पाठकों के भद्दे कमेंट्स से परेशान मीडिया संस्थानों के लिए गूगल की तरफ से एक अच्छी खबर है. कंपनी एक ऐसा टूल यानी हथियार उपलब्ध कराने जा रही है जिसके बारे में कहा जा रहा है कि वह इन आपत्तिजनक टिप्पणियों को दिखने से रोक देगा. इस नए टूल का नाम पर्सपेक्टिव है. गूगल का कहना है कि कृत्रिम बुद्धि (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से लैस यह टूल भद्दे कमेंट्स को पहचान सकता है.

बेहूदा कमेंट्स वेबसाइटों और सोशल मीडिया पर एक बड़ी समस्या हैं. मुश्किल यह है कि अगर मानव संसाधन को इन्हें छांटने के काम में लगाया जाए तो सिर्फ इसी काम की लागत बहुत बढ़ जाएगी क्यों यह एक विराट समस्या है. दूसरी तरफ, अगर मशीन यह काम करती है तो वह भाषा की उन बारीकियों को अक्सर नहीं पकड़ पाती जिसके आधार पर किसी कमेंट को भद्दा कहा जा सकता है. गूगल के बड़े अधिकारियों की मानें तो कई मीडिया संस्थाओं ने सिर्फ इसी वजह से अपने कमेंट्स सेक्शन बंद कर दिए हैं.

गूगल के मुताबिक अमेरिका की आधी आबादी इस तरह के कमेंट्स की शिकार हो चुकी है. मीडिया संस्थानों के अलावा सोशल मीडिया पर भी यह खतरा बना रहता है. इसके चलते एक तिहाई यूजर्स इन्हीं कमेंट्स के डर से इंटरनेट पर अपनी पोस्ट को खुद ही छिपा (सेल्फ सेंसरिंग) देते हैं. गूगल ने बताया कि मीडिया संस्थानों के बाद सोशल मीडिया को भी यह टूल मुफ्त में उपलब्ध करवाया जाएगा.

अमेरिका के प्रमुख अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपने रीडर्स कमेंट सेक्शन में एक मर्यादित और विचारशील माहौल बनाए रखने के लिए गूगल से मदद की गुहार की थी. इस पर ध्यान देते हुए गूगल ने बीते सितबंर में यह टूल तैयार किया था. फिलहाल इस टूल को न्यूयॉर्क टाइम्स, द इकनॉमिस्ट और द गार्डियन जैसी संस्थाओं द्वारा परखा जा रहा है. इस टूल को शुरू में सिर्फ अंग्रेजी भाषा के लिए तैयार किया गया है लेकिन जल्द ही इसे दूसरी प्रमुख भाषाओं के लिए भी तैयार किया जाएगा.

ट्विटर ने भी इसी महीने बताया था कि वह भी ऐसे घृणित संदेशों को भेजने वाले लोगों को सोशल मीडिया से दूर करने की कवायद में जुट चुका है. बीते साल गूगल, ट्विटर, फेसबुक और माइक्रोसॉफ्ट सरीखी कंपनियों ने यूरोपीय आयोग के साथ ‘कोड ऑफ गुड कंडक्ट’ नाम का एक करार किया है. इसके मुतबिक ये कंपनियां यूजर्स द्वारा बताए सबसे भद्दे संदेशों को 24 घंटों के भीतर पहचानकर उसे हटा देंगी.