ज्यादातर लोग जब लैपटॉप लेने जाते हैं तो काले या सफ़ेद रंग का लैपटॉप ढूंढ़ते हैं. या वो लैपटॉप जो उनके पड़ोसी के बेटे के पास है. या फिर वे किसी तरह से लैपटॉप तो खरीद लेते हैं पर उन्हें ये समझ नहीं आता कि विंडोज एक्सपी, विंडोज 7, विंडोज 8 या फिर विंडोज 10 में से कौन सा ऑपरेटिंग सिस्टम उनके लिए सबसे सटीक है. उन्हें ये तो पता होता है कि ऑपरेटिंग सिस्टम कोई बला होती है, पर ये उनके लैपटॉप या डेस्कटॉप की परफॉरमेंस पर कैसे असर डालता है, इसका कौन सा वर्जन उनके सबसे काम का है, वे ये नहीं जानते. आइये जानने की कोशिश करते हैं कि हम अगर लैपटॉप और वो भी विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम वाला खरीदना चाहते हैं तो हमें किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.

विंडोज एक्सपी

एक्सपी क्लासिक थीम पर काम करता है. अगर आपको सी या सी++ लेवल की प्रोग्रामिंग करनी है, और बजट ज्यादा नहीं रखना है तो आप विंडोज एक्सपी इस्तेमाल कर सकते हैं. एक्सपी थोड़ा पुराना है मगर फीचर्स के हिसाब से अभी भी यूज किया जा रहा है. वो कहते हैं ना ‘ओल्ड इज गोल्ड’ वो बस एक्सपी के लिए ही है. एक्सपी 512 एमबी रैम के साथ चलने वाला ऑपरेटिंग सिस्टम है, जबकि तीन जीबी रैम तो आजकल आपका मोबाइल फोन ही खा जाता है. एक्सपी के साथ एक अच्छी बात ये है कि इसे सपोर्ट करने वाले हर तरह के सॉफ्टवेयर बड़ी आसानी से मिल जाते हैं.

विंडोज 7

अगर आप थोड़ा स्टाइलिश और आसान तरीके से, फास्ट इंटरनेट ब्राउजिंग और बढ़िया ग्राफिक्स क्वालिटी जैसे फीचर इस्तेमाल करना चाहते हैं तो विंडोज 7 के बारे में सोच सकते हैं. इसे इस्तेमाल करने में आपको बहुत ज्यादा दिमाग नहीं खपाना पड़ेगा और काम भी आपका बढ़िया तरीके से होगा. मतलब आप पुराना छोड़ना भी नहीं चाहते और नयापन भी चाहते हैं, तो विंडोज 7 ले सकते हैं.

जैसे आपके पुराने घर को पेंट करके नया बनाया जाता है, वैसे ही एक्सपी में कुछ फीचर्स जोड़कर विंडोज 7 बना है. विंडोज 7 में एक्शन सेंटर वाला नया फीचर बड़े काम का है. इसके अंदर कंप्यूटर की सिक्योरिटी और मेंटेनेंस दोनों आते हैं.

विंडोज 8

विंडोज 8 एक मिक्स्ड परफॉर्मेंस वाला ऑपरेटिंग सिस्टम है. जोकि बेहतरीन प्रेजेंटेशन, सिक्योरिटी और टचस्क्रीन डिवाइस सपोर्ट करता है. विंडोज 8 के साथ विंडोज डिफेंडर भी काम करता है जो आपके कंप्यूटर को सुरक्षित बनाता है. इसके रहते आपको एंटी-वायरस खरीदने की जरुरत नहीं है. मगर ये फीचर्स होने के बावजूद भी, विंडोज 8 उतना यूजर फ्रेंडली नहीं है. इस ऑपरेटिंग सिस्टम का यूजर इंटरफेस बहुत ज्यादा कन्फयूजिंग और मुश्किल है. इसलिए इसका दूसरा वर्जन विंडोज 8.1 ज्यादा सही विकल्प है. इसे इस्तेमाल करना भी थोड़ा आसान है. विंडोज 8.1 की खासियत है इसका बैटरी बैकअप. जो सिस्टम विंडोज एक्सपी और सेवन के साथ दो घंटे का बैटरी बैकअप देता है वही विंडोज 8.1 के साथ चार घंटे यानी करीब दुगना बैटरी बैकअप देने लग जाता है.

विंडोज 10

विंडोज 8 में जो भी कमियां थी उन्हें विंडोज 10 दूर करता है. ये ऑपरेटिंग सिस्टम अच्छी पर्फोरमेंस देने के साथ साथ यूजर फ्रेंडली भी है. इसके स्टार्ट मेनू में ही सर्च का ऑप्शन है, जोकि लोकल और वेब दोनों तरह की सर्च को सपोर्ट करता है. विंडोज 10, विंडोज 7 और 8 का कॉम्बो है. ये ऑपरेटिंग सिस्टम बेहतर मल्टीटास्किंग, यूनिवर्सल एप और ऑटोमेटिक अपडेट के लिए जाना जाता है और अच्छा ‘लुक एंड फील’ भी देता है. अगर आप गेमिंग के शौक़ीन हैं तो आपको विंडोज 10 पर काम करने में मजा आएगा. लेकिन एक्स्ट्रा एक्टिविटी के लिए विंडोज 10 के पास सारे जरूरी सॉफ्टवेयर उपलब्ध नहीं हैं. इस खामी को दूर करने के लिए हाल ही में इसका एनिवर्सरी अपडेट भी मार्केट में आ चुका है.

जेनरेशन के हिसाब से आगे बढ़ने में कोई बुराई नहीं है. अगर आप प्रोग्रामिंग (डॉस, सी, सी++) वाले काम नहीं करना चाहते तो विंडोज 10 ले सकते हैं. और अगर आपको कोर प्रोग्रामिंग पर काम करना है, आप ज्यादा रैम वाला सिस्टम नहीं खरीदना चाहते तो एक्सपी से बढ़िया कोई दूसरा ऑप्शन नहीं आया है मार्केट में. इस हिसाब से आपके लिए एक्सपी ही बेस्ट है. हालांकि, प्रोग्रामिंग विंडोज 7 पर भी संभव है, लेकिन कोर प्रोग्रामिंग के मामले में जानकार इसे एक्सपी से बेहतर नहीं मानते हैं.