में अगर ऑस्ट्रलियाई गेंदबाजों को भारतीय पिचों से थोड़ी भी मदद मिलती है तो वे लगातार छह टेस्ट सीरीज जीत चुकी भारतीय टीम की दिक्कतें बढ़ा सकते हैं.